सावधान, बढ़ रहे हैं Delta Plus के मामले, तीसरी वेव की आशंका बढ़ी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि  ये डेल्टा प्लस वायरस पहले वाले की अपेक्षा अधिक बलशाली और खतरनाक है..

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जहाँ एक तरफ समूचा विश्व कोरोना नामक इस वैश्विक महामारी से राहत पाने की आस लगाये बैठा है, वहीं कोरोना-संकट के वैरिएंट रूपी असुर एक के बाद एक प्रकट हुए जा रहे हैं|
फिलहाल दृश्य ये है कि भारत में नये कोविड वैरिएंट के ताबड़तोड़ झटको ने  कोरोना वैक्सीन की सक्षमता पर प्रश्नचिन्ह जैसा लगा दिया है|
कोविड-19 के बाद इसकी दूसरी लहर अनगिनत वैरिएंट अपने साथ ला रही है| ब्लैक फंगस, व्हॉईट फंगस, येलो फंगस,  B.1.617 और अब डेल्टा प्लस संस्करण, जो कि अत्यधिक संक्रामक और घातक माना जा रहा है|
एक्सपर्ट्स का मानना है कि  ये डेल्टा प्लस वायरस पहले वाले की अपेक्षा अधिक बलशाली और खतरनाक है| यह पहली बार गत वर्ष अक्टूबर माह में देखा गया था| डॉक्टर्स के अनुसार अब तक इस वैरिएंट के 40 मामले आ चुके हैं|
डेल्टा प्लस वैरिएंट शोध टीम से प्राप्त जानकारी के अनुसार ये मानव शरीर की एंटीबॉडी को खत्म कर देता है| इतना ही नही ये वायरस फेफड़ों की कोशिकाओं को भी संक्रमित कर देता है| ऐसी भी शंका जताई जा रही है कि ये कोरोना वैक्सीन से शरीर में बनी एंटीबॉडी को भी नष्ट कर सकता है| इस पर अभी जो संशय बना हुआ है, उसे दूर करने के लिये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश पर आईसीएआर और नेशनल इन्स्टिट्यूट आफ वायरसोलॉजी द्वारा शोध की शुरूआत हो गई है|
डेल्टा प्लस पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के मत के अनुसार जिनोम सीवैक्सींग द्वारा इसकी पुष्टि तो कर ली गई है परन्तु ये और कितना घातक हो सकता है इस पर अभी शोध कार्य चल रहा है| डब्लूएचओ ने विश्व भर में कोविड-19 के फैल रहे वायरस के विभिन्न नाम रख दिये हैं, जो ग्रीक वर्णमाला पर आधारित हैं – अल्फा,बीटा,गामा और डेल्टा|
गौरतलब है कि अल्फा(यू के संस्करण),बीटा(दक्षिण अफ्रिका संस्करण), गामा (ब्राज़िलियन संस्करण) और डेल्टा भारतीय संस्करण हैं| डेल्टा प्लस इन तीनों से अधिक जानलेवा वायरस हो सकता है|
आईसीएमआर के चीफ एपिडरमोलॉजिस्ट डॉक्टर समीर पांडा का कहना है कि अभी डेल्टा प्लस पर शोध कार्य चल रहा है| जबकि आईसीएमआर विशेषज्ञों के अनुसार डेल्टा प्लस के मरीज़ों के पाये जाने का क्रम जारी है और अगले सप्ताह तक इस संक्रमण की जानकारी की पुष्टि हो सकती है| ये भी बताया कि इस संक्रमण के स्थानान्तरण की तीव्रता एक शरीर से दूसरे शरीर में कम ही देखने में आ रही है|
कोविड वायरस का स्वरूप जिस प्रकार से दिनोंदिन विकराल होता जा रहा है, तो डेल्टा प्लस के साथ-साथ लैम्बडा से भी सावधान रहने की आवश्यकता है|
नेशनल कोविड टॉस्क फोर्स की टीम ने ये बताया है कि लैम्बडा का प्रकोप मुख्य रूप से  दक्षिण अफ्रिका और पेरू में दिखाई दे रहा है| इस विनाशकारी वायरस संक्रमण की तीव्र गति  ने संसार के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी हैरत में डाल दिया है|
ये एक गंभीर मुद्दा और अत्यंत चिंता का विषय है| बहरहाल डेल्टा प्लस के साथ-साथ लैम्बडा जैसे वायरसों से रोकथाम और सावधानी बरतना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये| अब बैठ कर डरते रहने से कुछ नहीं होगा – जानकारी की तरह अब सावधानी की भी आवश्यकता है|
(अंजू डोकानिया)

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