Corona के तीन सुपाड़ी किलर -ब्लैक, व्हाइट और येलो फंगस

देश की सुधरती औऱ संवरती जिन्दगी में अचानक ब्रेक लग गया.. शोर सुनाई दिया - कोरोना आया..कोरोना आया..हटो बचो !!

1
164
 
ये सब शुरू हुआ 11 अप्रेल 2021 के बाद से. देश में शांति थी. पिछली बार कोरोना से घायल भारतवर्ष फिर से खड़ा हो रहा था और अगर 11 अप्रेल की बात करें तो इस दिन का चित्र कुछ ऐसा नजर आता है – दुकाने पूरी खुली हुई हैं. खरीद-फरोख्त लगातार चल रही है. मॉल्स में आवाजाही बनी हुई है. जिम्नेज़ियम और डान्स सेन्टर में फिर से भीड़ होने लगी है. देश भर में खेल चल रहे हैं. मुंबई में आईपीएल चल रहा है. स्कूल के बच्चे बेकरारी से इन्तजार कर रहे हैं कि जल्दी ही खबर आयेगी कि उनका स्कूल फिर से बाकायदा शुरू हो रहा है और बच्चे अब फिर पहले की तरह से स्कूल जायेंगे.

ऐसे इतिहास ने दुहराया खुद को

दूसरे शब्दों में कहें तो इतिहास ने देश में अपनेआप को फिर से रिपीट करना शुरू कर दिया था अर्थात 22 मार्च 2020 के पहले वाले भारत का चित्र फिर से आज के भारत में दिखाई देने लगा था. अचानक सुधरती औऱ संवरती जिन्दगी में ब्रेक लग गया. शोर मचा कि कोरोना आया..कोरोना आया..हटो, बचो !!

अफवाह बन गई सच

शुरू में लगा कि ये अफवाह है लेकिन कुछ ही दिनों में इस अफवाह में सच्चाई दिखाई देने लगी. सच्चाई इतनी तेजी से दिखी और इतनी जोरदार दिखी कि अचानक लगने लगा कि सच में वही वाला कोरोना फिर आ गया. फिर हमें मास्क लगाना पड़ेगा. फिर सोशल डिस्टेन्सिंग करनी पड़ेगी. फिर हर बात में सैनेटाइजर निकालना पड़ेगा. अब फिर लॉकडाउन होगा. लेकिन हम आधे सही और आधे गलत थे. लॉकडाउन भी लग गया औऱ हमें सावधानियाँ भी कोरोना वाली रखनी पड़ गईं लेकिन ये पहले वाला कोरोना नहीं था. ये कोरोना पहले वाले से ज्यादा घातक था.

पाँच हमले हुए एक के बाद एक

पिछले सवा साल में देश पर चार दुश्मनों ने हमला किया है. कोरोना स्ट्रेन वन, कोरोना स्ट्रेन टू, ब्लैक फंगस और अब व्हाइट फंगस भी. और इस बात पर आपका ध्यान जायेगा तो ये आपको हैरान भी करेगी और परेशान भी. ये चारों दुश्मन एक के बाद एक और घातक होते चले गये और अब ये अपनी पूरी रवानी पर हैं. ये बात अलग है कि कहा जा रहा है कि जून के माह के अंत तक कोरोना भारत छोड़ कर उसी तरह भाग जायेगा जैसे अंग्रेज देश छोड़ कर भागे थे.

मोदी ने पहले भी बचाया, अब भी बचायेंगे

लेकिन यहाँ देखने वाली बात ये है कि अंग्रेज देश छोड़ कर तो भागे थे लेकिन अपने पीछे काले अंग्रेजों को छोड़ गये थे जिन्होंने सत्तर साल देश की सरकार चलाई और देश का बेड़ा गर्क कर दिया. किन्तु गीता में कहा गया है कि विनाशाय च दुष्कृताम संभवामि युगे युगे. नरेन्द्र मोदी को अपना निमित्त बना कर जनार्दन ने जनता के हाथों उसे देश का सर्वोच्च दायित्व प्रदान करवाया और नरेन्द्र ने असुरों से भारत को फिर एक बार मुक्त कराया. यद्यपि यह संघर्ष अभी भी चलायमान है और आशा तथा अपेक्षायें भी उतनी ही शक्तिशाली हो कर अस्तित्वमान हैं.

