Rakashabandhan Poetry: बहन तेरे नाम

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विशेष है बंधन हम दोनो में 
जो जन्मों से है पल्लवित-पुष्पित
मुड़ के देखता हूँ कि साथ क्या हमने किया 
ओठों पर आ जाती है
धीमे से यादों की मुस्कान
कितने सारे पल साथ बिताए,
कहीं दिखावा कुछ भी न था 
तुम्हें पता है तुम क्या हो मेरे लिये
मेरी बहन भी हो
मेरी मित्र भी हो
कभी-कभी मेरी माँ भी हो तुम
लड़ाई भी की है हम दोनो में
दुखदर्द भी बांटा है मिलकर
मुसकान के पल तो खूब मिले,
अब जब खुद को अकेला पाती हूँ
या लगता है कमजोर हूँ मैं
तुम साथ मेरे आ जाती हो
मेरे कांधे पर हाथ तुम्हारा
वात्सल्य भाव का नेह तुम्हारा
तब तुममे तुममे माँ की झलक सी दिखती है 
कभी सुनाती हो अपने किस्से
कभी शरारत और मस्ती
लड़ता था तुझसे बचपन में हर दिन
पर प्यार तेरा कभी कम न हुआ
जब भी हुआ कमजोर बेल सा
लिपट गई तू लता सी मुझसे
वरदान है मित्रता का जीवन भर यह
देता हूँ धन्हयवाद ईश्वर को
प्यार कभी न अपना कम हो !!