Poochta Hai Desh: क्यों खामोश हैं भारत के मुगलप्रेमी पाकिस्तान में सौ साल पुराने मन्दिर के तोड़ दिये जाने पर?

100 वर्ष पुराना हिन्दुओं का मंदिर तोडा गया पाकिस्तान में, फिर भी हिन्दुओं को अपनी जान की रक्षा के दंगाइयों का जुर्माना देना पड़ा – मुगलों को अपना आदर्श मानने वाले भारत के सेकुलर नेता खामोश रहे.
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा में 1919 में बनाया गया परमहंस जी महाराज का मंदिर दिसंबर, 2020 में पाकिस्तान के मौलवियों के द्वारा दंगाइयों से ध्वस्त करा दिया गया था.
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सभी दंगाइयों पर 3 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया था और सरकार को मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया था.

पाकिस्तान के चीफ जस्टिस गुलजार अहमद (जिन्होंने मंदिर निर्माण फिर से करने और जुर्माना लगाने के आर्डर दिए थे) ने नवनिर्मित मंदिर का उद्घाटन करते हुए कहा, पाकिस्तान में सभी धर्मों का आदर होता है.

चीफ जस्टिस की भावना का आदर होना चाहिए –हालाँकि हिन्दुओं के समान अधिकारों की बात करना तो एक छलावा है क्यूंकि पाकिस्तान में हिन्दू 1947 के 22% की जगह मात्र 2% बचे हैं.
सबसे बड़ी बात तो सामने आई कि मंदिर तोड़ने वाले मौलवियों ने हिन्दू समुदाय पर उन पर लगे जुर्माने की रकम अदा करने के लिए दबाब बनाया.
और पाकिस्तान की हिन्दू कौंसिल ने दंगाइयों पर लगा जुर्माना भर दिया –ऐसा प्रचार किया गया कि हिन्दुओं ने सामाजिक समरसता के लिए वो जुर्माना भरा.
मगर पाकिस्तान के ही कुछ लोगों ने कहा कि हिन्दुओं ने कट्टरपंथियों के खौफ की वजह से वो जुर्माना भरा –हिन्दुओं ने भविष्य में अपनी सुरक्षा के लिए दंगाइयों के पाप का दंड भुगता क्यूंकि रहना तो उन्हें उसी मुल्क में होगा.
इसके तहत जमायत उलेमी-ए- इस्लाम-फजल के जिला प्रमुख मौलाना मीर जकीम, मौलाना शरीफुल्ला और रहमत सलाम तथा आठ अन्य लोगों पर लगे जुर्माने की राशि (2,68000 रुपये प्रत्येक) अदा की गई ह.
हिन्दुओं के खिलाफ इस तांडव के खिलाफ हमारे देश के वो लोग नेता खामोश रहे जो आज मुगलों को अपना आदर्श बता रहे हैं – किसी सेकुलर नेता की कभी भी जुबान नहीं खुलती पाकिस्तान में हो रहे अल्पसंख्यकों पर हो रहे दमन के खिलाफ.
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने तो मंदिर निर्माण एक वर्ष से भी कम समय में करा दिया मगर हमारा इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तड़प उठा था जब योगी सरकार ने CAA के दंगाइयों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए जुर्माना लगा कर उनके फोटो हजरत गंज चौराहे पर लगा दिए थे.
आज सुप्रीम कोर्ट उस जुर्माने के खिलाफ सुनवाई के लिए भी तैयार हो गया है — क्या जुर्माना माफ़ कर दिया जाये ?
न्यूज़ चैनल्स को ये खबर प्राथमिकता से देनी चाहिए थी मगर वो भी चुप रहे.