महाघातक तीन हमलावर फंगस

देश का यही राजनीतिक चित्र उसके स्वास्थ्य-पटल पर भी दिखाई दिया. कोरोना नामक शत्रु अपने बाद अपना वारिस छोड़ गया और वारिस ने बचा खुचा काम तमाम किया. कोरोना आया देश घबराया. ब्लैक फंगस आया तो देश थर्राया किन्तु अब महाघातक व्हाइट फंगस और येलो फंगस आ गये हैं -अब देश चिन्तित है और यह चिन्ता गंभीर है.

जैविक हथियार का कहर है ये

कोरोना वन से लेकर येलो फंगस तक – जान के डकैतों की ये श्रंखला अपनेआप पैदा नहीं हो गई. ये आसमानी कहर नहीं न ही कोई इन्सानी जादू था. ये एक साजिश थी जो दुनियावी स्तर पर आजमाई गई और भारत के खिलाफ अपनाई गई. इस साजिश के केन्द्र में था दुनिया का सबसे बड़ा खलनायक देश चीन. जिसे सब जान गये हैं पर उसके सामने खड़े हो कर उसको चुनौती देने की हिम्मत चार देशों ने ही दिखाई है – भारत, अमेरिका, वियतनाम और ताईवान. बाकी सारे विषैले नाग चीन की नीयत से तो परिचित हैं किन्तु मूक दर्शक बने हुए हैं. हो सकता है सभी को चीन के खिलाफ बस एक मौके का इन्तजार हो. और शायद नहीं, पक्की तौर पर चीन इस सच्चाई को जानता है.

भारत नहीं है बेखबर

भारत सरकार इस जैविक हमले के प्रति बेखबर है, ऐसा नहीं है, जैविक युद्ध की मन्शा रखने वाली कोरोना कंट्री चीन अब सारी दुनिया में बिना शोर बदनाम हो गया है. भारत ने चीन के इस वूहानी जैविक हथियार को गंभीरता से लिया है और मोदी इसे लेकर भावी तैयारियों में पहले ही व्यस्त हो चुके हैं ताकि तीसरी लहर, चौथी लहर, पांचवीं और दसवीं लहर जैसी अफवाहों से देश की रक्षा कर सकें और इसकी पूर्व व पूर्ण तैयारी सुनिश्चित कर सकें. चीनी ऐपों की तरह चीन भारत से बाहर होता जा रहा है और चीन से निकल कर कंपनियाँ भारत आ रही हैं. चीन की ये पीड़ा और परसंताप समझा जा सकता है. लेकिन चीन की नीयत और नीतियाँ इसको सारे देशों से बाहर करा के दम लेंगी एक दिन, ये तो तय है. भले ही इसके लिये एक लंबा वक्त लगे.

ब्लैक फंगस है जानलेवा

कोरोना का तीसरा वारिस है ब्लैक फंगस, जिसे लेकर कहा जा सकता है कि ये कोरोना के बाद ठीक हो गये लोगों को चैन से नहीं बैठने दे रहा है. ये फंगस जानलेवा सिद्ध हो रहा है खासकर उनके लिये जो कोरोना से या तो ग्रस्त हैं या कोरोना से पीड़ित होने के बाद अब स्वस्थ हो गये हैं अथवा स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं – इन सभी को ब्लैक फंगस अपना आसान शिकार मानता है. और इन पर उसका हमला भी इस कारण ही प्रबल हो जाता है जिस कारण से कोरोना वायरस का हमला. दूसरे शब्दों में कहें तो ब्लैक फंगस भी कमजोर इम्यूनिटी वालों पर हावी हो जाता है. इसी कारण किडनी या लीवर ट्रान्सप्लान्टेशन के रोगी, लंबे समय तक आईसीयू में रहे रोगी तथा ऐड्स, कैन्सर और डायबिटीज़ के रोगी ब्लैक फंगस की पहली पसंद हैं.

