CM Yogi: UP में योगी की सबको खुश करने की ईमानदार कोशिश

यूपी में ये जनता भी अड़ी है किसी बच्चे की तरह या तो सब चाहिये या कुछ भी नहींं! ..सीएम योगी की मगर कोशिश यही है..कि सबको खुश कर सकें और सबको सब दे सकें..

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उत्तरप्रदेश में योगी सरकार सबका साथ सबका विकास की घोषणा करके चुनावी जीतने की मन्शा रखती है. घोषणा करके चुनाव जीतने की कोशिश औऱ उन घोषणाओं पर अमल की कोशिश दोनो ही अलग अलग बाते हैं और आज यूपी की जनता इन दोनों में फर्क करना जान गई है. हो सकता है बीजेपी को ये लगता है कि ये पार्टी का मास्टर स्ट्रोक साबित हो लेकिन इस दिशा में चुनावी अभियान आगे बढ़ाना बहुत चुनौती पूर्ण है क्योंकि एक वक्त पर आप एक को तो खुश कर सकते हैं एक साथ सबको खुश नहीं कर सकते.
 वैसे तो चुनाव का खेल किसी तरह आसान नहीं है लेकिन उत्तर प्रदेश की चुनावी बिसात पर ये खिले खलेना बिलकुल आसान नहीं है. यहां की जनता का मूड पढ़ना और उस हिसाब से उनको खुश करने की तैयारी करना ये दोनों बिलकुल अलग बाते हैं. जब ये बातें एक दुसरे से जुड़ जाती हैं तब ही जाकर असली उम्मीद नज़र आती है. यूपी में बीजेपी की लाज बचाने और फिर एक बार सरकार बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाये योगी आदित्यनाथ हर वर्ग हर जाति हर धर्म को कुछ न कुछ चुनावी वादे करके खुश करने की कोशिश में हैं जो चुनावी तौर पर तो ठीक है परंतु व्यवहारिक तौर पर बिलकुल आसान नहीं है.
उत्तरप्रदेश के चुनाव की तारीख जैसे जैसे करीब  आती जा रही है सभी राजनीतिक दलों की चुनावी कवायद उतनी ही ज्यादा तेज़ होती जा रही है. प्रदेश का सत्ताधारी दल भी इसी होड़ में अपनी सारी कोशिशें आजमा रहा है और ज्यादा से ज्यादा वोटरों को अपने पाले में खींचने पर उतारू नज़र आता है. ऐसे में अगर बीजेपी की बात करें तो उसकी रणनीति सबको खुश करने की दिखाई देती है जो ऊपर से तो फायदेमंद दिखती है लेकिन असलियत में उतनी आसान भी नहीं है.
यूपी की सत्ताधारी योगी सरकार ने अबकी बार तीन सौ पचास पार का जो लक्ष्य रखा है वो सपा के इस बार चार सौ पार के नारे से छोटा तो है लेकिन ये टारगेट उतना ही मुश्किल है जितना सरकार बनाने का टारगेट. सीएम योगी ने इसके लिए अब बड़ी चुनावी कोशिश को अंजाम देने की तैयारी की है जिसके मुताबिक़ सबको देंगे कुछ न कुछ बीजेपी करेगी सबको खुश.
ये ख़याल दरअसल पहली बार किसी पार्टी के जहन में नहीं आया है. आज़ाद भारत के इतिहास में देश के चुनावों में भी और प्रदेश के चुनावों में भी ये कोशिशें कई बार हो चुकी हैं और हर बार इस कोशिश को अंजाम देने की कोशिश करने वालो को गद्दी नहीं मिली है. पहली बात तो ये कि बात खुश करने की बजाए हित की की जानी चाहिए और दूसरी बात कि अपनी बात अपने वोटर तक पहुँचाना और अपनी बात जनता को समझाना ये भी आसान नहीं है और इसी कारण चुनावी परिणाम गड़बड़ा जाते हैं क्योंकि देश की जनता भी चुनावों के मौसमी खेल को लगभग उतना ही बढ़िया खेलना सीख गई है जितने देश के सियासतदार.
ये जनता भी अड़ी है किसी बच्चे की तरह या तो सब चाहिये या कुछ भी नहीं! यूपी के चुनाव संग्राम में जो हथियार योगी की बीजेपी आजमाने जा रही है वह सबको खुश करने की चुनावी कोशिश है जिसमें यूवा, महिला, किसान, व्यापारी की तरह ही स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली पानी भी शामिल है. इसमें रोजगार भी शामिल है तो इसमें कानून व्यवस्था भी बराबर से शामिल है. आइये सबसे पहल बात करते हैं महिलाओं की..क्या ऑफर कर रहे हैं योगी महिला हित में.
