Parakh ki kalam se: सिद्धिविनायक मन्दिर क्या है और दिखता क्या है?

मुंबई का प्रसिद्ध मंदिर है सिद्धिविनायक, आप एक बार इस मंदिर में अवश्य आयें, सिर्फ दर्शन करने नही बल्कि मंदिर के आसपास वातावरण देखने भी।
मंदिर के परिसर में ही 50 दुकाने आपको दिख जाएगी जहाँ मिठाइयों का भंडार है, इसके अलावा बप्पा के लिये वस्त्र, आभूषण की दुकाने अलग हैं। जूते उतारने के लिये शू स्टोर और उसका एक अलग स्टाफ। यदि कम से कम आंकड़े में भी देखा जाए तो वो मंदिर 2000 लोगो को रोजगार दे रहा है, जितना कि एक मल्टीनेशनल कंपनी का औसत स्टाफ होता है।
लेकिन हमें दिखता है सिर्फ बप्पा को चढ़ाया जाने वाला सोने का रथ, सोने का मुकुट। सिद्धिविनायक से भी बड़ा रोजगार केदारनाथ, गोरखपुर, रामेश्वरम मंदिरों में होता है। पुराणों में लिखा है कि बप्पा को मोदक पसंद है बहरहाल यह महज एक अंधविश्वास है मगर इसका होना आवश्यक है क्योकि आप बप्पा को मोदक चढा रहे हैं इसलिए इतने हलवाइयों की दुकान और उनके स्टाफ का घर चल रहा है।
ज्ञातव्य हो भगवान को हमारी नही हमे भगवान की जरूरत है ताकि बैलेंस बना रहे, मैं सिर्फ हिन्दू धर्म की बात नही कर रहा हु यदि आप वेटिकन सिटी को भी देखे तो वह भी इस धार्मिक इंडस्ट्री का अद्भुत नमूना है। अमेरिका में लोग क्रिसमस की शुरुआत 1 दिसम्बर से कर देते हैं, इस उत्सव में कई कृत्रिम पेड़, ईसा मसीह की मूर्तियां लगती है जो अल्टीमेट ढंग से रोजगार ही पैदा कर रही है।
मुसलमानो का मक्का मदीना भी इसी कड़ी का एक उदाहरण है, जब भारी संख्या में श्रद्धालु हज के लिये जाते है तो सोचकर देखिये वहाँ होटल का क्या रिवेन्यू होता होगा। सऊदी अरब की हॉस्पिटैलिटी इंड्रस्टी मक्का मदीना की वजह से ही जीवित है और ये कई लोगो को रोजगार दे रहे है। अयोध्या में एयरपोर्ट बन रहा है सिर्फ इसलिए कि लोगो की श्रद्धा है अब ये एयरपोर्ट कितनी नौकरियां देगा ये आप अंदाजा लगा सकते है।
इतिहास में झांके तो आपको अवध के क्षेत्र में कई मंदिर मिलेंगे जो मुगल काल मे बने हैं। इनमें से कुछ तो अवध के नवाबो ने बनवाये। अवध के नवाब सआदत अली खान तो खुद मंदिर में घण्टे बजाने पहुँच जाते थे क्योंकि उन्हें अर्थव्यवस्था पता थी, भगवान के कपड़े से लेकर खड़ाऊ तक हर व्यापार मुसलमानों के हाथ मे था और ये व्यापार इतना फूल रहा था कि मंदिरों की बदौलत मुगल सल्तनत सम्पन्न होती गयी।
गुजरात मे जब वापस हिन्दू शासकों का राज आया तो उन्होंने भी कई मस्जिदें नष्ट की लेकिन हज के रास्तों को नही रोका क्योकि जब यात्री हज को जाते है तो उन्हें गुजरात की कई दुकानों से खरीदारी करनी होती थी। मुद्दा यह है कि धर्मो की आंतरिक लड़ाई अपनी जगह है और ये चलती रहेगी मगर नास्तिकों को अपने षड्यंत्र में सफल होने से रोकिये।
धर्मस्थलों और धर्म को बोझ मत समझिए, गरीबों का पेट भरने के लिये भगवान खुद को बिकवा लेते है क्योंकि वे हमारे पालनहार हैं। बाकी गरीबी के नाम पर दूध मत चढ़ाओ -ऐसी बाते अनपढ़ और अदूरदर्शी लोगों के लिये छोड़ दीजिये।