स्टेराइड का दंड है म्यूकर मायकोसिस

मूल रूप से ब्लैक फंगस एक फंगल संक्रमण है जो म्यूकर मायकोसिस नामक फंगाइल से जनमता है. ये शरीर के किसी भी हिस्से में उभर सकता है. वैसे इसकी वजह जितनी कोरोना वायरस का आना-जाना है उतनी ही स्टेरायड वाली दवाइयों का लेना भी है. कोरोना के इस मौसम में स्टेरायड वाली दवाइयों का अंधाधुन्ध इस्तेमाल हो रहा है और दुर्भाग्यपूर्ण बात ये भी है कि चिकित्सक भी जानते हैं कि स्टेराय़ड से रोग को नियंत्रित तो किया जा सकता है किन्तु रोगी को रोगमुक्त नहीं किया जा सकता. स्पष्ट है कि रोगमुक्त न  होने के कारण उसके दुष्प्रभाव भी सामने आयेंगे और उन्हीं दुष्प्रभावों अर्थात आफ्टरइफेक्ट्स में से एक है – ब्लैक फंगस.

हवा है एन्ट्री पॉइन्ट

ब्लैक फंगस बाकी हर तरह के फंगसों की भाँति हवा से होकर हमारी नाक के भीतर आता है और फिर शरीर में फैल जाता है. शरीर में कहीं कोई हिस्सा जल गया है या कहीं कोई घाव है तो फंगस वहां से होकर भी हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है. मूल रूप से ये गंदगी में, सड़ी गली चीजों में, सड़ी लकड़ियों या कंपोस्ड खाद में पाया जाता है.

ये है लक्षण

ब्लैक फंगस के लक्षणों में चेहरे पर सूजन आना, आँख में लालिमा आना, आँख सूजना, नाक बंद होना, बुखार, उल्टी, सीने में दर्द, मुह के ऊपरी भाग पर या नाक में काला घाव होना, मसूढ़ों में सूजन, दाँत ढीले पड़ने लगना, आदि.

आप खुद भी बचा सकते हैं अपनी जान

इसके उपचार के लिये एम्फोटरिसिन बी नामक दवा दी जा रही है. किन्तु उपचार स्वयं न करें –खुद दवा खरीद कर न खायें. डॉक्टर को दिखायें और उसके परामर्श से दवाई लें. वैसे योगासन, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा ही कोरोना तथा ब्लैक फंगस का मूल उपचार है जो पूरी तरह से इसे समाप्त करने का सामर्थ्य रखता है. सुबह पांच से सात आस्था टीवी देखें जहाँ पर योगगुरू स्वामी रामदेव जीवन की रक्षा का बहुमूल्य ज्ञान मुफ्त में दुनिया को बाँट रहे हैं.

ये है आयुर्विज्ञान

इसे आयुर्विज्ञान कहते हैं. ये ज्ञान आपकी और आपके परिवार की जीवन रक्षा कर सकता है और जीवन भर आपको दुनिया भर के रोगों से बचा सकता है. ब्लैक फंगस का उपचार भी वे बता रहे हैं. पैसा खर्च नहीं होगा – समय देना होगा – बाबा के साथ सुबह योगासन व प्राणायाम करें और मस्त रहें. कोई रोग आपको स्पर्श करने से पहले सौ बार सोचेगा.

व्हाइट फंगस भी आ धमका

अभी कुछ दिनों से एक और चिन्ता  का विषय सामने आया है. पता चला है कि ब्लैक के बाद अब व्हाइट फंगस भी. ब्लैक फंगस का ये छोटा भाई चिकित्सकों के नजरिये से और भी घातक है. अर्थात इस बात को ऐसे समझ लें कि कोरोना के दो बेटे हैं – ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस.  छोटा बेटा व्हाइट फंगस बड़े बेटे ब्लैक फंगस से ज्यादा बड़ा दानव है.

बाप से नहीं मिलती शक्ल

ये हमलावर जिसका नाम है व्हाइट फंगस पूरी तरह से अपने बाप पर गया है. इसकी शक्ल तो बाप से नहीं मिलती लेकिन इसकी हरकतें हूबहू कोरोना जैसी हैं अर्थात ये  COVID-19 की तरह करता है फेफड़ों पर हमला.

