Aura अर्थात आभामंडल क्या होता है

पूरी दुनिया उर्जा ही है जो नंगी आँखों से हमको नही दिखाई दे सकती, इसे देखने के लिये हमें अपनी इन्द्रियों की शक्ति को और बढ़ाना होगा..

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Aura शब्द का उपयोग हम अक्सर बोल-चाल की भाषा में करते हैं, पर क्या हम इसके बारे में कुछ जानते भी हैं? संसार में जितनी भी सजीव और निर्जीव वस्तुएँ हैं, उन सभी के चारों ओर Aura है|  जब हम अपने हाथों में मोबाईल पकड़ते हैं तो वो भी एक उर्जा है जो कि solid रूप में हमारे हाथों में होती है, याने कि पूरी दुनिया उर्जा ही है जो नंगी आँखों से आपको ऐसे नही दिखेगी | इसके लिये हमें अपनी इन्द्रियों की शक्ति को और बढ़ाना होगा|
हम सबका Aura होता है| हर इंसान का Aura sense करता है consciously नहीं बल्कि subconsciously याने आपका व्यक्तित्व का बाहरी आवरण जितना फीट लम्बा उतना पॉज़िटिव और हल्के सफेद रंग का और जितना कम और गहरा उतना निगेटिव| जिसका हमारे साथ-साथ हमारे संपर्क में आने वाले इंसान पर भी प्रभाव डालता है| कहने का तात्पर्य है कि कॉन्शस माइंड सब कॉन्शस माइंड को पढ़ता है, तब हमें सामने वाले की aura का आभास होता है|
Aura ऐसा हो कि आप जहाँ जाए अपने ब्लू प्रिंट्स छोड़ आयें कि आपके वहाँ से जाने के बाद भी लोग आपकी आभा से प्रभावित रहें| आभा का मतलब जैसे एक जलती हुई मोमबती के चारों ओर की आभा| बस वही Aura है| भगवान बुद्ध की हर छवि में उनके सर के पीछे एक श्वेत आभा चक्र दिखता है, वही Aura है| इसका कारण ये है कि जितने भी सच्चे साधु, संत होते हैं उनकी कॉन्शसनेस पॉवर बहुत दूर और ऊपर तक होती है| सकारात्मक सोच हमारे दिमाग़ को रिजुविनेट और ताज़ा कर देती है| हमें आगे के स्तर पर ले जाती है| इसमें मेडिटेशन की भी बड़ी अहम भूमिका होती है| पर ये वही लोग कर पाते हैं जो अपने दिमाग को अपनी सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक शक्ति से वश में रख सकते हों|
वैज्ञानिक स्तर पर ये साबित हो चुका है कि Aura को देखा जा सकता है| आपने रोबोट 2.0 फिल्म देखी होगी| जिसमें Kirlian Photography का प्रयोग दिखाया गया है| हालांकि फिल्म में ये काल्पनिक है| परन्तु kirlian photography असल दुनिया की फोटोग्राफी तकनीक है| इसमें लोगों की हाथों की aura को कैप्चर किया जा सकता है, तो हमें पूरी हथेली के चारों ओर एक रंगीन आभा दिखाई देगी वही aura है| Aura को किरलियन फोटोग्राफी द्वारा डिटेक्ट तो किया गया है पर आज तक इसे कोई ढ़ंग से समझ नही पाया है| इसके लिये सेंसेज़ को बढ़ाना अति आवश्यक है| परन्तु जब सोच सकारात्मक होगी तभी तो सेंसेज़ बढ़ेगी और तभी aura बढ़ेगी| तब हमारे और सब कॉन्शस माइंड के बीच की दूरी कम होती जाती है|
आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जैसी हमारी aura होगी हम भी वैसी ही aura वाले लोगों की ओर आकर्षित होते हैं| जैसे फिल्म स्टार की मित्रता फिल्म स्टार से ही होती है और एक आम आदमी की आम इंसान के साथ|
ये भी गौर करने वाली बात है कि सँसार में इतने लोग हैं मगर आपको कोई एक ही क्यूँ पसंद आता है? क्यूँ उस एक के प्रति ही आप आकर्षित हो जाते हैं? इसका उत्तर है Aura.
हमारी उर्जा जैसी होगी वैसा ही हमारा Aura होगा| जो sub sense उर्जा है वो मटेरियल चीजों से प्रभावित होती है मगर जो, उर्जा हममें पहले से है उसे मेनिफेस्ट नहीं कर सकते| उसे हम महसूस कर सकते हैं और उस प्रभाव को महसूस करता है इंसान|
