पूछता है देश: Danish Siddiqui के कातिलों का नाम लेने से क्यों डर रहें हैं उसके चाहने वाले?

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Danish Siddiqui की मौत पर,  भूत प्रेतों का लुटियन गैंग, हिन्दुओं को कोस रहा है, डर के मारे “हत्यारों” का नाम भी नहीं ले रहे !
रॉयटर्स का फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी इमरान खान के चहेते तालिबान के हाथों मारा गया और हमारे यहां लिब्ऱांडु / लिब्ऱांडी सब छातियां पीट रहे हैं.
आज ये लोग ऐसे तड़प रहे हैं जैसे कोई दूसरा बुरहान वानी मारा गया हो  मगर रविश कुमार, सबा नक़वी, बरखा दत्त और रिफत जावेद जैसे पत्रकार ये कहने की हिम्मत नहीं कर पा रहे कि दानिश को इमरान खान के दोस्त तालिबान ने मारा.
केजरीवाल, सिसोदिया और राहुल गाँधी भी उसके लिए विलाप करने में पीछे नहीं हैं मगर वो भी तालिबान का नाम नहीं ले रहे –मगर चाहते हैं मोदी सरकार मदद करे –
इनका वश चलता तो ये सभी मिल कर दानिश की मौत के लिए RSS को जिम्मेदार बता देते और ढोल पीटते कि संघ ने उसकी “लिंचिंग” कर दी –मगर ओवैसी भी चुप हैं. और वो भी बोल नहीं रहे कि ये लिंचिंग तालिबान ने की है.
ये भूत प्रेतों का लुटियन गैंग कह  रहा है कि “हिन्दू मूर्ख” दानिश के मरने पर खुश हैं जबकि वो भूल गए कि कुछ दिन पहले ट्विटर पर ट्रेंड चला कर “मुस्लिम मूर्ख” भी रोहित सरदाना की मौत पर खुश हो रहे थे.
दानिश ने अपना अधिकतर समय मोदी, संघ, भाजपा और हिन्दुओं को “फासिस्ट” साबित  करने में लगा दिया जबकि किसी ने पलट कर  उसके खिलाफ कुछ नहीं कहा.
उसने हिंदुत्व को बदनाम करने की उसने सारी हदें पार कर दी जब कोरोना से मृत हिन्दुओं की जलती चिताओं की फोटो प्रकाशित करता रहा और कभी किसी कब्रिस्तान में नहीं गया.
तब किसी लिब्रान्डु या लिब्ऱांडी ने उसे ऐसा करने से नहीं रोका और अगर रोका होता तो आज ये दिन ना देखना पड़ता.
दानिश खुद एक फासिस्ट की तरह बर्ताव कर हिन्दुओं के खिलाफ नफरत फैलाता रहा चाहे वो CAA हो, Farmers Agitation मगर खुद एक “फासिस्ट” संस्था के हाथों ही मारा गया.
इन लुटियन वालों को अभी भी अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि हमारे भागवत जी ने तो सभी का DNA एक ही बताया था और उसमे दानिश भी शामिल था.
भागवत जी की बात पर तो सब भड़क गए थे कि सबका DNA अलग है –अब लगता है जिनसे दानिश का DNA मिलता है, उन्होंने ही उसे उड़ा दिया.
अब बरखा दत्त, राजदीप, रविश कुमार, सबा नक़वी, राना अय्यूब, अरफ़ा खानुम और राहुल कँवल को अफगानिस्तान जा कर लाइव रिपोर्टिंग करनी चाहिए.
साथ में नसीरुद्दीन शाह और आमिर खान को भी अफगानिस्तान जा कर कुछ दिन रहना चाहिए क्यूंकि भारत में तो उन्हें “डर” लगता है –उनकी कौम के लोगों का राज है अफगानिस्तान में इसलिये वहां अब उन्हें कोई “डर” नहीं होगा.
(सुभाष चन्द्र)