अपनी अगली पीढ़ियों को बचाइये !!

यह एक अति विचारणीय लेख है जो आंखें खोल सकता है हमारी..कुछ क्षणों का समय निकाल कर एक बार इस लेख को अवशय पढ़ें और इसे साझा भी करें ताकि इसके लिखने की उद्देशय-पूर्ति संभव हो सके..

0
66
यह एक अति विचारणीय लेख है जो आंखें खोल सकता है हमारी

पश्चिमी दुनिया में फैमिली सिस्टम समाप्तप्राय ही है.

अब महान ऐतिहासिक हिन्दू परिवार परम्परा का भी पतन प्रारम्भ हो गया है.
इस्लाम का मज़बूत फैमिली सिस्टम उसकी विशेषता है जो उसे जिलाये रखने में सफल रहा है.
डेविड सेलबॉर्न पश्चिमी दुनिया का मशहूर लेखक है।
उन्होंने एक किताब लिखी है “The losing battle with islam”
इस किताब में उसने लिखा है कि पश्चिमी दुनिया इस्लाम से पराजित हो रही है।
उन्होंने इस पराजय के कई कारण गिनाए हैं,
जिसमें इस्लाम के मज़बूत फैमिली सिस्टम को एक महत्वपूर्ण कारण बताया है।
सच यही है कि पश्चिमी दुनिया मे फैमिली सिस्टम तबाह हो चुका है।
आज लोग शादी करना पसंद नहीं करते।
वैसे भी समलैंगिकता, अवैध संबंध, लिव इन रिलेशन जैसी कुरीतियों के आम होने से फैमिली सिस्टम टूटता जा रहा है।
हालत ये है कि प्रतिदिन ऐसे बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है जिन्हें मालूम नही होता कि उनके पिता कौन हैं।
दूसरी तरफ बूढ़े मां -बाप को घर में रखने को कोई तैयार नही है।
हमारे अपने बुजुर्ग जिनकी गोदी में हम पले हैं, आज ओल्ड ऐज होम में उनका बुढापा गुज़रता है।
पश्चिमी समाज में कुछ ऐसे समाजिक परिवर्तनों का शिकार हो चुका है जिससे पूरा पश्चिमी समाज तबाह होने के कगार पर पहुंच चुका है।

क्या सनातनी सभ्यता के साथ भी यही होने वाला है?

उनकी विवशता हो गई है कि अब राजनीतिक दल परिवार को बचाने का वादा अपने चुनाव घोषणा पत्र में करने लगे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में तो ‘फैमिली फर्स्ट’ नाम से एक पोलिटिकल पार्टी तक बना ली गयी है।
आज फैमिली सिस्टम को बचाना वेस्टर्न वर्ल्ड का सबसे बड़ा मुद्दा है,
क्योंकि वे जान गये हैं कि फैमिली नही बची तो समाज को भी देर सवेर ध्वस्त होते देर नहीं लगनी है।
इसी कारणवश डेविड सेलबॉर्न और बिल वार्नर जैसे लेखक यह कहने पर मजबूर हो जाते हैं कि इस्लाम के मज़बूत फैमिली सिस्टम की वजह से पश्चिम देर सवेर इस्लाम से पराजित हो जाएगा।
इधर भारत के भीतर भी हिन्दू परिवार परम्परा का पतन होना प्रारम्भ हो चुका है।
सनातनी देश में अब पांच रक्त संबन्ध समाप्त होने की कगार पर है। ताऊ, चाचा, बुआ, मामा, मौसी जैसे रिश्ते आने वाले समय में देखने सुनने को नहीं मिलने वाले हैं !
इसे इस तरह समझा जा सकता है-
पुत्र पुत्री बचे रिश्ते*
2 2 5
2 1 4 (मौसी X)
1 2 3 (चाचा, ताऊ X)
1 1 2 (चाचा, ताऊ, मौसी X)
1 0 X
0 1 X
परिणाम
0 0
जरा सोचिये, सिंगल चाइल्ड फैमिली को उनका निर्णय तीसरी पीढ़ी याने जिनके आप- दादा- दादी होंगे बुरी तरह प्रभावित करेगा।
औऱ फिर जिस दादा को मूल से अधिक ब्याज प्यारा होता है,
उसका मूलधन भी समाप्त हो जाएगा।
सीधी सी बात है कि इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है।
*इस कारण हिन्दू दम्पत्ति को सिंगल चाइल्ड के निर्णय पर गंभीरता से विचार करना होगा।
यह आपके देश में ही नहीं दुनिया भर में हिन्दुओं की घटती आबादी के आंकड़े बोल रहे हैं।
यह विश्लेषण सरकारी आँकड़ों के अध्ययन से आ रहा है।
ध्यान दीजिये, आपका पौत्र या प्रपौत्र इस संसार में अकेला खड़ा होगा।
जब उसे अपने रक्त के रिश्ते की आवश्यकता होगी तब इस पूरे ब्रह्मांड में उसका अपना कोई नहीं होगा।
आप मानें या न मानें, यह अत्यंत शोचनीय स्थिति है और विचारणीय विषय भी।
आने वाले समय में ये न केवल हमारे बच्चों को एकाकी जीवन जीने को मजबूर करेगा बल्कि हमारी हिंदू परिवार सभ्यता को ही नष्ट कर देगा।
जिस हिन्दू एकता की हम बात करते हैं जब उसकी सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी तो एकता क्या करेगी।
और इन सबके लिए हमारी वर्तमान पीढ़ी उत्तरदायी होगी।
सुनिये, यदि आपको लगता है कि यह विषय है तो इस पोस्ट को शेयर करें,
घर परिवार में, पति पत्नी के बीच, रिश्तेदारों में, दोस्तो में एवं विभिन्न बैठकों एवं आयोजनों में इस विषय पर मंत्रणा करे।
अपनी सभ्यता, संस्कार औऱ पीढ़ियों को बचाये।
(प्रस्तुति -पंडित अनिल वत्स)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here