आक्रमण का स्थान हैं फेफड़े

जहां एक तरफ कोरोना के मरीजों में रिकवरी के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं दूसरी तरफ कोरोना के दो बेटों ने कुम्भकर्ण और मेघनाद की तरह तहलका मचाना शुरू कर दिया है. ब्लैक फंगस के बाद आये इस खतरनाक संक्रमण को विशेषज्ञ अधिक खतरनाक मानते हैं. अर्थात कोरोना और म्युकर माइकोसिस से भी ज्यादा जानलेवा है ये नया फंगल इन्फेक्शन जिसे व्हाइट फंगस के नाम से जाना गया है. रोगी के शरीर पर आक्रमण हेतु इसका भी प्रिय स्थान फेफड़े ही हैं.
व्हाइट फंगस से संक्रमित रोगियों में जो लक्षण पाए गए वे कोविड-19 जैसे थे, किन्तु जांच करने पर स्पष्ट हो गया की वे असल में कोरोना पॉजिटिव नहीं थे अपितु व्हाइट फंगस के संकमण का निशाना बने थे. इन पर कोरोना के तीनों टेस्ट रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और RT-PCR टेस्ट निगेटिव पाए गए.

अंतर कर पाना दुष्कर है

चिकित्सा वैज्ञानिक कहते हैं कि कोरोना और व्हाइट फंगस के रोगियों में अंतर कर पाना काफी दुष्कर है. वाइट फंगस से फेफड़ों के संक्रमण के सिम्टम्स HRCT टेस्ट (High-resolution computed tomography) करने पर यह संक्रमण कोरोना संक्रमण जैसा ही दिखता है. अब एक्सपर्ट्स को कहना पड़ा है कि जिस तरह कोविड-19 के गंभीर मामलों में अलग से स्कैन करने की जरूरत पड़ती है ठीक वैसे ही व्हाइट फंगल संक्रमण का पता लगाने के लिए HRCT स्कैन जैसा ही परीक्षण आवश्यक है.

इन लोगों को है सर्वाधिक खतरा

ब्लैक फंगस की भाँति  व्हाइट फंगस भी उन लोगों को ही अपना शिकार बनाता है जिनका इम्यून सिस्टम दुर्बल हो और जो पहले ही किसी न किसी रूप में अस्वस्थ हों अथवा रोगग्रस्त हों. वे लोग विशेषरूप से व्हाइट फंगस के आक्रमण का शिकार बन सकते हैं  जो लोग एंटीबायोटिक या फिर स्टेरॉयड दवाओं का प्रयोग करते हों. अब जहाँ तक रहा सवाल उपचार का डॉक्टर से परामर्श ले कर दवाई लें और साथ में योगासन प्राणायाम करें.

ये लो आ गया पीला फंगस भी

अब आ गया है चौथा शैतान भी. मतलब ये है कि कोरोना असुर के तीसरा दानव बेटा भी आ गया है सामने. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस के बाद पीला फंगस का मामला भी दिखाई दे गया है. कोरोना विशेषज्ञ इसे सबसे ज्यादा घातक बता रहे हैं. येलो फंगस के रोगी का उपचार कर रहे डॉक्टर बृजपाल त्यागी के अनुसार इस मरीज के अंदर तीनों लक्षण पाए गए हैं.

पीले में हैं तीनो फंगस

अपने पीले फंगस के रोगी को लेकर डॉक्टर त्यागी का कहना है कि उन्होंने अपनी केस स्टडी में ऐसे लक्षण का मरीज नहीं देखा है. इस मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही थी. दूरबीन के माध्यम से देखने पर उसके भीतर ये तीनो लक्षण उनको नजर आए. डॉक्टर त्यागी के अनुसार जो इंजेक्शन ब्लैक फंगस में इस्तेमाल होता है अर्थात एंफोटरइसिन बी इसमें भी कारगार है. डॉक्टर त्यागी कहते हैं कि यह पीला फंगस ज्यादा खतरनाक है, यह घाव को भरने नहीं देता है.
(पारिजात त्रिपाठी)

1 COMMENT

  1. बहुत सुंदर जानकारी विस्तारपूर्वक|बहुत ही अच्छा आलेख|कोरोना महामारी की पूरी डिटेल कम शब्दों में सुंदर तरीके से|गागर में सागर भरने जैसा|

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here