पूछता है देश : परमबीर भागा या भगाया गया?

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परमबीर सिंह की गिरफ़्तारी रोकने से उसे भागने का मौका मिला इसके लिये परमबीर सिंह का वकील और अदालत में ऐसा करने में मदद करने वाले ‘बड़े’ लोग दोषी माने जाएं.
कल महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने कहा है कि पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह शायद देश छोड़ कर जा चुके हैं.
पाटिल ने कहा वो सरकार की बिना अनुमति विदेश गए हैं और उनके खिलाफ नियमानुसार हर संभव कार्रवाई की जाएगी -वो तो आप तब करोगे ना, जब वो वापस आएगा.
दिलीप पाटिल ने बयान दिया कि परमबीर सिंह आखिरी बार अपने ऑफिस 4 मई को आये थे और उसके बाद 5 मई से स्वास्थ्य की वजह से छुट्टी चले गए –उसके बाद से उनका कुछ पता नहीं है.
इस केस में कब कब क्या हुआ –
-30 अप्रैल, 2021 को दर्ज FIR रद्द कराने परमबीर सिंह बॉम्बे हाई कोर्ट गए .
-13 मई को उद्धव सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया कि उसे 20 मई तक गिरफ्तार नहीं किया जायेगा
बेंच में जज थे -जस्टिस P B Varale and N R Borkar –
–22 मई की आधी रात में की गई सुनवाई में जस्टिस Justices SJ Kathawalla and SP Tavade ने 24 मई तक के लिए गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी;
–24 मई को महाराष्ट्र सरकार ने Justices S.S. Shinde और N.R. Borkar की पीठ के सामने सहमति जताई कि परमबीर सिंह को 9 जून तक गिरफ्तार नहीं किया जायेगा;
–7 जुलाई को justices SS Shinde और NJ Jamadar.की पीठ के सामने महाराष्ट्र सरकार ने सहमति दी कि उसे 29 जुलाई तक गिरफ्तार नहीं करेंगे.
उसके बाद क्या हुआ, मुझे नहीं मिला, बस कल खबर दी गृह मंत्री ने कि वो भाग लिया देश छोड़ कर.
मजे की बात है 5 मई से उसके गायब होने पर भी उसके वकील महेश जेठमलानी उसकी गिरफ्तारी रोकने के लिए केस लड़ रहे थे और भी काफी ‘लोग’ न्यायालय में उसकी गिरफ्तारी रोकने में लगे थे.
गृहमंत्री अपने वकील से एक बार तो कोर्ट में कहलवाते कि आरोपी 5 मई से गायब है लेकिन ये पता होते हुए भी कि वो गायब है, कोर्ट को कहते रहे हम गिरफ्तार नहीं करेंगे.
इस केस से साफ़ जाहिर है कि परमबीर की गिरफ़्तारी रोक कर उसे देश से भागने का मौका दिया गया — महेश जेठमलानी और इन ‘लोगों’ पर पर केस दायर होने चाहिए जो इस षडयन्त्र में शामिल हैं
परमबीर सिंह को विदेश से वापस लाने में जो पैसा खर्च होगा, वो भी परमबीर के वकील सहित इन सभी ‘लोगों’ से वसूल करना चाहिए जो उसको भगाने के जिम्मेदार हैं.
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट खुद कहता है पुलिस की जांच में दखल ना दिया जाये –मगर बड़े लोग गिरफ़्तारी पर रोक को एक हथियार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं –ये बंद होना चाहिए.

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