महिला हित में जो सबसे अहम बात है वह है क्राइम अगैन्सट वीमेन याने कि महिलाओं के विरुद्ध अपराध. योगी क़ानून व्यवस्था और सक्षम बना कर महिला हिंसा की रोकथाम की दिशा में कदम उठाने की बात कह रहे हैं. उनकी बात में दम नज़र आता है क्योंकि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में बलात्कार, हत्या और चोरी के मामलों में बीते 8 सालों में कमी आई है. ये आंकड़े ये भी बताते हैं कि जहां देश का क्राइम रेट 56.5% है, तो वहीं उत्तर प्रदेश में ये 45.1% है.
महिला संबंधी अपराध में उत्तर प्रदेश 16वें नंबर पर है. फिलहाल योगी की कोशिश इन आंकड़ों को सामने रख कर महिला हित रक्षा में कानून व्यवस्था को और भी सक्षम बनाने की बात कह कर महिलाओं को खुश करने की कोशिश कर सकते हैं.इसके अलावा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की बात और उसकी उपलब्धियां गिना कर महिलाओं को प्रसन्न करने की कोशिश हो सकती है.
हमारे बुजुर्ग कहते हैं कि एकै साधे सब साधे सब जाए..ये वो हकीकत है जो मुहावरों की शक्ल में ज़िंदगी से जुड़ती है और चुनाव भी आज ज़िंदगी का ही एक हिस्सा है. इस बात का ध्यान योगी जी और उनकी पार्टी को रखना होगा कि सबको खुश करने की कोशिश में कहीं ऐसा न हो कि जो उनके हाथ में है वो भी उनके हाथ से निकल जाए. कहने का मतलब है कि रणनीति तौर पर व्यवहारिक हो कर फैसला करना बहुत जरूरी है.
 अब बात करते हैं युवाओं की. योगी की बीजेपी ने युवाओं को खुश करने के लिये उनके  सबसे बड़े हित की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है. योगी सरकार ने युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार देने की घोषणा करके खुश करने की कोशिश की है. वैसे तो सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के सर्वेक्षण के अनुसार रोजगार के मामले में  दिल्ली, बंगाल और राजस्थान जैसे कई राज्य यूपी से पीछे हैं. सीएमआईई के ताजा आंकडों के यूपी में बेरोजगारी दर 6.9 फीसदी दर्ज की गई है जो मार्च 2017 के मुकाबले लगभग तीन गुना कम है.
आंकड़ों के मुताबिक योगी सरकार ने पिछले 4 साल में युवाओं को 4 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां देने का रिकार्ड बनाया है. योगी सरकार ने दावा किया है कि प्रदेश में कोरोना काल में भी रोजगार देने की रफ्तार कम नहीं होने दी गई है. ये सब देखते हुए कहा जा सकता है कि योगी जी युवाओं के ये आंकड़े दिखाते हुए रोजगारी वादा करके खुश करने की पूरी कोशिश करेंगे.
अब उत्तर प्रदेश के एक बड़े वर्ग की बात करते हैं जिसमे बहुत सारे वर्ग अपनेआप शामिल हैं और ये है प्रदेश का किसान वर्ग. किसानों को खुश करने के लिए बीजेपी आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना की बात कर सकती है जिसके माध्यम से 722.85 करोड़ रुपये खर्च करके प्रदेश के 27 लाख किसानों को की आय में इजाफा करने की कोशिश की जायेगी. किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के जरिए खेती करने वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेत से बाजार तक हर स्तर पर सुविधा व संसाधन उपलब्ध कराने पर यह धनराशि अगले पांच वर्ष में खर्च होगी. योगी की पार्टी किसानों के लिए जैविक खेती, कॉन्ट्रेक्ट खेती और वन नेशन, वन मण्डी की बात कर सकती है जिसके माध्यम से खेत की सुरक्षा और खेत से उपजे अनाज के विक्रय दोनों की सुरक्षा का दावा करके किसानों की सहानुभूति अर्जित करने की योजना हो सकती है.
 अब बात करें प्रदेश के उस सबसे बड़े वर्ग की जो देश का भी सबसे बड़ा वर्ग है वो है निर्धन वर्ग. चाहे देश के हों या प्रदेश एक निर्धनों को कुछ भी अलग से नहीं चाहिए वो करते हैं सिर्फ मूलभूत जरूरतों की पूर्ती की मांग. इनमें सबसे पहले हम बात करते हैं  शिक्षा की. निर्धन वर्ग के लिए आज की महंगी शिक्षा बहुत बड़ा सपना है. ऐसे में योग सरकार मोदी सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का जिक्र करते हुए इस दिशा में प्रदेश सरकार की योजनाओं को सामने रख सकती है. प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाली दो बहनों में से एक की फीस माफ़ होगी, इसके अलावा प्रदेश सरकार ने राज्य के छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा-योजना की घोषणा की है.
इस नई शुरुआत में राज्य सरकार ने 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा देने की शुरुआत की जा रही है. इन योजनाओं का उल्लेख करके छात्रों को बेहतर भविष्य निर्माण और अकादमिक शिक्षा में मदद करने के लक्ष्य को  बीजेपी सामने रखेगी और निर्धन वर्ग के लिए शिक्षा की इस सौगात को चुनाव में भुनाने की कोशिश करेगी.
