Black Fungus: सावधान, ब्लैक फंगस के लक्षण और उपचार जानिये यहाँ

सावधान, ब्लैक फंगस हो सकता है घातक..यहाँ पढ़िये क्या इसके लक्षण हैं और क्या हो सकते हैं इसके संभावित उपचार..

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प्रारंभ में ही यदि ब्लैक फंगस का उपचार न किया गया तो ये घातक नहीं, बहुत ही ज्यादा घातक हो  सकता है..घातक होने का अर्थ है कि ब्लैक फंगस आपकी नेत्र ज्योति ले सकता है, आपकी आँख निकलवा सकता है, आपके जबड़े को तोड़ सकता है, आपके दिमाग में जा कर आपको पागल कर सकता है, लकवे का अटैक दे सकता है. और बहुत ही ज्यादा घातक ब्लैक फंगस तब हो जाता है जब यह रोगी की जान ले लेता है. जान के साथ कोई समझौता नहीं होता, इसलिये अनजान बने रह कर खतरा न उठाइये. इसके बाद अगले लेख में हम आपको व्हाइट फंगस की जानकारी देंगे.

कोरोना का बेटा है ब्लैक फंगस

जानकार बनिये और ब्लैक फंगस से खुद को बचाने के लिये तैयारियाँ कर लीजिये. सबसे जरूरी ये जानना है कि ये वायरल नहीं है लेकिन वायरल कोरोना से अधिक घातक है. और ये भी जानना जरूरी है कि ब्लैक फंगस कोरोना का ही बेटा है. अगर रोगी कोरोना संक्रमण हुआ है या उसे पहले कोरोना का संक्रमण हो चुका है – तो इन दोनो ही स्थितियों में ब्लैक फंगस आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है.

चारों दरिंदों में सबसे घातक है व्हाइट फंगस

अब तक जैसे जानकारी मिली है भारत पर हमला करने वाले चार दरिंदों में सबसे घातक है चौथा दरिंदा – इस बात को ऐसे कहें कि कोरोना वायरस-स्ट्रेन वन, कोरोना वायरस-स्ट्रेन टू और व्हाइट फंगस की इस चौकड़ी में सबसे खतरनाक है व्हाइट फंगस. विशेषज्ञों के अनुसार, व्हाइट फंगस का संक्रमण ब्लैक फंगस से अधिक जानलेवा है क्योंकि इसका फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों पर गहरा असर होता है.

ब्लैक फंगस उर्फ म्यूकरमायकोसिस

ब्लैक फंगस को बायलाजिकल नाम म्यूकरमाइकोसिस है जिसके बढ़ते मामलों ने पूरे देश में चिंता का वातावरण निर्मित कर दिया है. एम्सचीफ रणदीप गुलेरिया साफ शब्दों में कहते हैं कि म्यूकरमायकोसिस अर्थात यह काला फंगल संक्रमण नया नहीं है, लेकिन इसकी बढ़त कोविड​​​​-19 के मामलों की बढ़त के कारण देखी जा रही है. जैसा कि स्वामी रामदेव ने भी कहा है, गुलेरिया भी ब्लैक फंगस के पनपने के पीछे रोगी को दिये गये स्टेरॉयड को जिम्मेदार मानते हैं और कहते हैं कि इस तरह अंधाधुन्ध स्टेरायड का ‘दुरुपयोग’ बहुत नुकसानदेह सिद्ध हो सकता है.

