पूछता है देश : DNA एक है तो देश के दुश्मनों से मुहब्बत क्यों?

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“हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में सब भाई भाई” -ये नारा क्या इसलिए गढ़ा गया, क्यूंकि सबका DNA एक है – फिर आज DNA अलग क्यों हो रहे हैं?
ये नारा हमसे बचपन में स्कूल में जोर जोर से लगवाया जाता था -“हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में सब भाई भाई”.
और इसका मतलब यही बताया जाता था कि भारत में रहने वाले हर धर्म के लोग एक ही भारत माता की संतान हैं –सब भाई हैं.
लेकिन ऐसा भी कहते हैं, आज़ादी से पहले ये नारा केवल “हिन्दू मुस्लिम ईसाई, आपस में सब भाई भाई” था – नेहरू ने आज़ादी के बाद सिख जोड़ दिया.
फिर इंदिरा गाँधी ने बना दिया – “हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, बौद्ध भी हैं हमारे भाई” फिर राजीव गाँधी आये और
उन्होंने कर दिया -“हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, बौद्ध, जैन भी हमारे भाई” यानि जिनके खुद के धर्म और कुल का पता नहीं, वो ज्ञान देते रहे.
लेकिन सबका DNA एक होने पर भी उन्होंने पाकिस्तान कैसे हथिया लिया और अब ये एक डीएनए वालों में से बहुतों ने वंदे मातरम कहना कैसे बंद कर दिया, जन गण मन गाना क्यों बंद कर दिया, योग से नफरत कैसे करने लगे ? और आज फिर से दूसरा पाकिस्तान बनाने की मांग कैसे करने लगे?
आज हिन्दुओं को ऐसे तोड़ रहे हैं ये एक DNA वाले कि नए नए नारे गढ़े जाने लगे –“दलित मुस्लिम भाई भाई” “यादव मुस्लिम भाई भाई” और भी कई ऐसे नारे लगे हैं.
वो कैसे कहने लगे कि उनके 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी हैं और आज उन्हें तालिबान जैसा क्रूर आतंकी संगठन उनको पसंद आ रहा है जो मृत औरतों से भी रेप करता है?
जिन सिख गुरुओं ने मुग़लों से युद्ध किये और जिनकी निर्मम हत्याएं की मुग़लों ने, उन सिख गुरुओं के अनुयायी आज पाकिस्तान के दोस्त कैसे बन गए और खालिस्तान मांगने लगे?
वो इमरान खान को दोस्त कहने लगे और मोदी को दुश्मन बताने लगे जबकि अफगानिस्तान से वे एक भी सिख को सुरक्षित नहीं ला सकते थे और न ही अपने पूजनीय ग्रंथ साहब को ..जिनको निकाल कर सुरक्षित भारत लाये पीए मोदी.
आज ईसाई भी देश के टुकड़े कर एक टुकड़ा अपने लिए कैसे मांग रहे हैं?
महात्मा विदुर ने कहा था व्यक्तियों की भांति नीतियों की भी एक आयु होती है और उनका कथन ध्यान  में रखते हुए आज ये सोच बदलने की जरूरत है कि सबका DNA एक है.