Tokyo Olympics 2020: हॉकी के मैदान से बड़ी खबर – भारत की दोनों टीमें पहुंची सेमीफाइनल में

भारत की दोनो हॉकी टीमें फाइनल में पहुंची हैं और अगर न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल का अनुमान सही निकला तो हॉकी दिलायेगी दो और पदक - 1स्वर्ण, 1कांस्य

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दूसरे मीडिया वाले गलत कह रहे हैं कि 49 साल बाद हुआ है ऐसा, 41 साल बाद हुआ है क्योंकि 1980 में भारतीय हॉकी टीम ने जिताया था भारत को स्वर्णपदक ..सेमीफाइनल में पहुंचे बिना आप फाइनल नहीं खेल सकते !
ये एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि भारत ने 41 साल का इंतज़ार पूरा किया है. आज देश को भारत के सर्वोच्च हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद की याद आ गई जब हमारी टीम ने स्वतंत्रता मिलने से 11 साल पहले ही इसी माह 15 अगस्त के दिन ध्यानचंद की कप्तानी में हिटलर की मौजूदगी में हुए बर्लिन ओलिंपिक फाइनल में भारत ने जर्मनी को हराकर गोल्ड मैडल जीता था.

महिला हॉकी टीम ने दी मात ऑस्ट्रेलिया को

भारत की महिला हॉकी टीम की प्रशंसा करनी होगी जो तीन दिन पहले तक ग्रुप में सबसे नीचे से तीसरे स्थान पर थी. लेकिन उसके बाद ग्रुप में सर्वोच्च स्थान पर रहने वाली टीम को हरा देना ये बताता है कि भारतीय महिला हॉकी टीम स्वर्ण भी जीत सकती है. क्वार्टर फाइनल में टॉप टीम को हरा कर घर भेजने वाली महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल को इस कमाल का पूरा श्रेय जाता है.

पुरुष हॉकी टीम ने किया इंग्लैण्ड को बाहर

ये भी बिलकुल आसान नहीं था. ग्रुप स्टेज से लेकर अब तक हर मैच में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपना सर्वोत्तम दिया है और इसी पुरुषार्थ का परिणाम था कि क्वार्टर फाइनल के महत्वपूर्ण मुकाबले में भारत ने अंग्रेजों को टीम न केवल हराया बल्कि घर भी भेज दिया. 3 -1 से ये मैच जीती भारतीय टीम अब अब अगले मैच के लिए आत्मविश्वास से भरपूर है और सेमीफाइनल में उससे भिड़ने वाली विश्व की नंबर एक टीम बेल्जियम को भी आसानी बिलकुल नहीं होने वाली है.

छह बार लगातार जीता था हमने स्वर्ण पदक

सुनहरा है भारतीय हॉकी का इतिहास. पिछली बार भारत ने नौ ओलंपिक पूर्व 1980 में 29 जुलाई की तारीख पर मॉस्को के ओलंपिक खेलों में आखरी बार हॉकी का स्वर्ण पदक जीता था. एक दौर हुआ करता था जब भारत ही नहीं एशिया की परंपरागत हॉकी का दुनिया में डंका बजा करता था. हमारी टीम ने 1928 से 1956 के बीच ओलंपिक खेलों में लगातार 6 बार स्वर्ण पदक जीता था. और निस्संदेह यह भारतीय हॉकी का स्वर्णिम युग था. बाद में आ गया एस्ट्रो टर्फ यानी नकली सतह वाला मैदान जहाँ एशियाई शैली की कलात्मक और कौशलपूर्ण हॉकी का सूरज अस्त होने लगा और शारीरिक शक्ति के बल पर खेली जाने वाली तेज तर्रार हॉकी ने उसकी जगह ले ली.

 

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