पूछता है देश: गौमाता का अपमान करने वालों की अभी कितनी दुर्गति होनी है?

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यह तथ्य एक ऐतिहासिक सत्य के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में दर्ज हो रहा है कि गौमाता का श्राप पाने वाली  कांग्रेस केरल में खंड-खंड हो रही है. सोनिया की कांग्रेस के लिये स्थिति इतनी दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गाँधी का वायनाड छोड़ने का वातावरण तैयार हो रहा है.
मई, 2017 में केरल के कन्नूर में कांग्रेस के नेताओं ने सड़कों पर गाय काट कर गोमांस की पार्टी की थी – केंद्र सरकार के पशु व्यापार पर रोक लगाने के परिपत्र के खिलाफ विरोध जताने के लिए ये बर्बरता कांग्रेस के लोगों ने दिखाई थी. और इस तारीख को भी गौ को माता मानने वाले भारतवर्ष का इतिहास कदापि न भूलेगा.
राहुल गाँधी ने जरूर इसकी निंदा की थी मगर वो हर भाषण में लोगों के खाने की चीज़ों पर सरकार के कथित प्रतिबन्ध की निंदा करते हैं -राहुल गाँधी कहना चाहते हैं कि सरकार मुसलमानों को गोमांस नहीं खाने देती.
ये गोमांस की पार्टी करने वाले नेता रेजिल मकुट्टी ने आधी अधूरी-माफ़ी मांग ली थी मगर कांग्रेस फिर भी बाज नहीं आई.
कांग्रेस ने 19 फरवरी 2020 को केरल राज्य के पुलिस ट्रैनिंग कैन्टीन के खाने से बीफ को हटाने के विरोध में फिर से मुक्काम पुलिस स्टेशन के बाहर गोमांस का वितरण कर पार्टी की थी —
अब लग गया न श्राप गौमाता का कांग्रेस को, जो केरल में पार्टी खंड-खंड हो रही है –पी सी चाको जैसे वरिष्ठ नेता ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया – चाको G-23 के नेताओं की तरह अधर में नहीं लटके रहे.
राज्य महिला कांग्रेस की अध्यक्ष लतिका सुभाष ने पार्टी का टिकट न मिलने के विरोध में तिरुवनंतपुरम में पार्टी ऑफिस के सामने अपना सिर मुंडवा लिया.
सोनिया गांधी के बहुत करीबी रहे टॉम वडक्कन 14 मई 2019 को पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे –
जयंती नटराजन तो 2015 में ही पार्टी को अलविदा कह चुकी थी.
अभी 3 दिन पहले केरल कांग्रेस के पूर्व महासचिव विजयन थॉमस पार्टी से अलग हो कर भाजपा में शामिल हो गए -अब देखना है चाको आते है या नहीं.
कांग्रेस के लोग माँ बेटे के विरोध में ही पार्टी छोड़ते हैं मगर पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता –पार्टी को अपना मुस्लिम वोट बैंक चाहिए और कुछ नहीं.
पार्टी को केरल में मुस्लिम लीग से प्यार है, बंगाल में इंडियन सेक्युलर फ्रंट से और असम में AIUDF के बदरुद्दीन अजमल से प्यार है -कांग्रेस के लिए ये तीनो दल सेकुलर और देशभक्त हैं, बाकी चाहे पार्टी भाड़ में जाये.
केरल में कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ कर कहीं लेफ्ट गठबंधन को दुबारा सत्ता में आने में मदद न कर दें –वो अगर लेफ्ट के खिलाफ लड़ना चाहते हैं तो उन्हें भाजपा के साथ आना चाहिए, वरना एक बार फिर 5 वर्ष के लिए लेफ्ट का
दमन जारी रहेगा.

(सुभाष चन्द्र)

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