आ गई Corona को हराने वाली एक और दवा – 2 DG

भारत ही है दुनिया में एकमेव ऐसा देश जिसने चार चार दवाइयां तैयार कर ली हैं कोरोना के खिलाफ..अब आ गई है 2DG..

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भारत के डीआरडीओ के नाम है ये कामयाबी जिसने भारत की चौथी दवा तैयार करके कोरोना के विरुद्ध युद्ध में भारत का चौथा हथियार बना डाला है. डीआरडीओ का दावा है कि उनकी ये दवा कोरोना के खिलाफ भारत में ही नहीं दुनिया भर में गेमचेंजर का काम करेगी.

जल्दी होती है रिकवरी

अब आपको कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है बस सावधान रहने की जरूरत है. कारण ये है कि भारत में हमारे पास चार चार हथियार हैं जो कोरोना दुश्मन की हड्डी-पस्ली तोड़ने में कामयाब हैं. जी हाँ, कोरोना को हराएगी भारत के डीआरडीओ की नई दवा. जानकारी मिली है कि इस दवा के इस्तेमाल से मरीजों की जल्दी होती है रिकवरी.

आपात स्थिति में होगी इस्तेमाल

इस बात से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि डीआरडीओ द्वारा निर्मित इस दवा 2डीजी का उपयोग तब किया जायेगा जब बाकी सभी दवाइयाँ नाकाम हो जायेंगी अर्थात इस दवा का इस कोरोना रोधी दवा का इस्तेमाल आपात स्थिति में कोरोना संक्रमित मरीजों पर किया जाएगा. डीआरडीओ की 2-डीआक्सी-डी-ग्लूकोज (2-DG) नाम से विकसित इस दवा को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से स्वीकृति प्राप्त हो गई है.

नई उम्मीद बनी है 2डीजी

देश में आतंक मचा रहे कोरोना वायरस के कहर के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने दी है देश को ये खुशखबरी. डीआरडीओ की नई दवा ने कोरोना के खिलाफ जंग जीतने की नई उम्मीद को जन्म दिया है. आपात स्थिति में कोरोना संक्रमित मरीजों पर इस्तेमाल की जाने वाली इस दवा से कोरोना संक्रमित मरीजों में आक्सीजन की कमी की चुनौती को काफी कम किया जा सकता है. यह नई कोरोना रोधी दवा ने क्लीनिकल ट्रायल में मरीजों की आक्सीजन पर निर्भरता को भी कम किया है.

मध्यम और गंभीर रोगियों हेतु लाभदायक

इस दवा के ट्रायल के दौर में देखा गया कि इस दवा लेने वाले लोग बड़ी संख्या में आरटीपीसीआर टेस्ट में निगेटिव पाए गए. इस दवा ने अस्पताल में भर्ती मरीजों की आक्सीजन पर निर्भरता को भी एक बड़ी सीमा तक कम करके दिखाया है. 2डीजी दवा लेने वाले मरीज दूसरी दवाओं को लेने वाले मरीजों के मुकाबले जल्दी स्वस्थ हुए हैं. डीआरडीओ ने बताया कि 2डीजी कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद लाभदायक सिद्ध हो रही है. इस दवा को कोरोना के मध्यम और गंभीर मरीजों को अस्पताल में उपचार के समय दिया जा सकता है.

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