 पैसे के नज़रिये से प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है व्यापारी वर्ग जो देश के किसी भी प्रदेश में वहां की सरकार के लिए ही नहीं वहां के सभी राजनीतिक दलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण वर्ग होता है जिसे खुश करने की कोशिश सभी पार्टियां करती हैं. जाहिर है बीजेपी भी प्रदेश के व्यापारियों को लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती. योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना यूपी सरकार का पहला पेपर लेस बजट पेश करते समय ही व्यापारियों को खुश करने की शुरुआत कर दी थी. वित्त मंत्री ने अपने ने बजट भाषण में कहा कि 40 लाख मजदूरों को हमने कोरोना काल में अलग-अलग प्रदेशों से वापस लाने का काम किया था ताकि प्रदेश में चल रहे उद्योग धंधों पर इसका बुरा असर न पड़े. इस तरह व्यापारी हित में हर स्तर पर पार्टी की योजनाओं को सामने योगी व्यापारियों के पूरे समर्थन की पूरी कोशिश कर सकते हैं.
 अब सभी वर्गों को और सभी जाट-धर्मों को खुश करने की योगी की योजना की बात करते हैं जिसमे सबसे पहले आता है पानी. देश और प्रदेश में वास्तव में जल ही जीवन है. पानी बिन सब सून. इसलिए प्रदेश में जल आपूर्ति अधिक से अधिकतम करने की अपनी योजना को सामने रखते हुए उन वर्गों को सबसे पहले खुश करने की कोशिश की जायेगी जो निर्धनता से जुड़े हैं और जिनको पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है और इसी प्रकार किसान और व्यापारी को भी जल आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में देने की बात कह कर उनके मन में भी पार्टी-प्रेम जगाने का प्रयास किया जा सकता है.
फिलहाल योगी सरकार ने वर्ष 2021-2022 में 08 जल परियोजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है. योगी सरकार अब भविष्य में जल संकट से निपटने की तैयारी में जुट गई है. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के साथ विंध्य क्षेत्र की महिलाओं को भी अब मीलों से पीने का पानी ढोकर लाना पड़ता है.  राज्य के इस बड़े भू-भाग को सरकार पेयजल के सबसे बड़े संकट से जल्द निजात दिलाने पर लगातार काम चल रहा है.. सब कुछ योजना के अनुकूल चला तो दिसम्बर माह से बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के हजारों गांवों में घर-घर शुद्ध पेय जल की आपूर्ति शुरू हो जाएगी. सरकार इस दावे को भी भुनाने की कोशिश करेगी.
कोशिशें करना अच्छी बात है और उन कोशिशों में जान लगा देना और भी अच्छी बात है लेकिन अगर बात चुनावी हो माहौल चुनावी और मौसम भी चुनाव का हो तो किसी कोशिश का परिणाम क्या निकलेगा कुछ कहा नहीं जा सकता. वजह बिलकुल साफ़ है क्योंकि कागज पर लिखी हुई इबारतें बहुत जोरदार दिखाई देती हैं और ख़ुशी भी बहुत देती हैं लेकिन जब वही इबारतें हकीकत की चुनावी जमीन पर लिखी जाती हैं तो उनका चेहरा भी बदल जाता है और उनकी चाल भी बदल जाती है.
अब हर वर्ग को खुश करने की एक और बड़ी योजना की बात कर लेते हैं. ये है बिजली देने की योजना. केजरीवाल सरकार ने फ्री बिजली का वादा करके चुनाव जीत लिया था लेकिन योगी सरकार ने फ्री बिजली की बात नहीं कही है जो इस बार यूपी में आमआदमी पार्टी ने फिर कह दिया है. योगी सरकार बिजली संकट को प्रदेश में दूर करके लोगों के मन में अपने प्रति विशवास जगाना चाहेगी. कोरोना काल में बिजली बिल का भुगतान न कर पाने वाले उपभोक्ताओं को योगी सरकार ने राहत दी है. योगी सरकार ने किसानों, व्यापारियों और छोटे उपभोक्ताओं को बिजली बिल में सरचार्ज से शत प्रतिशत छूट देने का फैसला लिया है.
राज्य सरकार के पिछले साढ़े चार सालों में 1.38 करोड़ से अधिक घरों को निशुल्क नया बिजली कनेक्शन दिए बिजली के मोहताज रहे लाखों गाँवो और कस्बों को तक बिजली पहुंचाने के साथ ही शहरों को 24 घंटे और ग्रामीण अंचल में 18 से 22 घंटे तक बिजली की सप्लाई दी है. इन उपलब्धियों और योजनाओं को गिना कर प्रदेश में बीजेपी की रणनीति लोगों के दिलों में अपना घर बनाने की होगी. हाँ ये कोशिश कामयाब कितनी होगी ये देखने वाली बात होगी क्योंकि कथनी और करने में अक्सर जमीन आसमान का फर्क होता है.

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