एक वाकया सुनाना चाहूँगी दलाई लामा का एक प्रोग्राम था| वहाँ PIP Machine लगी हुई थी(Polycontrast Interference Photograpgy)इस मशीन से ये ज्ञात होता है कि आपका Aura कितना ज़्यादा या कम है| दलाई लामा के आने से पहले ही वहां एक श्वेत आभा इलकने लगी| कुछ देर बाद दलाई लामा का आगमन हुआ तो मालुम हुआ ये उनकी ही इतनी प्रभा़वशाली Aura थी जो उनके आने से पहले ही वहाँ पहुँच गयी|
ये होता है आभा का कमाल|  Aura सामने वाले को इन्फेक्ट करता है निगेटिव हो या पॉज़िटिव| हम सफेद कपड़े पहनते हैं तो कितने कॉन्शस होते हैं कि कहीं दाग़ न लग जाये| लेकिन जब गन्दी कुर्सी पर बैठ जाते हैं तो दाग़ लग ही जाता है|
ऐसे ही जब हम दुनिया में रहते हैं तो लोगों के अवगुणों को देखते हैं कि ये काला, गोरा, नाटा है| तो जज करने लगते हैं लोगों को| फिर उनकी उर्जा हमें प्रभावित करती है| हमें उन्हें ब्लेसिंग्स देनी चाहिये जितना हो सके| ये एक सुविचार है| क्रिएटिव और पॉज़िटिव तरीके से ब्लेस करना चाहिये ताकि उनसे पहले हमारा Aura अच्छा हो जाता है बाद में उनका भी| जैसे हंम किसी इंसान को दुआएँ देते हैं तो हमारा मन कितनी खुशी, कितने सुकुन से भर जाता है| हम अच्छा और हल्का महसूस करते हैं| ऐसे ही सामने वाले को भी आपकी दुआओं का असर मिलता है|
नकारात्मक उर्जा वाले भी आपसे प्रभावित होंगे और सकारात्मक उर्जा कभी नकारात्मकता के सामने होने पर छू नहीं सकती क्यूँकि आपका Aura बहुत हल्के रंग का और पॉवरफुल जो होता है|
हमारा शरीर ही ये विश्व है, पंचतत्वों से बना—जल, अग्नि, वायु, धरती और ब्रह्माण्ड| स्नान करने के बाद हमें कितना हल्का महसूस होता है वो सिर्फ इसलिये क्योंकि हम उस तत्व के संपर्क में थे| जिससे हमारा Aura प्रभावित होता है| अग्नि को पूजा की आरती के रूप में या सूर्य की रोशनी के सामने खड़े हों तो हममें नई उर्जा का संचार होता है| सुबह-सुबह ठण्डी घास पर नँगे पैर चलने से धरती हमारी सारी नकारात्मक उर्जा खींच लेती है और हममें नई उर्जा का संचार कर स्फूर्ति प्रदान करती है हमें| इसलिये ये आवश्यक है कि हम अच्छी उर्जा के सम्पर्क में रहें|
कभी-कभी हमारी ज़िन्दगी में ऐसे लोग आते हैं जिनका Aura बहुत ही गहरे रंग का होता है| उन्हें दूर से मिलने पर भी हमें ये महसूस होने लगता है| ऐसे लोग आपकी Aura को प्रभावित करते हैं| Heart, mind, soul इन तीन चीज़ों पर काम करने से नकारात्मकता दूर हटती है| आप अपने पैशन को फॉलो करते हैं यानि जिस कार्य में मन लगता है वो कार्य करें| परन्तु यदि ऐसा नही करते ऐसे लोग तो ये आवश्यक है कि हम उन्हें ब्लेसिंग्स दें और अपनी Aura का दायरा बरकरार रखें|
तो ये है Aura का कमाल|  क्यूँकि कुछ लोगोॉ का Aura इतना निगेटिविटी लिये हुए होता है कि आपके पॉज़िटिव उर्जा को ग्रहण नहीं कर पाता| तब ज़रूरी है कि उनके विचारों का सम्मान करते हुए अपनी उर्जा को अपने में समाहित रखें|
इसलिये अपनी Aura को पहचानने और उसे बढ़ाने के लिये कुछ चीजों पर कार्य करना आवश्यक है ताकि आप भी आम से खास बन पायें वे हैं कॉन्शसनेस बढ़ाना, सकारात्मक सोच, Heart-Mind-Body contrl, Meditation, Binaural Music बाईनॉरल म्यूज़िक कम से कम दस मिनट ज़रूर सुनें|
इस प्रकार धीरे-धीरे हम अपनी aura का दायरा बढ़ा सकते हैं जो कि संवेदना से अक्सर घटती-बढ़ती रहती हैै| सुख में बढ़ती है और जब हम दुखी होते हैं तो घटती है| ऐसा न हो इसके लिये ऊपर बताये हुए स्टेप्स फॉलो करने से हर परिस्थिति में स्थिरता बनी रहेगी|  ये है Aura का चमत्कार!!
(अंजू डोकानिया)

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