Rafale deal: चोर अब न मचाये शोर राफेल पर

पहले तो चोर ही मचा रहा था शोर -अब कोई कांग्रेसी रफाल पर नहीं बोल रहा -जब मीडियापार्ट का खुलासा सामने आया है.
फ्रांस पत्रिका “मीडियापार्ट” ने भेद खोल कर कांग्रेस को बेपर्दा कर दिया कि 65 करोड़ की घूस दी गई 2007 से 2012 के बीच रफाल सौदा हांसिल करने के लिए.
दलाली की रकम सुषेन गुप्ता को मिली जिसने आगे किस किस को दी, ये वो ही जाने मगर 40% दलाली मांगी थी सुषेन गुप्ता ने, ऐसा बताया गया है.
मगर 65 करोड़ तो 126 रफाल के लिए 40 % दलाली नहीं हो सकती –वो तो एक रफाल की दलाली होगी जिसकी कीमत 165 करोड़ रही होगी.
मतलब 126 रफाल के लिए तो दलाली 8200 करोड़ बनती है जो आनी थी मगर डील नहीं की गई तो दलाली भी नहीं मिली –
मीडियापार्ट का दूसरा दावा पूरी तरह भ्रामक है जिसमे वो कह रहे हैं कि 2018 में CBI और ED को मॉरीशस में दी गई दलाली के सबूत दे दिए गए थे मगर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की —
मीडियापार्ट उतावलेपन में एक गलती कर गया जो इस दलाली की 65 करोड़ की रकम को उसने 2016 में हुए सौदे को हासिल करने के लिए दी हुई बता दिया.
दलाली दी गई 2007 से 2012 के बीच और तब मोदी सरकार कोई डील नहीं कर रही थी और फिर 2016 में 2 सरकारों के बीच हुई डील के लिए कमीशन 2007 से 2012 के बीच कैसे दे दिया गया.
2018 में सुप्रीम कोर्ट में रफाल के खिलाफ केस ले कर बड़े बड़े वकील और नेता गए हुए थे और ये मुद्दा उन्हें कोर्ट में तभी उठाना चाहिए था मगर किसी ने नहीं उठाया.
द हिन्दू के संपादक एन राम ने तो कटे-फटे दस्तावेजों को सुप्रीम कोर्ट में सबूत बना कर पेश कर दिया था तो फिर CBI/ED की रिपोर्ट क्यों नहीं मांगी.
राहुल गाँधी और कांग्रेस तो गले फाड़-फाड़ कर नारे लगाते रहे- चौकीदार चोर है, जबकि चोर तो खुद कांग्रेस ही थी –वो हर विषय को सरकार के खिलाफ उठाते रहे हैं चाहे झूठ ही हो –फिर CBI/ED को लपेटे में क्यों नहीं लिया अभी तक.?