Poochta hai desh: दुनिया में देश की छवि बिगाड़ने के पीछे मकसद क्या है?

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मदरसे के मौलवी लगते हैं हामिद अंसारी जी- मगर उधर मूर्ख हैं अमेरिकी लोग जो पढ़े लिखे जाहिल हैं बेचारे, जो इनकी सुनते हैं -जहां सुरक्षित हो, वहां रहो अंसारी साहब!

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक बार फिर देश के खिलाफ जहर उगला है और वो भी ऐसी अमेरिकी संस्था में बैठ कर जिसे पाकिस्तानी चलाते हैं.

हामिद अंसारी ने अमेरिका के सांसदों के साथ भारत में मानवाधिकारों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हिन्दू राष्ट्रवाद की बढ़ती प्रवत्ति खतरनाक है.

हिन्दू राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की काल्पनिक प्रवत्ति असहिष्णुता को हवा दे रही है जिससे अशांति और असुरक्षा बढ़ रही है.

ऐसे बयान मुसलमानों में असुरक्षा फैलाते हैं और ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा, अंसारी ही नहीं, कई और पढ़े लिखे
मुस्लिम नसीरुद्दीन शाह, आमिर खान, मुनव्वर राणा, ओवैसी आदि दे चुके हैं.

ये अंसारी और रोज रोज ऐसे बेवजह राग अलापने वाले इनके जैसे अन्य मुस्लिम नेता आम मुसलमानों को डरा कर देश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं.

कोई भी ऐसी बातें सुनकर यही कह सकता है कि आपको जहां कहीं देश के बाहर कोई सुरक्षित स्थान दिखता हो, तो आप वहां ही चले जाइये.

ये मदरसों के उन कट्टरपंथी मौलवियों से कम नहीं हैं जो बचपन से ही छोटे छोटे बच्चों के दिल में दूरियों का जहर घोलने का काम करते हैं.

मूर्ख हैं अमेरिकी जो भारत के इन पढ़े लिखे इन जाहिलों की बात सुनते हैं, ये लोग असुरक्षा और असहिष्णुता का ढोल पीटने वाले कभी उन अमेरिकी सांसदों को ये नहीं बताएंगे कि ये 20% होते हुए “अल्पसंख्यक” हैं भारत में और इतने “सहिष्णु” हैं कि 80% हिन्दू जनता को रोज इनके नेता धमकी देते हैं.

ये नहीं बताएँगे अमेरिकी सांसदों को कि –

-छोटा ओवैसी 15 मिनट में पुलिस हटा कर 100 करोड़ हिन्दुओं को ख़त्म करने की धमकी देता है;

-बड़ा ओवैसी योगी और मोदी के हटने के बाद हिन्दुओं को ख़तम करने की बात करता है;

-वारिस पठान 15 करोड़ को 100 करोड़ पर भारी कहता है;

-तौकीर रजा कानून हाथ में ले कर हिन्दुओं को निकलने के रासते बंद करने की धमकी देता है; और

-मोहमद मुस्तफा ऐसे हालात पैदा करने की धमकी दे रहा है जिन्हे सम्हालना संभव नहीं होगा.

मौलाना अंसारी बताएं, असहिष्णु कौन है, असुरक्षित कौन हैं ?

अमेरिकी के सांसदों को पता नहीं है कि मुस्लिमों को या किसी और कौम को उनके देश में अल्पसंख्यक होने के नाते ऐसे अधिकार नहीं मिलते जो भारत में मिलते हैं.

इसलिए अमेरिकी सांसद भारत के लिए चुप रहें तो बेहतर होगा –अपने अमेरिका को सम्हाल लो पहले, जहां ये आपका तुष्टिकरण महंगा साबित होने वाला है जल्दी ही.