पूछता है देश: मुस्लिम वोटों की राजनीति पर चुनाव आयोग की चुप्पी क्या कहती है?

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मुस्लिम वोट की राजनीति -ममता, कांग्रेस वामपंथी और मुस्लिम खेलें, और चुनाव आयोग चुप रहे, तो सारे हिन्दू एक हो भाजपा को वोट दें.
मुझे याद है अप्रैल, 2019 का समय लोकसभा चुनाव का –चुनाव आयोग ने योगी पर 72 घंटे प्रचार की रोक लगाईं थी और मायावती पर 48 घंटे की –क्या कारण था सुनिए-
मायावती ने पहले बयान दिया था — “हम अली और बजरंग बली दोनों को चाहते हैं (खासकर बजरंग बली को क्यूंकि वो देवता मेरी दलित जाति से जुड़े हैं).
इसके जवाब में मुख्यमंत्री योगी ने कहा था-“अगर अली बसपा,सपा, RLD गठजोड़ के साथ हैं, तो बजरंग बली भाजपा के साथ हैं”.
मायावती का बजरंगबली को दलितों के साथ जोड़ना यकीनन आपत्तिजनक था लेकिन आयोग ने दोनों को आपत्तिजनक माना –दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने भी इन्हे शब्दों को “हेट स्पीच” की श्रेणी में मान कर सुनवाई की थी, पता नहीं किस मापदंड से.
अली के नाम पर, बजरंग बली , राम के नाम पर या सिख धर्म के नाम पर वोट के लिए अपील करना कुछ गलत नहीं है लेकिन किसी धर्म को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसी अपील करना निस्संदेह घातक है.
ममता बनर्जी ने यही किया, जैसा मोदी जी ने कल अपने भाषण में बताया कि उन्होंने मुसलमानों से केवल TMC को वोट करने के लिए कहा वो भी तब, जब वो जय श्री राम के नारे का पुरजोर विरोध कर रही हैं.
इसका मतलब साफ़ है कि ममता की अपील केवल घृणा से भरी है वो भी ऐसे समय में जब ओवैसी और सिद्दीकी अब्बास मुसलमानों की वोट अपनी तरफ करने में लगे हैं.
सभी विपक्षी दल मुस्लिम वोट की ही राजनीति करते हैं –हर राज्य में अनेक इलाकों में मुसलमानों की आबादी इस तरह बढ़ाने में इन दलों ने जोर लगाया है कि केवल मुस्लिम वोट ही चुनाव जिताने में मददगार हों.
यही सोच कर राहुल गाँधी वायनाड गये थे – क्या आयोग के पास इस हरकत को रोकने का कोई उपाय है.
कल मोदी जी ने चुनाव आयोग और मीडिया को सही लताड़ मारी है कि अगर हम कह देते कि सभी हिन्दू भाजपा को वोट दें तो चुनाव आयोग और मीडिया भाजपा की कैसी दुर्गति करते, इसका अनुमान ही लगाया जा सकता है.
याद कीजिये वो दिन जब नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम जालीदार टोपी पहनने से मना कर दिया था, तब सारा मीडिया पागल हो गया था लेकिन अब ममता की मुसलमानों से TMC को वोट देने की अपील की खबर भी देना मीडिया ने जरूरी नहीं समझा.
मोदी के लिए चीफ मिनिस्टर होते हुए जालीदार टोपी पहनने से मना कर एक अपराध बना दिया मीडिया ने लेकिन ममता चीफ मिनिस्टर रहते हुए ऐसा मुस्लिम कार्ड खेले तो मीडिया मुंह पर फेविकोल लगा कर बैठ जायेगा.
ऐसे में अगर गैर-भाजपा दल मुस्लिम वोट के सहारे ही चुनाव लड़ना चाहते हैं तो फिर हिन्दुओं को भी पूरी तरह एकजुट होकर भाजपा को ही वोट देना चाहिए –फिर चाहे जय श्रीराम बोल कर, जय बजरंग बली बोल कर या फिर हर हर महादेव बोल कर.
बहुत हो गया मुस्लिम तुष्टिकरण का नंगा नांच जिसे न चुनाव आयोग रोक पाया है और ना सुप्रीम कोर्ट –ऐसे में उन्हें हिन्दुओं को एकजुट करने की किसी अपील पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए.
(सुभाष चन्द्र)

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