पूछता है देश : अफगान मामले पर मोदी का विरोध क्यों किये डाल रहे हैं लोग?

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मोदी को नोबल प्राइज चाहिए – ऐसा विलाप करने वाले उन लोगों पर बरसें जो तालिबान के साथ हैं – मोदी सीरिया का एक भी रिफ्यूजी नहीं लाये–ये याद रखिये.
बड़ा अजीब प्रचार शुरू किया गया है जिसमें कुछ लोग आंख बंद करके बरस रहे हैं मोदी पर कि वो नोबल प्राइज के लिए अफगानी मुसलमानों को ना लाये -हमारे टैक्स से रोहिंग्या और बांग्लादेशी पल रहे हैं, अब अफगानी नहीं चाहियें.
ऐसा प्रचार करने वालों को सोचना चाहिए कि क्या बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुसलमानों को मोदी ले कर आये थे? -मोदी सरकार तो उन्हें निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ी है –मोदी सरकार ने तो कोर्ट में यू एन का रिफ्यूजी प्रोग्राम भी मानने से मना कर दिया –
और जो बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को दिल्ली में पाल रहा है, उसे तो दिल्ली वाले वोट दे कर अपने सिर पर बिठा लेते हैं फ्री पानी बिजली के लिए.
ये नहीं भूलना चाहिए कि मोदी एक भी सीरिया का रिफ्यूजी ले कर नहीं आये जबकि वही लोग अधिकांश यूरोप के देशों में गए और उन्हें बर्बाद कर रहे हैं.
मोदी के लिए नोबल प्राइज की क्या कोई वैल्यू है जब उनको अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान मिल चुके हैं -और सबसे बड़ा सम्मान तो आबू धाबी में बन रहा स्वामी नारायण मंदिर है.
इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है, जिसके सामने नोबल प्राइज तो फीका है कि –एक इस्लामिक देश में हिन्दू मंदिर बन रहा है –क्या बात है – इसके पीछे मोदी नहीं तो कौन है?
अफगानिस्तान में वर्षों से भारत का निवेश हो रहा है, हो सकता है इसके नाते कुछ लोगों की सहायता करनी पड़े मगर इसका मतलब ये नहीं है कि मोदी पूरे अफगानिस्तान को ला कर बिठा देगा देश में.
अफगानिस्तान का संकट कोरोना के संकट के साथ खड़ा हो गया और यदि ऐसे में लोग मोदी की ही ऐसी तैसी करने निकल पड़ें, तो ये उचित नहीं है –सब विदेश नीति के एक्सपर्ट न बने, सरकार पर भरोसा रखें.
निंदा उन लोगों की कीजिये जो आज तालिबान का समर्थन करने निकल पड़े हैं भारत में — पहले समाजवादी नेता शफीकुर ने कहा और उसके बाद आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बॉर्ड का सज्जाद नोमानी का बयान आया.
आज ही बॉलीवुड की तृतीय दर्जे की अभिनेत्री स्वरा भास्कर तालिबान आतंक के साथ हिन्दू आतंक की बात कर रही है -सच ये है कि लुटियन मीडिया और सेकुलर नेता कुछ बोल नहीं पा रहे तालिबान के खिलाफ.
विरोध इन लोगों का करना चाहिए न कि अपने ही नेता मोदी का -कोई मौका मत छोड़िये वामपंथी मीडिया की निंदा करने का.
लुटियन दलाल और सेकुलर नेता ताक में बैठे हैं कैसे अफगानिस्तान को ले कर मोदी को घेरा जाये.आप उन्हें मौका मत दीजिये -हो सकता है मोदी के नोबल प्राइज का शगूफ भी उन्होंने छोड़ा हो आप लोगों में भ्रम पैदा करने के लिए -सावधान रहिये!