पूछता है देश : अमेरिका के ईर्ष्यालु मीडिया का क्या करें !

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दुनिया के लोग मरे कोरोना से,  इसलिए भारत के भी मरे होंगे, फ्रॉड अमेरिकी मीडिया.
अमेरिकी मीडिया के हवाले से एक रिपोर्ट आई है जिसमे कहा है कि भारत में 50 लाख लोग कोरोना से मरे होंगे.
अमेरिकी मीडिया में चीन पैसा खिला कर घुसा हुआ है और जो मर्जी रिपोर्ट निकलवा रहा है, ये पैसा खिलाने की बात चीन ने खुद स्वीकार की है.
जितना भारत के मीडिया ने मोदी के खिलाफ कोरोना को ले कर  प्रचार किया, वो अमेरिकी मीडिया भी कर रहा है –अमेरिका समेत कई देशों में मोदी को बदनाम करने का अभियान चल रहा है.
अमेरिकी मीडिया में अवधारणा इसी बात से बनी लगती है कि जब हम जैसे संपन्न देशों में लोग मरे हैं तो भारत तो पिछड़ा देश है, वहां तो लोगों के बचने का सवाल ही नहीं पैदा होता.

ये हैं अमेरिक के आंकड़े

33 करोड़ आबादी – 3 करोड़ 41 लाख संक्रमित – 6 लाख की मृत्यु हुई;

ये हैं ब्राजीत के आंकड़े

21 करोड़ आबादी – 1 करोड़ 94 लाख संक्रमित – 5.44 लाख की मौत हुई

ये हैं इटली के आंकड़े

6 करोड़ आबादी – 43 लाख को कोरोना हुआ – 1.27 लाख मौतें हुईं

ये हैं भारत के आंकड़े

भारत की 135 करोड़ आबादी में 3 करोड़ 12 लाख संक्रमित हुए और 4 लाख 18 हज़ार मौत हुईं.
इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश जैसे 22 करोड़ की आबादी वाले राज्य में 17 लाख संक्रमित हुए और मौत 22 हज़ार 737.
अमेरिका और अन्य देशों की मौतों के आंकड़े भी फिर कम क्यों ना बताये जाएं.
अमेरिकी मीडिया में इतनी हिम्मत नहीं है कि ऐसा अंदाजा मरने वालों का चीन या उत्तर कोरिया के लिए लगा सके.
अमेरिकी मीडिया के चीनी दलालों को चिंता बस ये है कि अमेरिका, इटली जैसे मेडिकल सुविधाओं से संपन्न देशों में लोग मरे तो भारत में क्यों नहीं मरे.
अभी हाल ही में भारतीय मीडिया के 82% पत्रकारों ने कहा है कि पश्चिमी मीडिया ने कोरोना को ले कर भारत के लिए गलत रिपोर्टिंग की है.
वैसे हमारे मीडिया ने वैक्सीन के खिलाफ दुष्प्रचार करने में कोई कमी नहीं की और आज राहुल गाँधी ने अमेरिकी मीडिया की ये रिपोर्ट उठा कर गले लगा कर ट्वीट कर दी.
जिस तरह विपक्ष वैक्सीन के खिलाफ भारत में लोगों को भड़का रहा है,वैसा ही काम अमेरिकी राजनेता भी कर रहे हैं.
अमेरिकी मीडिया का नजरिया भी कमाल का है कि दुनियां के 650 करोड़ लोगों में 37 लाख लोगों के मरने का मतलब है, 135 करोड़  भारतीयों में 50 लाख मरे होंगे.
अनपढ़ जाहिल लोग भरे हैं अमेरिकी मीडिया में.

 

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