परख की कलम से: अक्सर छलकती हैं मुंबइया फिल्मों की अधजल गगरियाँ

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अधजल गगरी छलकत जाए, पिछले दिनों में दिलीप कुमार और राज कौशल की मौत हुई है।
दिलीप कुमार और सायरा बानो निःसंतान थे। मगर सायरा ने सबसे ऊपर इस्लाम को रखा और कब्रिस्तान नही गयी।
ठीक इसके विपरीत राज कौशल मरा तो उसकी पत्नी मंदिरा बेदी अपने बेटे के साथ श्मशान घाट गयी और खुद ने मुखाग्नि दी।
ये मैडम बताना चाहती थी कि देखो हम इतने स्मार्ट है धर्म का मजाक तो चुटकियों में मनाते है। जबकि हिन्दू धर्म मे महिलाएं पुत्र के रहते पति को अंत्येष्टि नही देती।
बहरहाल सायरा बानो अपने जमाने की सुपरस्टार है दिलीप कुमार के प्रति उनका प्रेम अद्वितीय और चर्चा का विषय रहा है। उन्हें किसी दिखावे की या पब्लिसिटी पाने की जरूरत नही है।
ठीक इसके विपरीत मंदिरा बेदी कोई बड़ी सुपरस्टार है नही, उसे जरूरत है कॉन्ट्रोवर्सी की ताकि प्रोजेक्ट मिल सके।
कुछ दिन पहले यामी गौतम की शादी हुई आप उनके शादी के फोटो देख लीजिये कोई दिखावा नही है पूरे रीति रिवाज और हिंदुत्व को सम्मान देकर विवाह रचाया गया।
प्रियंका चोपड़ा ने भी भले ही प्रो इस्लाम बयान दिये हो मगर अपनी शादी और नए घर के प्रवेश में हिन्दू धर्म की परंपराओं का ध्यान रखा है। कारण की यामी और प्रियंका दोनों ही विख्यात अभिनेत्री है इन्हें पब्लिसिटी के लिये मानसिक दिवालियापन नही चाहिए।
मंदिरा बेदी चाहती थी कि दक्षिणपंथी उसकी हरकत पर विरोध करे उसके नाम से ट्विटर ट्रेंड हो मगर ऐसा कुछ हुआ नही।
हिंदूवादी ये लड़ाई ट्विटर पर नही फेसबुक पर ही लड़े तो बेहतर है। लिस्ट बनाते चलिए, जेएनयू की दीपिका पादुकोण और शमशान की मंदिरा बेदी इनकी फिल्मो के रिव्यू पर हमला करना है।
जब भी इनकी फिल्में रिलीज हो आपके रिव्यू ट्रेंड हो जाने चाहिए रिव्यू किस तरह के देने है यदि ये भी बताना पड़े तो फिर रहने ही दीजिये।

(परख सक्सेना)