परख की कलम से : Pakistan को ले डूबेगी China की यारी

चीन पाकिस्तान में सुरक्षा के लिये सीपेक शहर बना रहा है।
इसमे सिर्फ चीनियों को रहने की आज़ादी होगी उनकी मुद्रा चलेगी और उन्ही की भाषा होगी। यहाँ शुरुआत हुई गुलाम बनाने की।
अंग्रेजो ने एक दिन में ही भारत को अधीन नही किया था, सबसे पहले उन्होंने 1602 में अकबर से कोलकाता का बंदरगाह मांगा जिसे अकबर ने एक सिरे से खारिज कर दिया पर जहाँगीर ने यह दे दिया। इसके बाद अंग्रेज 1707 तक चुपचाप बैठे रहे।
उसके बाद उन्होंने मुगलो के बीच की झड़प का फायदा उठाते हुए कोलकाता के आसपास भी कब्जा कर लिया।
मगर इस दौरान मराठे खड़े हो गए, मराठाओ ने पुर्तगालियों को पीटा तो अंग्रेज सतर्क हो गए और फिर व्यापार में लग गए मगर सन 1803 में जब उन्होंने मराठाओ की फुट देखी तब उन्होंने मराठाओ को हराकर पूरे भारत पर नियंत्रण कर लिया।
1602 का सपना 1818 में पूरा हुआ इतना समय इसलिए लगा क्योकि भारत में अलग-अलग शक्ति केन्द्र थे पाकिस्तान में तो ऐसा है नही। पाकिस्तान की सरकारों ने अपनी कमजोरी छिपाने के लिये पहले अमेरिका फिर सऊदी अब चीन की भीख लेनी शुरू कर दी मगर ये नही सोचा कि ये सब उनके देश को ले डूबेगा।
एक बार चीन पाकिस्तान कॉरिडोर बना तो चीन सीधे अरब सागर से जुड़ जाएगा। चीनियों को पाकिस्तान के बिल्कुल बीच मे टैक्स फ्री सड़क मिलेगी। चूंकि पाकिस्तान में आतंकवाद है तो चीन उससे निपटने के लिये अपनी सेना भी तैनात करेगा और जहाँ एक देश मे दो सेनाएं वहाँ टकराव पक्का है।
चीन ने ये जो निर्माण किया वो सिर्फ चीन के काम का है और पाकिस्तान को इसका ब्याज भरना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान, श्रीलंका और अफ्रीकी देशों से बड़े मूर्ख राष्ट्र आपको शायद ही कभी मिले।
जबकि चीन यही प्रस्ताव लेकर बांग्लादेश के पास भी गया था मगर बांग्लादेश ने भारत की वर्षो पुरानी दोस्ती को महत्व दिया और चीन को एंट्री नही दी।
हमे भी अपने सभी प्रधानमंत्रियों पर गर्व होना चाहिए, अच्छे और बुरे निर्णय सब ही ने लिये है मगर मोरारजी देसाई के अतिरिक्त किसी ने भी भारत की संप्रभुता पर खतरा नही आने दिया। ज्ञातव्य हो मोरारजी ने पाकिस्तान की परमाणु बम बनाने में अप्रत्यक्ष मदद की थी और रॉ के एजेंट्स मरवाये थे।\
बहरहाल भारतीयों के लिये भी कोई ख़ुशी की बात नही है क्योकि 50 वर्षो के अंदर चीन हमारे पड़ोस में होगा। मगर विश्व का इतिहास साक्षी है जो देश अपनी मर्यादा से अधिक महत्वाकांक्षी है उनका अंत भी वैसे ही होता है।
जिस तरह ब्रिटेन, जर्मन, रूसी और जापानी साम्राज्य काल के गाल में समा गए वही हाल चीन का भी होगा।

 

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