Cervical : सर्वाइकल है एक गंभीर बीमारी जो मांगती है समझदारी – पहले भी और बाद में भी

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समय के साथ नये-नये आविष्कार हुए जिससे हमारी Lifestyle तो आधुनिक हो गई है परन्तु साथ ही साथ जीवन में मानसिक तनाव व परेशानियों में वृद्धि हो गई है.
“सादा जीवन उच्च विचार” का स्लोगन अब आज के युग के साथ सामंजस्य नही बैठा पा रहा. जीवन को आरामदायक बनाने के लिये पर्याप्त धन कमाना भी आवश्यक है जिसके लिये हम दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह जुते रहते हैं. आज घर हो या आफिस, अस्पताल हो या शैक्षणिक संस्थान या हो बिज़नेस हर जगह कम्प्यूटराईज्ड सिस्टम है.
इस आधुनिक तकनीकी उपकरण के बगैर सारे कार्य ठप्प पड़ जाते हैं. लोग घंटों कम्प्यूटर के सामने बैठकर कार्य करते हैं जिससे गर्दन जो कि रीढ़ की हड्डी के सपोर्ट से टिकी है अकड़ जाती है, ऐंठन महसूस होती है. ऐसे में गर्दन में दर्द बने रहना स्वाभाविक है और तो और मोबाइल फोन भी हम गर्दन झुका कर लंबे समय तक चलाते रहते हैं.
अक्सर जब हम किसी कार्य में व्यस्त होते हैं तो कंधे और कानों क बीच मोबाइल दबाकर फोन पर बातें करते हैं. जिससे कंधों में दर्द की शिकायत और बाकी माँसपेशियों में खिंचाव और Pain बना रहता है. यह सब हड्डियों, डिस्क या जोड़ों में परिवर्तन के कारण होता हैं जो कि गर्दन से जुड़ेे हैं.
इसे नज़रअंदाज़ नही करना चाहिए. ये लक्षण सर्वाइकल के भी हो सकते हैं.जी हाँ आजकल सौ में से सत्तर प्रतिशत लोग इस समस्या से परेशान हैं.

सर्वाईकल के लक्षण

सर्वाइकल ऐसा दर्द है जो स्पोंडिलाइसिस या ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण होता है. गर्दन में दर्द, गर्दन का अकड़ जाना और हिलाने-डुलाने में दिक्कत और दर्द होना इसके मुख्य लक्षण हैं. हाथ और पैरों में सनसनी और झुनझुनी,कमज़ोरी. सिर के पिछले हिस्से और कंधों में दर्द होना, शरीर में असंतुलन और चलने में दिक्कत, मांसपेशियों में एंठन भी सर्वाइकल की वजह से हो सकता है. सर्वाइकल स्पाइन यानी गर्दन के हिस्से की रीढ़ की हड्डी के जोड़ों और डिस्क में प्रॉब्लम होने से सर्वाइकल पैन की दिक्कत पेश आती है.

उपचार से सावधानी बेहतर

लोग अक्सर हल्की-फुल्की हेल्थ-प्रॉब्लम में इतने सावधान और सतर्क नही रहते जब तक समस्या बड़ी न हो जाए. यदि लंबे समय तक आप एक ही प्रकार की स्वास्थ्य-समस्या से जूझ रहे हैं तो उसे हल्के में न लें. यह गंभीर स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है. इसलिय उपचार से सावधानी बेहतर है.

क्या सावधानियाँ बरतें

शुरुआती दौर में सर्वाइकल पेन को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिये यह आवश्यक है कि अपनी दिनचर्या में परिवर्तन किया जाए लेकिन यदि समस्या गंभीर हो तो ऑर्थोपेडिक सर्जन से जाँच कराना ही उचित है.

क्या टेस्ट करवाएँ

दर्द की गंभीर परिस्थिति में डॉक्टर के परामर्श से X-Ray,MRI, सिटी स्कैन आदि टेस्ट करवाने चाहिए ताकि इसकी समस्या की गंभीरता का खुलासा हो सके जिससे रिपोर्ट के आधार पर इलाज की प्रक्रिया आरंभ हो सके. इलाज के दौरान फिजियोथैरेपी विशेषज्ञ के instructions फॉलो करने चाहिए.

एक्यूप्रेशर भी है फायदेमंद

हाथ के अंगूठे की हड्डी को एक मिनट दबाए रखें फिर दूसरी अंगुली (अनामिका) की हड्डी को दबाएं. मध्यमा और अनामिका अंगुली के बीच में भी दबाना चाहिए  दूसरी अंगुली की हड्डी पैर के अंगूठे से दबाना चाहिए.

घरेलू नुस्खे भी अपनाएँ

सर्वाइकल में बर्फ से सिकाई की जाए तो आराम मिलता है. शरीर की माँसपेशियो और उचित रक्त-संचार के लिये व्यायाम करना चाहिए इससे इम्यून सिस्टम भी मज़बूत होता है और रोग से लड़ने और रोकने की कि क्षमता भी बढ़ेगी.

क्या करें, क्या न करें

सर्वाइकल की दर्दनाक गंभीर स्थिति से बचने के लिये सदैव उठने,बैठने, चलने के तरीके यानी अपना बॉडी पॉश्चर सही रखें. हमारे बैठने का तरीका ऐसा होना चाहिए कि गर्दन न अकड़. एक ही पोजीशन में लगातार न बैठे. मोबाइल फोन को कंधे और कानों के बीच फंसाकर सचलंबे समय तक वार्तालाप न करें और न ही अधिक गर्दन झुका कर न पढ़े और न टाइप करें. मोबाइल का कम से कम प्रयोग करें.
हड्डियों को स्वस्थ रखना जरूरी है. ऐसेआहार का सेवन करें जिसमें कैल्शियम और विटामिन डी का गुणता हो. तकिया या कुशन आरामदेह होना चाहिए और इसे सोने के समय सही तरीके से सर के नीचे लगाएं. रोज़ व्यायाम की रूटीन बरकरार रखें जिससे आप ऐसी स्थिति में पड़ने से स्वयं को और अपने मित्र,रिश्तेदारों को बचा सकते हैं.
यदि समय रहते सर्वाइकल की समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करता है साईटिका के रूप में.

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