पूछता है देश : किसने शुरू की थी ये आयाराम-गयाराम की परंपरा

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लाश तो शमशान जाती है सिब्बल जी, राजनीति में आना जाना लगा रहता है, G-23 को कहीं “प्रसाद” नहीं मिल रहा, पर मजबूर हैं “त्रिमूर्ति” की सेवा में.
G-23 के धुरंधरों में एक, कपिल सिब्बल जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने पर तंज कर कह रहे हैं कि भला “प्रसाद की राजनीति के अलावा इस कदम का क्या ठोस आधार हो सकता है और हम ये देश भर में होता देख रहे हैं.
सिब्बल आगे कहते हैं कि अगर जीवन के किसी मोड़ पर कांग्रेस ने उन्हें पूरी तरह नकारा कह दिया तो वो भी पार्टी छोड़ने पर विचार कर सकते हैं मगर भाजपा में नहीं जायेंगे, ऐसा उनकी “लाश” पर हो सकता है.
सिब्बल जी, ये “प्रसाद की राजनीति” का ये दौर किसने शुरू किया था? भजन लाल और वाघेला हवाई जहाज भर कर विधायकों को ले उड़ते थे, कुछ तो याद होगा –लेकिन दिखाई आपको बस दिखाई अब दे रहा है, जबकि वैसा नहीं हो हो रहा है.
कांग्रेस में काम करने वालों को ही जब “प्रसाद” की जगह पीडी के कुतरे हुए बिस्कुट मिलते हैं, तो किसी को भी घुटन होगी –हर किसी को “त्रिमूर्ति” का गुलाम बना कर रखना पार्टी की नियति बन चुकी है.
आप G-23 के नेता भी इसीलिए उठे क्यूंकि आपको भी अब पार्टी में कोई “प्रसाद” नहीं मिल रहा –लेकिन पार्टी के इतने पुराने सेवक हो, हर किसी ने कहीं न कहीं कोई न कोई गलत काम किया होगा और जैसा कि  कांग्रेस में सदा ही होता है, सभी की “गोरी काली लाल पीली फाइलें” आलाकमान के पास होती हैं, और मजबूरन सभी चुप लगाये पड़े रहते हैं.
सिब्बल जी, राजनीति में आना जाना लगा रहता है, 4 साल पहले मुकुल राय भाजपा में आये, इसी आशा में कि सत्ता में आने पर “प्रसाद” मिल जायेगा मगर जब भाजपा सत्ता में नहीं आई तो आज वापस TMC में चले गए.
और आप ये कह कर क्या कहना चाहते हैं कि आप भाजपा में कभी नहीं जायेंगे –आपकी पार्टी ने सदा भाजपा को एक “अछूत” पार्टी समझा मगर फिर भी आपके बहुत लोग भाजपा में आये हैं और खुश भी हैं.
आप तो भाजपा में आने के लिए ऐसे मना कर रहे हो जैसे भाजपा आपने बिना बेचैन है –आप और आपकी पार्टी भगवान राम के अस्तित्व को नकारने वाली आज इस मुकाम पर पहुँच गई मगर फिर भी “अहंकार” कायम है.
आपकी पार्टी के नेता निकृष्ट भाषा बोलने में सबसे आगे हैं चाहे वो नरेंद्र मोदी के लिए हो या भाजपा के किसी और नेता के लिए.
हाल ही में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने संबित पात्रा को कहा – “2 कौड़ी का आदमी गंदी नाली का कीड़ा” –एक सुष्मिता देव योगी को अजय सिंह बिष्ट कहती हैं लेकिन संबित पात्रा ने जब सोनिया जी को “अंटोनियों माइनो” कहा तो बिखर गई.
क्या संस्कार हैं आपकी पार्टी में नेताओं की और इसी वजह से अब कांग्रेस “वृद्धाश्रम” में भेजने लायक बुजुर्ग पार्टी हो गई है -नेता सब निकल लें, जहां चाहें.
आपने कहा आप भाजपा में कभी नहीं जायेंगे –ये काम आपकी लाश पर हो सकता है –मगर सिब्बल जी, लाश भाजपा में नहीं आ सकती, लाश तो शमशान या कब्रिस्तान ही जा सकती है –शुभकामनायें!
(सुभाष चन्द्र)

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