पूछता है देश: क्यूँ महबूब है Pakistan कश्मीरी नेताओं का?

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ड्रोन से छोटे मोटे हमले करवा कर महबूबा मुफ़्ती और उसके पाक को क्या लगता है कि धारा 370 वापस आ जाएगी? – इसका दंड मिलेगा इमरान खान !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कश्मीरी नेताओं की बैठक के ठीक 3 दिन बाद पाकिस्तान के आतंकियों ने जम्मू के हमारे एयरबेस में ड्रोन से शरारत की है.
बैठक से पहले महबूबा ने गीत गाया था कि पाकिस्तान को भी बातचीत में शामिल किया जाये लेकिन बैठक में जुबान पर ताला लगा कर बैठी थी.
और इसमें कोई शंका नहीं हो सकती कि ड्रोन शरारत में महबूबा ने सरहद पार बैठे अपने चाहने वालों के साथ मिल कर खेल खेला हो.
क्या समझती हैं मैडम और उसके नापाक साथी कि इस तरह की हरकतों से 370 वापस आ जाएगी?
लेकिन ख़बरें हैं कि पाकिस्तान में इस समय खलबली है और डर है एक और संभावित “कार्रवाई” न हो जाये –वो जो बैठा है सामने, उसका नाम मोदी है, चुप रहेगा मगर काम-तमाम भी कर देगा.
अबकी एक बार फिर किसी की टांगें कांपेंगी और बाजवा की हो सकता है पैंट गीली हो जाये -भारत में अभी कोई ड्रोन हमले के सबूत नहीं मांग रहा है.
ऐसे सबूत मांगने वाले ये मांग भी नहीं कर रहे हैं कि पाकिस्तान पर कार्रवाई करो – वो सबूत मांगेंगे जब एक और बालाकोट हो जायेगा.
पाकिस्तान ने ड्रोन से हमले प्रधानमंत्री की बैठक के 3 दिन बाद किये और 21 से 25 जून तक FATF की बैठक के 2 दिन बाद किये जब फैसला हुआ कि अभी पाकिस्तान उनकी ग्रे लिस्ट में रहेगा.
एक दूसरी खबर से पाकिस्तान की नींद उड़ी हैं जिसमे कहा गया है कि तालिबान नेताओं ने भारत से संपर्क साधा है जिसे अभी भारत की तरफ से अफवाह बताया गया है.
अगर कल को अमेरिकी फौजों की अफ़ग़ानिस्तान से वापसी के बाद वहां की सत्ता में तालिबान शामिल होती है जिसे पाकिस्तान समर्थन देता है तो भारत को भी उनसे बात करनी पड़ेगी -और ये पाकिस्तान को गंवारा नहीं होगा.
पाकिस्तान के एनएसए मोईद युसूफ ने यहां तक कहा कि तालिबानियों से बात करते हुए भारत को शर्म आनी चाहिए.
वाह खलीफा, तुम दुनिया भर के आतंकी अपनी जेब में ले कर बैठे रहो और तालिबानी भी तुम्हारे यार हों, तब कोई समस्या नहीं है.
दुनियां में संबंधों के लिए आर्थिक व्यवस्था का बड़ा योगदान होता है- भारत अफ़ग़ानिस्तान में 3 अरब डॉलर की परियोजनाएं लगा चुका है और 2 अरब की परियोजनाओं पर काम चल रहा है -उनकी रक्षा अफ़ग़ानिस्तान के लिए जरूरी है.
चीन एक सीमा तक साथ दे सकता है पाकिस्तान का क्यूंकि आज विश्व पटल पर वो खुद अकेला है -और ऐसे में भारत से टकराना पाकिस्तान के लिए बहुत भारी पड़ेगा.

(सुभाष चन्द्र)

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