परख की कलम से: साहिबजादा जोरावर सिंह जैसी कहानी है रानी कैटेवाँ की

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जॉर्जिया देश का 16वी सदी में कुछ और नाम था, तीन तरफ से मुस्लिम देशों से घिरा हुआ था। भारत की तरह इसने भी आतंकवाद को झेला और यहाँ की रानी केटेवाँ ने वीरता से युद्ध किया मगर पराजित हुई और बंदी बना ली गयी।
उन्हें जंजीरो में जकड़कर ईरान ले जाया गया और उनसे ईसाई धर्म छोड़कर इस्लाम कबूलने को कहा जब केटेवॉ ने मना किया तो उन्हें इतनी भारी यातनाएं दी गयी जिसे सुनकर पत्थर दिल भी पसीज जाए।
हर अत्याचार से पहले उनसे पूछा जाता कि उन्हें इस्लाम कबूल है या नही उनके ना करते ही या तो उनका कोई अंग काट दिया जाता या फिर उनके किसी सैनिक की गर्दन काट दी जाती।
बाद में उन्हें खाना देना बंद कर दिया गया और अंततः उनकी मृत्यु हो गयी। रानी पद्मिनी के जौहर की तरह रानी केटेवाँ की मृत्यु भी मानवता पर प्रश्नचिन्ह थी। जॉर्जिया की रानी ईस्ट ऑर्थोडॉक्स ईसाई थी इसलिए बाद में जब जॉर्जिया में वेस्ट ऑर्थोडॉक्स ईसाई आये तो उन्होंने इसे बलिदान मानने से नकार दिया।
रानी के अनुयायी यहाँ-वहाँ भटकते रहे और वे जहाँ भी गए वहाँ उनके अवशेष भेंट किये। 1630 से ही उनके कुछ अवशेष गोवा के चर्च में रखे थे, 1962 में गोवा छोड़ते समय पुर्तगालियों ने इन्हें वापस मांगा मगर हमने इसे गोवा में ही रखे रहने दिया।
कई बार जॉर्जिया के लोग भारत सरकार से विनती करते थे कि रानी के अवशेष उन्हें दे दे मगर पुरानी कांग्रेस सरकारों की नीति रूस से दोस्ती निभाने को तत्पर थी जो कि जॉर्जिया का दुश्मन है।
जब 2015 से रूस पाकिस्तान की तरफ झुकने लगा तो जैसे को तैसा नीति के तहत हमारे विदेश मंत्री एस जयशंकर आज जॉर्जिया गए और रानी के अवशेष उनकी मातृभूमि को लौटा दिए।
स्वर्ग में बैठी जॉर्जिया की महारानी की आत्मा आज तृप्त हुई होगी। रानी केटेवाँ के अवशेष जब हमारे विदेश मंत्री ने लौटाए तो उनके स्वागत में पहुँचे वहाँ के विदेश मंत्री, अफसर और चर्च के अधिकारी किस तरह भावुक हो गए उसका लिंक मेरे टेलीग्राम चैनल पर है आप देख सकते है।
भीष्म पितामह ने कहा था धर्म अपने कर्तव्यों और दूसरों के अधिकारों के बीच संतुलन का नाम है। यदि ये बात तत्कालीन मुसलिम समुदाय ने मानी होती तो आज हालात ये न होते। रानी केटेवाँ की गाथा को जानने के बाद हर मानव को यह मंत्र मान लेना चाहिए।
इसी में विश्व का कल्याण है, बहरहाल मोदी सरकार की यह बहुत अच्छी पहल रही भारत ने जॉर्जिया के लोगो की जेब न सही, उनका दिल तो जीत ही लिया।
(परख सक्सेना)