ब्लैक फंगस के कारण

सबसे पहले तो जैसा अभी ऊपर हमने देखा – स्टेरायड दिये गये रोगी को ब्लैक फंगस होने की प्रबल आशंका रहती है चाहे वह किसी भी रोग के उपचार हेतु दिया जा रहा हो. इसी तरह कोरोना के वर्तमान रोगी, कोरोना के पूर्व-रोगी, मधुमेह के रोगी और वर्तमान में स्टेरॉयड पर रहने वाले लोगों पर ब्लैक फंगस के संक्रमण का संकट अधिक मंडराता है. जैसा आईसीएमआर-स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी कहती है – इस बीमारी के प्रमुख आशंकित कारकों में अनियंत्रित मधुमेह, स्टेरॉयड द्वारा इम्यूनोसप्रेशन, लंबे समय तक आईसीयू में रहना एवं वोरिकोनाज़ोल थेरेपी सम्मिलित हैं. म्यूकरमाइकोसिस में प्रमुखतः साइनस अर्थात नाक तथा आंख शामिल होती है, यदा-कदा यह संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच जाता है और बहुत घातक हो जाता है.

ये लक्षण दिखें तो तुरंत उपचार प्रारंभ करें

यदि नाक का  रंग काला पड़ रहा हो या उसका प्राकृतिक रंग फीका पड़ रहा हो, दृष्टि में धुंधलापन आये या दोहरापन महससूस हो, सीने में दर्द हो, सांस लेने में कष्ट हो और खांसी हो रही हो जिसमें खून भी आ रहा हो – तो ये ब्लैक फंगस हो सकता है. पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने एक एडवाइजरी जारी की है जिसका शीर्षक ‘म्यूकरमाइकोसिस – इफ अनकेयर्ड फॉर – मे टर्न फेटल’ दिया है. इसमें इस बीमारी के संकेतों के लिये चेतावनी दी गई है – जैसे आंखों या नाक के आसपास दर्द और लाली, बुखार, सिरदर्द, खांसी और उल्टी के साथ सांस लेने में तकलीफ होना, आदि बताया गया है. इसके अतिरिक्त ये एडवाइजरी बताती है कि यदि नाक बंद हो गई हो, चेहरे में एकतरफ दर्द हो, या सुन्नपन आ गया हो, अथवा नाक या तालू के ऊपर कालापन आ जाये, दांत में दर्द हो, दांतों में ढीलापन दिखे, तो ये सभी संक्रमित होने के लक्षण सिद्ध हो सकते हैं.

संभावित उपचार ये हैं

मूलरूप से उपचार आपको करना ही नहीं है, यह आपके डॉक्टर को करना है. आप अपने मन से कदापि कोई दवा न लें. यहाँ मात्र जानकारी हेतु आपको एलोपैथी की इस दवा का नाम आपको बताया जा रहा है जो है एम्फोटेरिसिन-बी. किन्तु जो दवा आप ले सकते हैे और जो आपकी जान बचाने की क्षमता रखती है वो है – श्वासारी गोल्ड जो आपको पतंजलि स्टोर पर आसानी से मिल सकती है. किन्तु हम फिर भी यही कहेंगे कि दवा आयुर्वेद की हो या एलोपैथी की – आप अपने चिकित्सक के परामर्श से ही लें क्योंकि हर रोगी के शरीर की मेडिकल कंडीशन अलग अलग हो सकती है.

सर्वोत्तम उपचार ये है

और इन दोनों से ही इतर एक उपचार है जो सभी लोग कर सकते हैं वो है प्राणायाम – कपाल भाति, भ्रामरी और अनुलोम विलोम. प्राणायाम नामक यह दवा कोरोना वायरस अथवा म्यूकरमायकोसिस के संक्रमणग्रस्त रोगी भी ले सकता है और कोई भी स्वस्थ व्यक्ति भी. रोगी को ये प्राणायाम स्वस्थ कर सकते हैं और स्वस्थ व्यक्ति को सदा ही स्वस्थ रख सकते हैं. सुबह पांच बजे आस्था चैनल पर आइये औऱ दो घंटे स्वामी रामदेव को देखिये तथा उनको सुनिये, जो मुफ्त में ही सारी दुनिया को अमूल्य जीवन ज्ञान दे रहे हैं. दुहरा फायदा उठाइये और स्वामी जी के साथ योग भी कीजिये और स्वास्थ्य रक्षा तथा प्राण रक्षा का जीवन-ज्ञान भी प्राप्त कीजिये.

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