Rakshabandhan Poetry: इस बार वचन कुछ ऐसा भाई से करके जाउंगी

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रक्षा करने की
सौगंध जो तुमने खाई है
गर्व है मुझको कहने में
ये देखो मेरा भाई है
बन्धन मैं ये नेह का
जीवन भर ही निभाऊँगी
कहने को तो कलाई 
धागा बांधा मैने बांधा है
ये अनमोल अनदिखा स्नेह
सदा हृदय से निभाऊँगी
मेरी रक्षा का भार
तुम भाइयों पर ही क्यूँ
समय आने पर तुम्हारी
ढाल मैं भी बन जाऊँगी|
छोटा हो या बड़ा
भाई बहन की शान है
लड़ाई तो आपस में होगी पर
बहन मैं अच्छी कहलाऊँगी 
उपहार मुझे तुम ही दो
हर बार जरूरी ये तो नही
कुछ लिफाफे जोड़कर
अनमोल सा घर मैं लाऊंगी 
हम रक्षा बंधन मनाएँगे
हर साल धूम-धाम से
इस बार वचन कुछ ऐसा
अपने भाई से करके जाऊँगी !!