Alert: जीवन में कभी न करें ऐसा, मजबूर हो जायें तो एक बार हमसे जरूर बात कर लें !

बस ये न करें आप, और अगर करें तो हमको एक बार बता जरूर दें, हमे बिलकुल पता है अच्छी तरह से कि हमारे पास आपकी समस्या का समाधान है..

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बस एक कदम गलत उठा राहे मुकाम में..मंज़िल तमाम उम्र हमें ढूंढती रही ! आत्महत्या सबसे अनुचित निर्णय है क्योंकि न केवल आप आत्महत्या करके अपने परिजनों की उपेक्षा कर रहे हैं, अपितु आप ईश्वर द्वारा दिए गए सबसे बड़े उपहार की भी उपेक्षा कर रहे हैं. ईश्वर का ये उपहार जिसे हम जीवन कहते हैं, एक सांप सीढ़ी का खेल है जिसमे लगातार ऊँच-नीच आती रहती है, लेकिन खेलने वाला खेल छोड़ कर अपनी जान नहीं दे देता है.

केवल नुकसान ही नुकसान है

एक ही फायदा है आत्महत्या करने में जो आपका स्वार्थी फायदा है और वो ये कि आप जीवन के खेल से बाहर हो जाते हैं -अब आप पर किसी का दबाव काम करने वाला नहीं है. आपने जबरदस्ती खेल से अपना हाथ खींच लिया है जो खेल के नियमों के विरुद्ध है. लेकिन इस फायदे के साथ जो नुकसान जुड़े हुए हैं वो अनगिनत हैं और यदि आप स्वार्थी नहीं हैं तो ये नुकसान आपको कहीं अधिक पीड़ा देने वाले हैं.

मुक्ति फिर भी नहीं है

एक सच ये भी है जिसे लोग नहीं जानते किन्तु ये सर्वथा सत्य है और तो और यह जीवन का एक महत्वपूर्ण धार्मिक-आध्यात्मिक सत्य है. यह सत्य ये है कि आप न अपनी इच्छा से जन्म ले सकते हैं, न ही अपनी इच्छा से मृत्यु का वरण कर सकते हैं. दोनों ही महत्वपूर्ण अधिकार नियति ने अर्थात काल ने अर्थात ईश्वर ने अपने हाथ में रखे हैं ताकि दुनिया में सब कुछ व्यवस्थित चले. परंतु जीवन के लिविंग रूम में ईश्वर ने एक छोटी खिड़की ज़रूर आपके सामने खोल रखी है जो खुद आपकी एक परीक्षा है. और यही है वो अनधिकृत मुक्ति का मार्ग जिसे हम आत्महत्या के नाम से जानते हैं. किन्तु ये जबरदस्ती की मुक्ति का मार्ग है क्योंकि मुक्ति तो इसके बाद भी नहीं है.

भागे हुए कैदी की सजा

जेल से भाग जाने पर कैदी जब दुबारा पकड़ में आता है तो उसकी पहले वाली सजा बढ़ा दी जाती है. जीवन भी इसी तरह से आपके कर्मों से बनी हुई जेल है जिससे अगर आप भागेंगे तो आप सजा से बच नहीं जाओगे बल्कि अपनी सजा बढ़ा लेंगे. और इस तरह आप अधिक कष्ट पाने का मार्ग चुन लेंगे. आत्मा रूप में जब आप ऊपर जाते हैं तो पता चलता है कि आत्महत्या करके आने वाली आत्माओं को कितनी तरह के कष्ट भोगने पड़ते हैं और अंत यहीं नहीं होता है – इसके बाद उस आत्मा को अधिक कष्ट का दंड मिलता है और दुबारा जन्म लेना पड़ता है. कहने का तात्पर्य ये है – मुक्ति नहीं हुई आपकी, कष्ट और बढ़ा लिया आपने !

हमारा क्या लाभ है

आपको आत्महत्या से रोकने में हमारा बहुत लाभ है और ये वही लाभ है जो किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी व्यक्ति की जान बचा लेने से होता है. हम इस वसुंधरा पर परस्पर मानव-भ्राता हैं और यह हमारा मानवीय कर्तव्य है कि यथासम्भव अपने भाइयों की सहायता हेतु तत्पर रहें – अतएव हमारा ये प्रयास हमारी उसी प्रेरणा का परिणाम है. और हाँ, ये अवश्य बताना चाहूँगा कि यह शुभ कार्य मैं संस्थागत स्तर पर नहीं कर रहा हूँ अपितु व्यक्तिगत स्तर पर कर रहा हूँ.

आपका क्या लाभ है

आपका लाभ बिलकुल वही है जो किसी भी ऐसे व्यक्ति का लाभ है जिसकी जान बच जाए. आपने सुना होगा – जान बची तो लाखों पाए! जान सबसे बड़ी नियामत है, जान सलामत है तो दुनिया सलामत है. जान गई तो दुनिया गई. इसका अर्थ है सबसे बड़ी दौलत है ज़िंदगी, इसको किसी पीड़ा के भाव बेच मत दीजिये. दुनिया की कोई भी पीड़ा इस बहु-मूल्यवान जीवन से बड़ी नहीं हो सकती -इसलिए, याद रखिये जीत आपकी तभी है जब आपके पास जीवन है. मृत्यु हार है और जीवन जीत है. जीवन है तो आशा है और आशा है मार्ग है.

