परख की कलम से: बंगाल विश्व की एकमात्र सभ्यता है जिसे खुद बंगालियों ने ही लूटा है

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बंगाल विश्व की एकमात्र सभ्यता है जिसे खुद बंगालियों ने ही लूटा है। आज महाराष्ट्र सबसे अमीर राज्य है तो उसका एक बहुत कारण बंगाल की बर्बादी भी है।
बात 1947 की है जब कोलकाता को एशिया का लंदन कहा जाता था। बिरला, टाटा, फिलिप्स, जेके ग्रुप जैसे ब्रांड किसी समय दिल्ली मुंबई नही बल्कि कोलकाता से चलते थे। 1977 में कांग्रेस की हार हुई और कम्युनिस्ट पार्टी का आगमन हुआ। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने और सिलसिला शुरू हुआ बंगाल के बर्बाद होने का।
बंगाली मजदूरो ने कम्युनिस्टों के बहकावे में आकर हड़तालें शुरू कर दी, आदित्य बिड़ला को कोलकाता की सड़क पर नंगा घूमने को मजबूर किया गया, मित्तल ग्रुप की कारो में धमाके किये। इन सबका फायदा उठाया महाराष्ट्र की सरकारों ने क्योकि उन दिनों मुंबई को कोलकाता की सिस्टर सिटी कहा जाता था।
महाराष्ट्र की सरकारों ने बंगाल की इंडस्ट्रीज को फ्री में बसाया। महाराष्ट्र में भी कम्युनिस्टों ने विरोध किया मगर कांग्रेस को झुका नही सके। मुंबई कोलकाता की सिस्टर सिटी थी इसलिए मुंबई देखते ही देखते पूंजीवाद से मुस्कुरा उठी। आज हालात यह है मुंबई के आगे कोलकाता की कोई हैसियत ही नही रह गयी।
आदित्य बिड़ला का जिस दिन अपमान हुआ था उस दिन के बाद उन्होंने फिर कभी बंगाल में पैर तक नही रखा। आज आईटी हब बैंगलोर है लेकिन ये ऑफर किसी समय कोलकाता को मिला था जिसे उनकी कम्युनिस्ट सरकार ने ठुकरा दिया था इसका लाभ कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने उठाया और आज हालात यह है कि बंगाल का नौजवान नौकरी की तलाश में बैंगलोर में भटक रहा है।
आज दिल्ली मुंबई भागे उद्योगपति बंगाल से इतनी नफरत करते है कि उन्हें नौकरी पर रखने में भी खतरा महसूस होता है। कहा जाता है कि दो बंगाली रख लिए तो यूनियनबाजी शुरू हो जाएगी और दो बिहारी रख लिये तो आपका रॉ मटेरियल चुराकर भाग जाएंगे।
भारत के एक चौथाई भिखारी बंगाल में है, बंगाल का व्यक्ति अपनी इस बर्बादी पर दुख नही मनाता बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास पर ही मंत्रमुग्ध होता रहता है क्योकि बंगाली अहंकारी होता है।
अब आपके मन मे प्रश्न उठेगा कि क्या बंगाल की तर्ज पर महाराष्ट्र भी बर्बाद हो सकता है? क्योकि जैसा आज महाराष्ट्र है ठीक वैसा कभी बंगाल था। तो इसका उत्तर है नही। महाराष्ट्र बर्बाद नही हो सकता क्योकि वहाँ की जनता सहिष्णु है, ऊपर से यहाँ राष्ट्रवाद की लहर है इसलिए कम्युनिस्टों का कोई आधार नही है।
महाराष्ट्र की बर्बादी इस पर निर्भर करेगी कि यहाँ व्यापारियों का गुजराती, मारवाड़ी में वर्गीकरण होता है या नही। यदि महाराष्ट्र के लोगो ने यह मानना शुरू कर दिया कि बाहर से आये व्यापारी उन्हें बर्बाद कर रहे है तो कदाचित महाराष्ट्र भी बंगाल की राह पर होगा मगर इसकी उम्मीदे ना के बराबर है। राज ठाकरे एक बार कोशिश कर चुका नतीजा पार्टी ही खत्म हो गयी।
बहरहाल बंगाल एक दास्तान है किसने सोचा था कि एशिया का लंदन कहा जाने वाला शहर भिखारियों का गढ़ बन जायेगा। जिस राज्य से स्वामी विवेकानंद जैसे योगी निकले है वहाँ कभी ज्योति बसु और ममता बनर्जी जैसे लोग भी राज करेंगे। 45 वर्षो से बंगाल वामपंथ की चपेट में है, मुक्ति का मार्ग बंगालियों के हाथ मे है देखना दिलचस्प होगा बीजेपी को चुनकर वे अपना भाग्य बदलते है या फिर किस्मत में जलील होना ही लिखा है।
(परख सक्सेना)