पूछता है देश: राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है, क्या ये बात सबको नहीं समझनी चाहिये?

राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों में, अदालतों को दखल देने से बचना चाहिये – पर्यावरण से भी अधिक महत्वपूर्ण और आवश्यक है देश की सुरक्षा – “Citizens for Green Doon” की जांच हो.
एक बार नहीं कई बार हुआ है, जब अदालतें राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर पंचायत करती हैं और सेना के काम और दिक्कतों को समझे बिना दखल देती हैं.
याद कीजिये सेना अपनी जान पर खेल कर कश्मीर में उस पर पत्थरबाजी करने वालों पर जब पेलट गन चलाती थी तो सुप्रीम कोर्ट ने उस पर मानवाधिकारों ध्यान में रख कर रोक लगा दी थी –एक बार सेना के साथ खड़े हो कर पत्थर खा कर देखना चाहिये न्यायपालिका के प्रतिनिधियों को.
चार धाम यात्रा की सड़क को चौड़ा करने के लिए NGT ने अनुमति दे दी थी मगर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आर ऍफ़ नरीमन और नविन सिन्हा की बेंच ने 9 सितम्बर, 2020 को उस पर रोक लगा कर सड़क की चौड़ाई 5.5 मीटर रखने के आदेश दे दिए.
सरकार को 55 साल चीन के खतरे से बचने के सड़के बनाने के लिए नहीं कहा अदालत ने और आज सड़क चौड़ाई भी
तय कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट की खुद की बनाई गई समिति के 26 में से 21 सदस्यों ने चौड़ाई 10 मीटर करने की सिफारिश की मगर नरीमन नहीं माने.
नरीमन के निर्णय प्रायः देश के बहुसंख्यक समुदाय के हित पर आघात करते हैं अतएव जनता को यह संदेश जा रहा है कि चार धाम यात्रा हिन्दुओं की होने की वजह से उसे रोकने की मंशा थी.
सरकार की अर्जी पर कल कोर्ट की जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, सूर्यकांत और विक्रम नाथ ने फैसला सुरक्षित कर लिया पर बेंच से अनुरोध है चीन के खतरे को देखते हुए सरकार को पूरा अधिकार दें कि देश की सुरक्षा कैसे करनी है —
जस्टिस नरीमन ने 2018 के परिवहन मंत्रालय के आदेश को आधार बना कर चौड़ाई तय की थी –अब 3 साल में चीन ने कैसा खतरा पैदा किया होगा, उसका जिम्मेदार कौन होगा, इसका कौन जवाब देगा.
उपरोक्त NGO ने ये अपील दायर की थी और अपने वकील कोलिन गोंसाल्वेस और मोहम्मद आफताब के जरिये दलील दी कि युद्ध में सेना हवाई मार्ग के काम चलाये.
यानि सेना टैंको और सभी उपकरण हवाई मार्ग से ले जा कर युद्ध करे जो सोचना भी मूर्खता है –क्या ये नहीं हो सकता कि ये संस्था चीन से मिल कर देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए षड़यंत्र कर रही हो.
विदेशी ताकतें NGOs को पैसा दे कर विकास के प्रोजेक्ट लटकाती रही हैं –40% प्रोजेक्ट पर्यावरण के कारण लटके हैं –मोदी सरकार ने इसीलिए सैंकड़ो NGOs पर ताला लगा दिया.
इस NGO की भी जांच होनी चाहिए कि इनके पास कहां से पैसा आता है जो लाखों रुपये की फीस वकीलों को दे रहे हैं.