पूछता है देश: नरेंद्र मोदी पर 7 साल में कोई भ्रष्टाचार का आरोप क्यों नहीं लगा?

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सारा विपक्ष मिल कर नरेंद्र मोदी या उसकी सरकार पर 7 साल में कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सका- और वहीं मोदी ने अनेक जगह भ्रष्टाचार के सुराख बंद कर दिए.
दलालों के द्वारा गरीबों के पेट पर लात मारना बंद हो गया जबसे सबके खातों में सीधे पैसे जमा होने लगे. आज कृषि कानूनों का विरोध भी दलाल लोग इसीलिए कर रहे हैं.
विदेशों से हुए रक्षा सौदों में कोई कमीशन का धंधा नहीं हुआ –अगर मोदी या उसकी सरकार ने कुछ भी गड़बड़ की होती तो विपक्ष आसमान सर पे उठा लेता.
लेकिन उद्धव सरकार सवा साल में भ्रष्टाचार के बदबूदार गटर में आकंठ डूबे होने के आरोप लग रहे हैं –आरोप ये भी है कि शिव सेना, कांग्रेस और एनसीपी ने मिल कर राज्य सरकार को लूट का जरिया बना कर तिजोरियां भरने का काम शुरू कर दिया है क्यूंकि फिर ये मौका दुबारा तो मिलने वाला नहीं है.
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की निजी सहायिका के पास ही 100 करोड़ मिला तो समझ लीजिये मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के पास क्या होगा मात्र 2 वर्ष में –172 करोड़ रुपया तो राज्य की सरकार ने एक वर्ष में विज्ञापनों पर ही खर्च कर दिया. कमाल है!
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के एक विधायक की 450 करोड़ की काली कमाई का चिटठा खुला है –जब कमलनाथ की सरकार दिसंबर, 2018 में बनी थी, उसके बाद मई, 2019 के लोकसभा चुनाव में 300 करोड़ पकड़ा गया था, कहते हैं 20 करोड़ तो तुगलक रोड किसी बंगले पर भी आया था. सभी को याद है वो घटना.
दिल्ली के शहंशाह ने पराली ख़तम करने के लिए 40000 का स्प्रे खरीदा वो भी सरकारी भंडार से और उसका डीकम्पोज़र बना कर वितरण पर खर्च किया 23 लाख और उसके प्रचार पर यानि विज्ञापन पर खर्च किया 7 करोड़.
और मजे की बात, इसका फायदा हुआ मात्र 310 किसानों को -ये सूचना किसी और ने नहीं खुद केजरीवाल के ऑफिस ने दी है –मतलब 7 करोड़ 23 लाख 40 हज़ार केवल 310 लोगों पर खर्च कर दिया –एक व्यक्ति पर 2 लाख 33 हजार 350 रुपये.
अब वैक्सीन दे रही है केंद्र सरकार मगर विज्ञापन पेल-पेल कर दे रहे हैं जैसे वैक्सीन खुद ही लगवा रहे हों.
तेजस्वी यादव मात्र डेढ़ साल के लिए उपमुख्य मंत्री रहे और अपने सरकारी बंगले पर खर्च कर दिए 18 करोड़ -जब उस बंगले को खाली करने के आदेश हुए तो उसके खिलाफ कोर्ट के भी चक्कर लगा आये.
10 साल में मनमोहन सिंह की सरकार 12 लाख करोड़ के घोटाले के आरोप लग गये और जब कुछ पर कार्रवाई हो रही है तो चीख पुकार मची हुई है –कह रहे हैं कि सरकार उनके बोलने पर रोक लगा रही है और बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है.
ये तो कुछ उदाहरण हैं, जबकि माना जा रहा है कि उद्धव सरकार में जो भी हो रहा है, वो भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है –मजे की बात तो ये है कि कुछ कांग्रेस के नेताओं ने सोनिया से जा कर शिकायत की है कि शिव सेना और एनसीपी कमा रहे थे पर हमें कुछ नहीं मिला –वाह, क्या बात है! यहाँ आम जनता ये सवाल कर सकती है कि इतनी शराफत कैसे? जनता का कांटेदार आरोप इसी बात से जुड़ा है कि अगर इस भ्रष्टाचार कीे गेम में हिस्सा ना मिलता तो उद्धव एक दिन मुख्यमंत्री न रहते.
जब कोई भी दल सरकार को केवल कमाई का साधन बना ले तो जनता की सेवा तो एक सपना ही बन कर रह जाता है.

(सुभाष चन्द्र)