परख की कलम से : Afghanistan में अमेरिका की हार हुई- ये कहना उचित नहीं!

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ये तस्वीर है मोहम्मद नजीबुद्दौला की है अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जिन्हें 1992 में तालिबान ने पकड़ लिया था, 4 साल इन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया और 1996 में कुछ इस तरह राष्ट्रपति भवन के बाहर लटका दिया गया।
यदि अब भी आपको लगता है कि अशरफ घनी ने भागकर कोई गलती की तो एक बार उनकी जगह खुद को रखकर देख लीजिए। अशरफ गनी को आगे की जिंदगी गुजारनी है जिसके लिये पैसे तो लगेंगे ही, ऐसे में यदि वो पैसा लेकर फरार हुए तो क्या गलत हुआ?
दूसरी बात अमेरिका की, आश्चर्य है कि लोग इसे अमेरिका की हार कह रहे है? यह सिर्फ एक बड़ी भूल है बाइडन की या शायद कोई चाल भी हो।
2019 में कतर में अमेरिका और तालिबान के बीच कुछ डील हुई थी जिसके बाद कतर से प्रतिबंध उठा दिये गए थे। कदाचित डील यही होगी कि तालिबान अमेरिका और उसके सहयोगी देशो विशेषकर ब्रिटेन और भारत के प्रति शांत रहेगा।
कुछ लोग अफवाह फैला रहे है कि तालिबान ने भारत के साथ व्यापार बंद कर दिया मगर ये लोग खबरे ठीक से पढ़े। तालिबान ने पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा सील कर दी है जिसकी वजह से ना तो पाकिस्तान से व्यापार होगा ना ही भारत से। आप चाहे तो ईरान के रास्ते अब भी व्यापार कर सकते है।
दूसरी बात अमेरिका जब 1 ऑक्टोबर 2001 को अफगानिस्तान में उतरा था तो मात्र 10 दिन में तालिबान हिंदुकुश पर्वत की गुफाओं में घुस गया था 20 साल तक ये वही पड़े रहे और फिर जहाँ जहाँ अमेरिका अपने अड्डे खाली करता गया वहाँ वहाँ ये लोग कब्जा करते गए।
जरा कोई बताएगा कि अमेरिका की पराजय कहाँ हुई???
एक छोटी सी भी ऐसी घटना नही है जहाँ अमेरिका के सैनिक पराजित हुए हो। बल्कि ऐसे बहुत से मौके आये जब मात्र 100 अमेरिकियों ने 500 तालिबानियों को रौंद दिया। इसलिए अमेरिका सुपरपॉवर नही रहा, अमेरिका हार गया ऐसी बाते सिर्फ गंदी राजनीति खेलने वाले ही कह सकते है।
बाइडन का ब्लंडर सिर्फ इतना है कि 30 अगस्त को अफगानिस्तान खाली करना था मगर 15 को करना पड़ा ये 15 दिन अमेरिकी इतिहास पर बहुत बड़ा कलंक लगाएंगे। ऊपर से अमेरिका के सैनिक हथियार अड्डो पर ही छोड़ आये और तालिबान मजबूत हो गया।
कुछ दिनों बाद आश्चर्य मत कीजिये यदि यही तालिबान अमेरिका के गुण गाने लग जाये क्योकि जो देश 76 वर्षो से विश्वगुरु और महाशक्ति बना बैठा हो वो ऐसी गलतियां आसानी से नही करेगा। अमेरिका की कुछ ना कुछ कूटनीति अवश्य रही होगी, हालांकि कम से कम इतना तो तय हुआ कि 2024 में ट्रम्प चाचा ही वापस लौटेंगे।

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