पूछता है देश: कारगिल का अपराधी पाकिस्तान आज अकेला क्यों है?

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कारगिल के शहीदों को नमन ! दोस्ती की आड़ में दगा देने वाला मुल्क, दुनिया में अकेला है आज – धोखे का परिणाम उसे मिल गया.
22 बरस पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान को दोस्ती की सौगात देने के लिए बस ले कर गए मगर मुशर्रफ ने धोखा दे कर कारगिल का खेल खेला.
नवाब शरीफ ने दावा किया उसे कुछ पता नहीं था.
अटल जी ने पाकिस्तान में कहा था- “स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध पाक भारत के हित में है और इस बात पर पाकिस्तान के लोगों को कोई शक नहीं होना चाहिए”
जबकि सत्य ये है कि पाकिस्तान किसी-किसी भी सूरत में भारत के लिए एक सरदर्द ही साबित हुआ है – पाकिस्तान के हुक्मरानों ने कश्मीर को कोढ़ के रूप में अपनी खोपड़ी में पाल रखा है.
और इसका कोई इलाज नहीं है.
पाकिस्तान की इस सोच के चलते उसके साथ किसी तरह की दोस्ती होने की कोई सम्भावना नहीं हो सकती और ये बात पाकिस्तान के इमरान खान को समझ आ गई है कि वर्तमान मोदी सरकार किसी तरह दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाएगी.
3 मई, 1999 को शुरू हुए कारगिल युद्ध में हमारी सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आज के दिन विजय  प्राप्त की –ये साधारण युद्ध नहीं था जिसमे दुश्मन उपर चोटियों पर था और हमारे जवान जमीन पर.
10 डिग्री सेलसियस पर ये युद्ध 60 दिन तक चला था.
हमारे 527 जवानों ने देश के लिये जीवन का बलिदान दिया जैसे 1947, 1965 और 1971 के पाकिस्तान से 3 युद्धों में हुआ था  –मगर दुर्भाग्य से कांग्रेस ने कारगिल के इस युद्ध को “भाजपा का युद्ध” कह दिया –
इसी घटिया सोच के कारण मनमोहन सिंह सरकार ने कभी आज के दिन को विजय दिवस के रूप में नहीं मनाया –2009 में जरूर श्रद्धांजलि दी गई जब भाजपा सांसद चंद्रशेखर ने सरकार को चेताया था.
कांग्रेस जिस तरह सेना पर सवाल उठाती रही है और जिस तरह बड़ी बेशर्मी ने कारगिल को “भाजपा का युद्ध” बता कर सेना का अपमान किया और आतंकियों का साथ देती रही है, उसे देख कर लोग ये भी कह सकते हैं कि कारगिल शरारत में कांग्रेस का भी हाथ रहा होगा.
अटल जी की बस यात्रा के सन्दर्भ में अमेरिकी डिप्लोमेट स्ट्रोब टालबोट ने कहा था कि ये यात्रा1971 की निक्सन की चीन यात्रा की तरह थी.
मगर सच ये निकला कि निक्सन की यात्रा के बाद अमेरिका नुकसान में रहा और भारत को अटल यात्रा के बाद एक बार फिर धोखा मिला.
मुशर्रफ ने पाकिस्तान के लिए ही तो धोखा दिया और कारगिल में खेल खेला –मगर क्या मिला उसे – उसी पाकिस्तान ने उसे फांसी की सजा सुना दी मगर वो दुबई में पड़ा मौत मांग रहा है पर मिल नहीं रही.
नवाज़ शरीफ भी आज पाकिस्तान से बाहर ही है और उसे भी अपने मुल्क लौटने की अनुमति नहीं है. कहते हैं क्लिंटन के जरिये अटल जी को नवाब शरीफ ने एटम बम चलाने की धमकी दी थी.
अटल जी ने क्लिंटन को जवाब दिया था कि ठीक है, हम पाकिस्तान का एटम बम झेल लेंगे मगर वो कल का सूरज नहीं देख सकेंगे –और अगले दिन पाकिस्तान पीछे हटने को तैयार हो गया.
इससे बड़ा दुर्भाग्य किसी भी नेता के लिए और क्या हो सकता है कि उसे अपने ही देश में रहने के लिए मना हो जाये.
आज इमरान खान को भी समझ लेना चाहिए कि उसका ये रोज का ड्रोन-ड्रोन का नाटक एक दिन कुछ गुल खिला देगा और वो दिन उसकी  बर्बादी का होगा.
कारगिल में हुए सभी शहीदों को नमन जिन्होनें एक ऐसा युद्ध जीता था जिसकी मिसाल नहीं मिल सकती. इसके बाद देश ने बातचीत की टेबल पर कुछ नहीं गवांया था, जैसे 1965 और 1971 में गंवाया था.

 

 

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