नुकसान क्या है आपका

बहुत सारे नुकसान हैं. हम संक्षेप में बताना चाहेंगे कि आप एक कदम उठा कर ज़िन्दगी और जहान का शटर डाउन कर देते हैं हमेशा-हमेशा के लिए. और सबसे पहला नुकसान तब है जब आपको मरने के तुरंत बाद पता चलता है कि आपसे भारी भूल हो गई है. मुक्ति नहीं हुई कष्ट बढ़ गया है. दूसरा नुकसान ये है, जिसका आपको अवश्य ही पाप लगेगा चाहे आप पाप-पुण्य पर विश्वास करें या न करें – आपने अपने पीछे प्यार करने वालों को रुलाया है, भरपूर रुलाया है. उन्होंने आपके जाने के बाद आर्तनाद किया है और एक बार नहीं अब वे बार-बार रोयेंगे. और इसका पाप आपको ही लगना है.  हाँ, वो वक्त जरूर आएगा कि समय नाम का मरहम इस पीड़ा के घाव भर देगा और फिर आप बस एक याद बन के रह जाएंगे. आपके जाने के बाद कोई काम नहीं रुकेगा, और सच ये भी है कि दुनिया में किसी के भी जाने से कोई काम नहीं रुकता है.

अपना बोझा उन पर डाल दिया

आपने अपनी मुसीबत उठा कर अपने परिजनों के मत्थे मढ़ दी. आप तो निकल लिए, आपका कर्जा अब आपके परिवार के लोग भरेंगे. आप तो चले गए अब बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, मकान का किराया -ये सब कहाँ से आएगा? अब मजबूरन घर के लोग अपना काम छोड़ कर और पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर इस जिम्मेदारी को सम्हालने उतरेंगे. आपके जाने से घर का काम तो नहीं रुका लेकिन आपने अपने घर वालों का काम जरूर रोक दिया – इस तरह आपने उनका नुकसान किया, उनके भविष्य को दांव पर लगा दिया.

आप नहीं मिलोगे फिर उनको

आपकी पत्नी आपके बच्चे आपको फिर कभी ढूंढ कर वापस नहीं ला पाएंगे, क्योंकि आप उनको छोड़ कर ऐसी जगह चले गए हैं जहाँ से कभी वे आपको वापस नहीं ला सकते. यदि भाव और भावना को आप समझते होंगे तो इस पीड़ा का कष्ट कितना असीम है, आपको समझ में आ जायेगा. हो सकता है आपकी पत्नी को नया पति मिल जाए या आपके पति नई पत्नी ले आयें, किन्तु आपके बच्चों को अपनी मम्मी या अपने पापा दुबारा कभी नहीं मिल पाएंगे. उनकी पीड़ा का अनुमान लगाया है आपने?

हर चीज़ का इलाज है

आपकी हर समस्या का उपचार दुनिया में है. आपको नहीं मिल रहा है तो ये आपकी कमी है. पर सच यही है कि कोई भी समस्या कभी इतनी बड़ी नहीं हो सकती कि जीवन के द्वार बन्द कर दे. या इस बात को ऐसे कहें कि कोई भी समस्या जीवन से बड़ी नहीं हो सकती. आपको अपनी समस्या का समाधान नहीं पता तो हमको बताइये, हम आपको आपको उसका हल अवश्य देंगे – चाहे समस्या कोई भी हो, कैसी भी हो. अपनेआप को दुनिया का सबसे ज्ञानी या सबसे बुद्धिमान समझने की भूल न करें क्योंकि इसका दावा तो कोई भी नहीं कर सकता, पर हम ये दावा अवश्य कर सकते हैं कि आपकी वो समस्या, जिससे परेशान हो कर आप आत्महत्या करने की सोच रहे हैं – उसका उपचार हमारे पास अवश्य है!!

अपने बच्चों को पीटें नहीं 

न तो आप अपने बच्चों को पीटें न ही उनको इतनी कटु भाषा में ऐसा डाटें कि उन्की आत्मा दुखित हो जाये. कारण ये कि यदि आपने ऐसा किया और उन्होंने कोई गलत कदम उठा लिया तो आप जीवन भर अपनेआप को क्षमा नहीं कर पायेंगे और आपकी पत्नी या आपके पति जीवन भर आपको दोष देंगे. इसलिये मित्रवत ही पेश आयें अपने बच्चों के साथ, तानाशाह न बनें क्योंकि एक बार स्वयं को भी देख लें कि आप स्वयं कितने बड़े तीसमार खाँ थे.

 

संपर्क सूत्र : [email protected] or Ph. 8076316074 (it’s a Whatsap number too)

 

ज़रा समझिये एक सीधी सी बात

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