पूछता है देश : क्यों नहीं होना चाहिये भारत में एक ही कानून सबके लिये?

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड – कॉमन सिविल कोड के खिलाफ है – अपने ईश की निंदा की फ़िक्र है, हिन्दुओं के ईश्वर की निंदा पर खामोश रहता है बोर्ड.
पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को कॉमन सिविल कोड लागू करने पर विचार करने के आदेश दिए थे -ये कानून लागू करना संविधान ने अनुच्छेद 44 में सरकार की जिम्मेदारी है.
लेकिन आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (आगे केवल बोर्ड लिखूंगा) ने सबसे पहले इसका विरोध किया है और ऐसा विरोध सभी “सेकुलर दल” करेंगे –बोर्ड ने कहा, मुस्लिम समाज इस CCC को कभी मंजूर नहीं करेगा.
फिर बोर्ड ने ईश निंदा के खिलाफ कानून बनाने की मांग की है और कहा है कुछ समय से पैगम्बर का अपमान बढ़ गया है –यानि बोर्ड केवल अपने ईश की निंदा नहीं चाहता, हिन्दुओं के ईश्वर को कोई कुछ भी कहे.
ईश निंदा का कानून केवल मुस्लिम समुदाय के लिए लागू नहीं हो सकता और शायद इसलिए जावेद अख्तर ने तुरंत इस मांग का विरोध किया है क्यूंकि वो तो घोर हिन्दू विरोधी हैं.
कुछ सवालों के जवाब बोर्ड को देने होंगे:
–क्या कभी बोर्ड ने मक़बूल फ़िदा हुसैन की हिन्दू देवी देवताओं की नग्न पेंटिंग बनाने के खिलाफ कुछ बोला था?
–क्या बोर्ड आज के मुस्लिम समाज के मुनव्वर फारुकी जैसे कलाकारों की हरकतों का चुप रह कर समर्थन नहीं कर रहा जो हिन्दू धर्म का रोज अपमान कर रहा है?
–क्या बोर्ड उन मौलवियों की बात से सहमत है जो कहते हैं कि दूसरों के भोजन में थूक डाल कर उनका दीन खराब करने के लिए इस्लाम में इज़ाज़त है?
-बोर्ड ने मुस्लिमों से कहा है कि वे गैर मजहबी विवाह से बचें क्यूंकि इससे समाज में विभाजन पैदा होता है और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ता है –क्या बोर्ड नहीं चाहता कि सामाजिक समरसता बढे?
–ये कैसा दोहरा मापदंड है बोर्ड का कि मुस्लिम तो उनके नबी के खिलाफ बोलने वाले का सिर कलम करने का अधिकार रखते हैं मगर वो दूसरों के ईश्वर का अपमान कर सकते हैं –क्या दूसरे धर्म वाले ऐसा करने का अधिकार नहीं रखते?
सवाल अनेक हैं मगर बोर्ड को अबसोचना होगा कि एक देश एक कानून जरूरी है -जिन्हे पसंद न हो, वो ऐसे मुल्क में जा सकते हैं जहां उनका मन पसंद कानून हो –हाल ही में बोर्ड के बड़े नेताओं ने तालिबान का सत्ता पर कब्जे का स्वागत किया था.
बोर्ड को अपनी कौम के उन लोगों पर लगाम लगानी चाहिए जो आजकल हर तरह से देश तोड़ने की साजिश में लगे दिखाई देते हैं, जिनके मुंह में जो आता है हिन्दुओं के खिलाफ, वो बोल रहा है- क्या यह उचित है?