पूछता है देश : चीन के Uighur मुसलमानों के लिए इतना दर्द क्यों?

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उइघर मुसलमानों के लिए इतना दर्द क्यों? पाकिस्तान तो चुप है -भारत के मुस्लिम भी चुप हैं.
आज रिपब्लिक भारत पर एक चर्चा में मेजर गौरव आर्या चीन के उइघर मुसलमानों पर पाकिस्तान की चुप्पी को ले कर पाकिस्तान के लोगों पर बरस रहे थे.
मेजर आर्या पूरी सही कह रहे थे कि इस्लाम का ठेकेदार बनने वाला पाकिस्तान फिलीस्तीनों की चिंता करता है मगर उइघर मुसलमानों पर मौन ही रहता है.
सच तो ये हैं कि 56 इस्लामिक देशों में कोई भी देश उइघर मुसलमानों के लिए नहीं बोलता जबकि ईरान, तुर्की, पाकिस्तान की तरह इस्लाम का झंडा उठा कर खलीफा बने फिरते हैं.
इजराइल के स्थाई शत्रु “हमास” और फिलीस्तीन भी अपना रोना रोते हैं मगर उइघर कौम के लिए कुछ नहीं कहते.
इसका मतलब साफ़ निकलता है कि इस्लामिक देश अपना स्वार्थ पहले देखते हैं कौम का नहीं –फ्रांस पर
सबसे पहले आग उगलने वाले तुर्की और पाकिस्तान चीन के सामने चुप हो जाते हैं.
इजराइल और फ्रांस के खिलाफ इस्लाम पर पाबंदी लगाने पर जहर उगलेंगे मगर चीन को ये इस्लामिक मुल्क सब कुछ करने देंगे.
मैंने ये बात पहले भी कही है कि एक दिन ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, तालिबान और ऐसे ही अन्य देश जहां आतंकवाद पलता है, वो इस्लाम को खुद ही खतरे में डाल देंगे और ऐसे आसार नज़र आने लगे हैं.
लेकिन मेरा एक सवाल है कि आज उइघुर मुसलमानों के लिए इतनी वेदना क्यों है –अगर उन्हें कल को चीन से आज़ादी मिल गई तो क्या उइघर मुस्लिम किसी सभ्य देश के सभ्य नागरिक बन सकेंगे? या वो भी रोहिंग्या तो नहीं बन जायेंगे?
कोई इस्लामिक देश संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के लिए पास किया गया प्रस्ताव नहीं मानता और कोई देश अपने यहां किसी इस्लामिक देश के शरणार्थी नहीं लेता और मुस्लिम वहां जाने की बजाय यूरोप के देशों में जाते हैं.
मुस्लिमों के लिए आंसू बहाने वाले हमारे देश के वामपंथी, नक्सली, खुद को मुस्लिमों की पार्टी कहने वाली कांग्रेस, कोई सेकुलर दल, ओवैसी या मुस्लिम संगठन कभी उइघ र कौम के लिए नहीं बोलते –
क्या हमारे भी सभी सेकुलर दलों का सेकुलरिज्म केवल भारत के मुसलमानों के लिए है क्यूंकि वो एक वोट बैंक हैं –चीन के विरुद्ध ना बोलिये मगर क्या उइघर कौम के लिए बोलने से भी इनके लिए “सेकुलरिज्म” को खतरा हो सकता है क्या?
अलबत्ता ये जरूर है कि अगर उइघर मुस्लिम भारत में आ जाएं तो यही सेकुलर दल उनके लिए पगला जायेंगे –अभी ये दल अपने मुसलमानों को सब कुछ मिलते हुए भी उन्हें “डरा हुआ” बताते हैं.
उइघर कौम चीन का अपना मसला है, उसे ही भुगतने दीजिये –शी जिनपिंग इस्लाम को धर्म नहीं “मनोरोग” कहता है और अपनी तरह से उसका उपचार कर रहा है –ऐसा न हो, एक दिन कुछ मुल्क चीन का उपचार स्वीकार कर लें.
(सुभाष चन्द्र)

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