परख की कलम से: दुनिया का सबसे अच्छा तानाशाह – कमाल पाशा

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जहाँ आज टर्की है वहाँ 100 साल पहले ऑटोमन साम्राज्य हुआ करता था। एक बेहद कट्टर इस्लामिक राज्य, जिसने प्रथम विश्वयुद्ध के समय टर्की में रहने वाले लाखों ईसाई काट डाले।
मगर इस विश्वयुद्ध में ऑटोमन पराजित हुआ और उसकी अधिकांश जमीन ब्रिटेन और फ्रांस के कब्जे में आ गयी। मुसलमानो में इसका काफी विरोध था मगर ऑटोमन का ही एक सेनापति था मुस्तफा कमाल अतातुर्क जिसने बगावत कर दी और सुल्तान के विरोधियों का साथ दिया।
कमाल पाशा ने 1923 में ऑटोमन साम्राज्य का अंत कर दिया और टर्की का तानाशाह बना। तानाशाह बनने के साथ ही उसने सुल्तान को देश निकाला दिया, इसके बाद उसने मस्जिदों को तुड़वाया जो कि अरबी स्ट्रक्चर में बनी थी। कमाल पाशा ने टर्की को एक सेक्युलर देश घोषित किया तथा अरबी भाषा पर पाबंदी लगा दी।
यहाँ तक कि नमाज भी टर्किश में ही करनी थी, इसके बाद कमाल पाशा ने अरब जगत से टर्की को तोड़ दिया और पश्चिमी देशों से संबंध मजबूत किये। उसने अंग्रेजी पद्धति पर जोर दिया और मदरसों को बैन कर दिया।
कमाल पाशा ने मुस्लिम महिलाओं को गैर मुस्लिम से विवाह करने की आजादी दी और मुसलमानों को धर्मपरिवर्तन की भी छूट उसी ने दी।
कमाल पाशा ने घोषणा की यदि आने वाला कोई राष्ट्रपति टर्की को इस्लामिक बनाने का प्रयास करे तो सेना तख्तापलट कर सकती है। अब तक 4 बार टर्की में तख्तापलट हो चुका है।
वर्तमान राष्ट्रपति एरडोगन के समय सेना ने बगावत भी की थी मगर जन समर्थन के कारण कुछ कर नही सकी। वास्तव में कमाल पाशा के कारण ही आज टर्की इतना विकसित है, टर्की मुस्लिम बहुल होकर भी यूरोपीय देश जैसा दिखता है कारण सिर्फ वो अच्छा तानाशाह।
भारत को भी कही ना कही कमाल पाशा जैसे सैनिक जनरल और तानाशाह की ही आवश्यकता है।
(परख सक्सेना)

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