पूछता है देश: कैसे कह रहे हैं अखिलेश कि Purvanchal Expressway उनका है?

अखिलेश यादव के काम को अपना कैसे बता सकती है भाजपा – तो फिर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को अपना कैसे कह रहे हैं अखिलेश?
कल 16 नवंबर को अखिलेश यादव के समाजवादी लोग पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन खुद ही कर आये साईकल चला कर पर अखिलेश खुद नहीं गए
जब अखिलेश इसे अपना प्रोजेक्ट बता रहे हैं तो चाहे सत्ता में हैं या नहीं, समाजवादियों के साथ उन्हें खुद जा कर उद्घाटन करना चाहिए था –या फिर आरोप मत लगाइये कि भाजपा ने उनके काम को अपने खाते में लिख लिया.
अखिलेश यादव ने इस प्रोजेक्ट को मई, 2015 में लखनऊ- आजमगढ़- बलिया के लिए मंजूरी दी थी, मगर 19 मार्च,2017 को पद से हटने तक कोई काम नहीं किया –उसकी मंजूरी में वायुसेना के उपयोग के लिए भी कोई परिकल्पना नहीं थी.
योगी जी ने फिर इस प्रोजेक्ट को लखनऊ आजमगढ़ गाजीपुर कर दिया और 95% जमीन अधिग्रहण करके पीएम मोदी से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के 22494 करोड़ के प्रोजेक्ट का 14 जुलाई, 2018 को शिलान्यास करा दिया जिसका कल लोकार्पण हुआ.
अन्य एक्सप्रेसवे तो भाजपा ने अपने नाम नहीं किये फिर इस पर बवाल क्यों काट रहे हो?
–2001 में राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री रहते नोएडा – आगरा हाईवे को मंजूरी मिली थी जिसका उद्घाटन अखिलेश ने 9 अगस्त, 2012 को किया -उसे तो भाजपा ने अपने खाते में नहीं लिया जो ले सकते थे, मंजूरी भाजपा राज में दिए जाने के कारण – वो तो अखिलेश के खाते का किसी तरह था ही नहीं.
–आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे का शिलान्यास मुलायम सिंह ने किया 23 नवम्बर, 2014 को और आपने  उद्घाटन किया 21 नवम्बर, 2016 को क्यूंकि तब बाप-बेटे के बीच ठन गई थी –क्या भाजपा ने उसे अपना कहा?
–1047 किलोमीटर के गंगा एक्सप्रेसवे का लांच तो शुरू हुआ मायावती के समय में 2007 में मगर निर्माण कार्य शुरू हुआ योगी के आने के बाद -तो क्या उसे मायावती के खाते में लिख दिया जाये.?
–मुलायम, मायावती और अखिलेश ने बुंदेलखंड को कभी राष्ट्रमार्ग देने की जरूरत नहीं समझी –अब मोदी,योगी का 296 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे मार्च, 2022 में शुरू होगा जिसकी घोषणा अप्रैल 2017 में हुई थी.
अभी बता दो अखिलेश जी, क्या ये भी मंजूरी आप जाने से पहले दे गए थे जिस पर योगी अपना ठप्पा लगा रहे हैं?
अखिलेश जी आपके काम पर तो भाजपा अपना ठप्पा लगा ही नहीं सकती –भला कारसेवकों की हत्या, दंगे कराना, केवल मुस्लिम लड़कियों को अपनी बेटी कहना, आज़म खान की भैंसो के पीछे पुलिस दौड़ाना, कब्रिस्तानों के लिए जमीन हड़पना, केवल यादव और मुसलमानों को नौकरी देना, राम जी के मंदिर का विरोध करना और सैफई में अश्लील नृत्य कराना और अब जिन्ना को अपना बाप कहना- इन सब पर भाजपा अपना ठप्पा कैसे लगा सकती है –ये तो आपको ही शोभा देते हैं.