PM Modi: हमारे प्रधानमंत्री को धारण करनी चाहिये अपनी पुरानी दाढ़ी

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पीएम मोदी के जितने चाहने वाले आज दुनिया में हैं उतने ही उनसे नफरत करने वाले भी हैं चाहे वे देश के भीतर हों या देश के बाहर. मोदी का विरोध उनके कामों को लेकर जितना है उससे कहीं ज्यादा उनकी सोच को लेकर है. अब मोदी के व्यक्तित्व में आये हुए परिवर्तन को लेकर बिलबिलाई जुबान से जलभुने शब्द कभी भी बाहर आ सकते हैं. और सबसे बड़ा परिवर्तन जो उनके मुखमंडल पर है वो है उनकी दाढ़ी.

दाढ़ी ने पहले भी जलाया था दिल

अब तो खामोश हो गए हैं मोदी को पानी पी पी कर कोसने वाले वरना शुरूआती दौर में यानी लगभग छह माह से एक वर्ष पूर्व तक यही मोदी की दाढ़ी थी जिस पर कभी दबी जुबान में और कभी बुदबुदा कर कभी स्पष्ट तौर पर तो कभी अस्पष्ट तौर पर कभी परोक्ष रूप में तो कभी अपरोक्ष रूप में – टिप्पणियां इन लोगों की सामने आई थीं. पर हाथी चलता रहता है जब वह श्वान टोली को भौंकता हुआ देखता, न अपना मार्ग परिवर्तित करता है न उनकी तरफ देखना भी आवश्यक समझता है. मोदी ने भी कभी ऐसी किसी टिप्पणी पर कोई टिप्पणी नहीं की.

आवश्यकता है दाढ़ी के जाने की

दुनिया भर में राजनीति का धंधा अपने प्रोफेशनल तरीकों को और बेहतर और कुशल बना रहा है. राजनीती के व्यवसाय में वेश भी महत्वपूर्ण है तो मुखमंडल की साजसज्जा भी. जो दिखता है वो तो बिकता ही है जो अच्छा दिखता है वो ज्यादा बिकता है. ऐसे में कोई यदि ये कहे कि उनकी बड़ी दाढ़ी दाढ़ी वाले लोगों को आकर्षित करेगी या वृद्ध लोग उनसे अधिक प्रभावित होंगे और पार्टी को वोट देने लाइन लगाएंगे – तो ये विचार बुद्धिमानी का नहीं है.

चले गए बंगाल चुनाव

मान लेते हैं कि बंगाल चुनावों को दृष्टि में रख कर मोदी के परामर्शदातों ने उन्हें यह रूप धारण करने का आग्रह किया हो किन्तु अब समय आ गया है कि देश को उनके मोदी फिर वापस मिलें वही मोदी जो 2014 के चुनावों में देश को मिले थे और फिर 2019 में फिर देश को मिले हैं. राजनीति की मांग यदि वेशभूषा के विशेष रूप या मुखमंडल की विशेष सज्जा की अपेक्षा रखती है तो व्यक्तित्व के हर गुण की ग्राहक भी होती है.

मोदी तो मोदी हैं

मोदी एक नाम नहीं एक सोच है. मोदी एक व्यक्ति नहीं हैं – वे अपनेआप में पूरी एक संस्था हैं. राष्ट्रप्रेम, धर्मप्रेम, बौद्धिकता, ज्ञान, बुद्धि-चातुर्य और दूरदर्शिता ही नहीं बल्कि एक सेनापति के रूप को भी मोदी ने अपने व्यावहारिक व्यक्तित्व में प्रदर्शित किया है. और ये भी सत्य है कि वैश्विक मंच पर मोदी जैसा कोई नहीं. विश्व के सभी सर्वोच्च नेता भारत के मोदी का सम्मान करते हैं. मोदी ने देश को सार्थक नेतृत्व दिया है तो वैश्विक प्रतिष्ठा भी अर्जित कराई है.

पुरानी दाढ़ी है अधिक सुंदर

मोदी की पुरानी दाढ़ी जो बहुत विकसित हो कर उनके चेहरे पर छा नहीं जाती है, अधिक आकर्षक लगती है. मोदी के सौम्य व्यक्तित्व से वही दाढ़ी मेल खाती है और भारत के मोदी अधिक युवा लगते हैं जो कि वे हैं भारत के वास्तविक सच्चे चिर-युवा प्रधानमंत्री!

 

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