New Special 26: एक और स्पेशल छब्बीस और इस बार कड़ी मेहनत ओझा जी की

निशुल्क शिक्षा का अधिकार और गरीब छात्रों हेतु ओझा जी का परोपकार एक इतिहास का सृजन करने जा रहा है, आप हैं न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के मानव रत्न !

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आईएएस बनने का ख्वाब बुनना फिर उसे पूरा करने के मध्य में एक कड़ी का जुड़ना बहुत आवश्यक है, वह है आधारभूत संसाधनों का होना।
आज शिक्षा के बाजारीकरण के दौर में सिविलसेवा की तैयारी कराने के नाम पर कोचिंग्स लाखों रुपये की फीस छात्रों से वसूलती हैं और वो सामान्य परिणाम देने में भी असफल रहती हैं।
ऐसे में एक अभावग्रस्त छात्र भला इतने रुपयों का प्रबंध कैसे कर सकेगा फिर उसे बड़े शहरों में रहने का खर्चे भी तो वहन करना है।
इस तरह के अभ्यर्थियों में प्रतिभा व उत्साह की कोई कमी नहीं रहती, बस आवश्यकता है उन्हें संबल प्रदान करने की और उचित मार्गदर्शन देने की, और यही कर रहे हैं मार्गदर्शन संस्थान के संस्थापक श्री वीरेन्द्र ओझा।
मूलतः प्रयागराज के रहने वाले श्री वीरेन्द्र ओझा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा- दीक्षा ग्रहण करते समय सिविलसेवा में जाने के विचार से दो बार इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने में सफलता प्राप्त की और वर्तमान में आयकर आयुक्त हैं ।
श्री वीरेन्द्र ओझा भारत के शीर्ष मैराथन रनर के रूप में भी जाने जाते हैं। दुनिया के अधिकांश मैराथनों में भाग ले चुके श्री ओझा बताते हैं कि एक बार लोनावला में नियमित दौड़ अभ्यास के समय उन्हें झुग्गियों में रहने वाले कुछ बच्चे रास्ते मिले। पीछे- पीछे उनकी गाड़ी चल रही थी बच्चों ने गाड़ी में बैठने की जिद की। ओझा जी ने बच्चों को समझाया कि इस गाड़ी पर चढ़ने के लिए पढ़ना पड़ता हैं।
बच्चों ने कहा कि हम पढ़ते तो हैं, आप हमें यह बताएं कि हमें क्या पढ़ना पड़ेगा। उनके उत्साह को देखकर श्री ओझा जी के मन में एक संकल्प उठा कि हमें एक ऐसा प्रयास करना चाहिए कि इस वर्ग के बच्चे भी इस परीक्षा को पास करके राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें।
अब प्रश्न यह उठा कि इस अभियान को प्रारम्भ कहाँ से किया जाए? एक विकल्प के रूप में प्रयागराज का नाम आया। इसका कारण बताते हुए श्री ओझा जी ने कहा कि इस धरती ने हमें जन्म, पद और गौरव प्रदान किया है , अब यह आवश्यक है कि हम भी इस शहर को इसका गौरव प्रदान करें।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की दिनोंदिन बिगड़ती हालात ने इस आवश्यकता को और बल प्रदान किया और इसको जमीन पर उतारने का एक खाका तैयार कर लिया।
इस अभियान की महत्वपूर्ण विशेषता यह रखी गयी कि हम इसको पूर्णतः निःशुल्क संचालित करेंगे और इसमें पढ़ाने वाले सभी व्यक्ति वही होंगे जो स्वयं इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर चुके होंगे। अगर किसी के पास प्रतिभा है परन्तु उसके पास संसाधनों का अभाव है, तो संस्थान की तरफ से उसको सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रयोग के तौर पर अप्रैल *2019 के अंत में एक सप्ताह में 50 घण्टे offline क्लासरूम का आयोजन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में किया गया जो बहुत ही सफल रहा। इसके बाद जुलाई- अगस्त माह *2019 में 15 दिन में 100 घण्टे की क्लास MNIT प्रयागराज भी अविश्वसनीय रूप से सफलता हासिल की।
इसकी सफलता को देखते हुए प्रयागराज में ही एक केंद्र बनाने की आवश्यकता महसूस हुई, और इसी आवश्यकता में स्टैनली रोड पर एक भव्य संस्थान का निर्माण किया ,जिसमें अभ्यर्थियों को के बहुत ही बेहतर वातावरण के साथ एक उच्चस्तरीय लाइब्रेरी भी निःशुल्क प्रदान की जाती है।
चूँकि इस संस्थान में सभी अध्यापक सिविलसेवा अधिकारी भी हैं, सो प्रतिदिन कक्षा में आना सम्भव कार्य नहीं। अतः अभ्यर्थियों को ऑनलाइन माध्यम से प्रतिदिन पढ़ाया जाने लगा।
इस अभियान का उद्देश्य मूल रूप से अभावग्रस्त बच्चों को सिविलसेवा में चयनित कराना ही नहीं अपितु उनका निर्माण इस तरह से करना है जिससे राष्ट्र बेहतर हाथों में सुरक्षित रहे।
पहले वर्ष इस अभियान में चौबीस सौ लड़कों ने रजिस्ट्रेशन किया था, जिनमें से संस्थान में प्रवेश के लिए केवल 21 लड़कों का ही चयन किया गया। इसका आधार नियमित अनुशासन और नियमित अंतराल पर होने वाले टेस्टों का प्रदर्शन होता है।
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी संस्थान में प्रवेश हेतु आवेदन की प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है। आप भी 7052275879 पर व्हाट्सएप करके अपने स्थान के लिए निवेदन कर सकते हैं।

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