पूछता है देश : कांग्रेस-ममता का गठजोड़ देश में कितनी करेगा तोड़फोड़?

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ममता बनर्जी की गोद में कांग्रेस -पहले सिंघवी खड़े हुए और अब कपिल सिबल लड़ रहे हैं ममता के लिए कोर्ट में.
सवाल ये है कि G-23 के नेता क्या ममता को लीडर मान लेंगे?
क्या कपिल सिबल को सुप्रीम कोर्ट में जो मर्जी अनर्गल बोलने का अधिकार है और क्या माननीय अदालत उस पर सवाल भी नहीं करेगी ?
कोलकाता हाई कोर्ट के राज्य में हुई हिंसा की CBI जांच के आदेश को ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और उसका पक्ष रख रहे हैं कपिल सिबल.
इसके पहले जब ममता की पार्टी के 4 नेता गिरफ्तार हुए थे तब उन्हें बचाने गये थे अभिषेक मनु सिंघवी – ऐसा लगता है ममता के पास केवल रोहिंग्या और बांग्लादेशी हैं हिन्दुओं के खिलाफ दंगा करने वाले मगर वकील नहीं हैं.
क्या कांग्रेस के वकील ममता की गोद में बैठ गए हैं या G-23 के नेता ममता को अपनी लीडर मानना चाहते हैं.
कपिल सिबल से अदालत में बड़ी बेहूदा बात कही कि NHRC द्वारा भेजी गई जांच टीम तो भाजपा की ही टीम जैसी थी –माननीय अदालत को क्या सिबल को जो मर्जी अनर्गल बातें कहने का अधिकार दे देना चाहिए?
NHRC की टीम को भाजपा की टीम कह दिया, CBI, NIA, ED और ECI जैसी सभी संस्थाओं को भाजपा की बता देते हैं -जब मर्जी आये EVMs के खिलाफ खड़े हो जायेंगे.
अदालत इनके विरुद्ध कोई फैसला दे दे तो वो भी भाजपा के दबाब में दिया फैसला कह दिया जाता है- आज कई मीडिया चैनल देश विरोधी काम में लगे हैं, उन पर कोई भी कार्रवाई करे सरकार तो उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला कह देते हैं.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विनीत सरन और अनिरुद्ध बसु की पीठ ने सिबल को बस ये आदेश दिया कि वो इस बारे में एक संक्षिप्त नोट जमा करें जिस पर सुनवाई 20 सितम्बर को होगी.
कपिल सिबल का ममता सरकार के साथ खड़ा होना कोई अचरज की बात नहीं है क्यूंकि ममता अपनी पार्टी के अपराधियों को बचाने में लगी है और हर अपराधी का वकील कपिल सिबल होता है, ये जगजाहिर है.
माननीय अदालत इस सुनवाई को करते हुए ये भी आदेश दे कि बंगाल से हुए विस्थापित लोगों को ममता सरकार वापस लाये और उन्हें हर तरह से सुरक्षा प्रदान करे.
इसी तरह राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर भी जल्द फैसला दिया जाये.