पूछता है देश: गांधी के नाम पर अभिव्यक्ति की आजादी कहाँ गई?

ये कैसी अभिव्यक्ति की आज़ादी है, भगवान राम, कृष्ण और माँ दुर्गा के खिलाफ कुछ भी बोलो -कोई फर्क नहीं पडता मगर कथित “राष्ट्रपिता” गाँधी पर कोई अपवाद नहीं हो सकता – गाँधी की विरासत कौन सम्हाले ?
कंगना राणावत के खिलाफ कुछ लोग एक के बाद एक केस दर्ज कर रहे हैं कि उसने “महात्मा” गाँधी का और स्वतंत्रता मिलने का अपमान किया है.
एक सीधा सा सवाल है मेरा, क्या हमें ऐसी अभिव्यक्ति की आज़ादी है कि भगवान राम को काल्पनिक कहें, उनका अपमान करें,उनका मजाक उड़ाएं, भगवान् कृष्ण का मजाक उड़ाएं और माँ दुर्गा की नग्न पेंटिंग बनाने की अनुमति दें.
लेकिन ये अभिव्यक्ति की आज़ादी हमें कथित “राष्ट्रपिता” गाँधी को, उनके आचरण पर कुछ रचनात्मक आलोचना करने से रोकती है -ये कैसा दोहरा चरित्र है?
गाँधी ने आज़ादी दिलाई, इस बात से जरूरी नहीं है, हर कोई सहमत हो –जगतपिता माने जाने वाले राम और कृष्ण का अपमान करोगे और गाँधी की पूजा करोगे –कोई न करे तो उसे सजा दोगे क्या ?
कंगना ने गलत नहीं कहा कि आप गाँधी के समर्थक हो सकते हैं या नेता जी के लेकिन दोनों के नहीं हो सकते –सत्ता के भूखे और चालाक लोग थे जिन्होंने हमें सिखाया कि कोई तुम्हे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो और तुम्हे आज़ादी मिल जाएगी – ऐसी आज़ादी भीख में मिलती है –
ये कंगना के अपने विचार हैं, हो सकता है कोई सहमत हो या न हो –आपने तो नरेंद्र मोदी को हर तरह की गाली देने की अनुमति दे रखी है अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर.
दूसरा सवाल है गाँधी की विरासत को क्या कांग्रेस पर सम्हालने का दायित्व नहीं था –दूसरा गाल देने के साथ तुषार गाँधी ने कहा था कि अहिंसा के लिए हिम्मत जरूरी होती है.
दूसरे गाल पर थप्पड़ खाने की वकालत कर गाँधी की विरासत को सम्हालने वाली कांग्रेस ने फिर गाँधी वध पर हजारो चितपावनी ब्राह्मण क्यों क़त्ल करा दिए ?
गाँधी की ऐसी विरासत सम्हालने वाली कांग्रेस ने इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद 5000 हजार सिख क्यों कटवा दिए –क्या यही है गाँधी की विरासत ?
मतलब साफ़ था कि कांग्रेस किसी के आगे दूसरा गाल थप्पड़ खाने के लिए करने थ्योरी नहीं मानती और आज कोई सड़क पर किसी को एक थप्पड़ मार कर देखे, क्या होता है.
गाँधी जी का आचरण हिन्दुओं के प्रति और उनका निजी जीवन कई अपवादों से भरा है –जगत पिता भगवान् राम को अपमानित करने वाले देश को खंडित कर आज़ादी दिलवाने वाले गाँधी को सम्मान कोई करे न करे, ये अधिकार हर किसी को होना चाहिए.