Russia का Finland पर हमला हुआ तो India के हित में नहीं होगा

30 दिसम्बर 1947, रोमानिया के राजा माइकल प्रथम को बंदूक की नोक पर त्यागपत्र दिलवाया जाता है और राजा को देश निकाला दिया जाता है।
राजा उनसे इंसानियत की मांग करते है तो वे कहते है कि शुक्र मनाओ ज़िंदा छोड़ रहे है रूस में तो हमने राजा को गोलियों से भून दिया था।
ऐसा कम्युनिस्टों का चरित्र है, सोवियत संघ का भी यही इतिहास था रूस के राजा की लाश पर यह देश खड़ा था और 1991 में इसके 15 टुकड़े हो गए। रूस का फिर से निर्माण हुआ, कदाचित भारत के अलावा हर जगह सोवियत संघ को बुराई के रूप में देखा जाता था।
जब रूस बना तो उसके राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने सबसे पहले कहा कि सोवियत के काले इतिहास को हम छोड़ आये है। 2001 में जब व्लादिमीर पुतिन राष्ट्रपति बने तो इन्होंने भी यही कहा कि हम रूसी साम्राज्य की पुनः स्थापना करेंगे। अर्थात हर कोई सोवियत संघ के तो खिलाफ ही था।
लेकिन व्लादिमीर पुतिन 2 चेहरे वाले इंसान है इनका कम्युनिस्ट प्रेम मन ही मन उबल रहा है, ये अब भी इसी फिराक में है कि रूसी साम्राज्य नही अपितु सोवियत संघ फिर से बने। नाटो को सोवियत संघ से निपटने के लिये बनाया गया था यदि रूस की वर्तमान सोच सोवियत संघ के विपरीत है तो वे नाटो से डर क्यों रहे है??
पुतिन को सोचना होगा कि अब रूस पहले जितना शक्तिशाली नही है जो उसके पीछे यूरोपीय देश पागल हो जाएंगे। पुतिन इस समय के हिटलर है, कोई बड़ी बात नही जर्मनी की तरह रूस भी बर्बाद हो जाये क्योकि जहाँ कम्युनिस्ट है वहाँ मानवता, संपन्नता और बुद्धिमत्ता का कोई स्थान नही होता।
रोमानिया में भी राजा को भले ही अपदस्थ कर दिया गया हो मगर कम्युनिस्ट तानाशाहों को जनता ने ही पटक पटक कर मार डाला था। रूस के लोगो को चाहिए कि जैसे 100 साल पहले राजा के विरुद्ध एक कीड़ा काट गया था वैसे ही उस कीड़े को फिर से जिंदा करो और पुतिन के विरुद्ध भी संघर्ष करो।
पुतिन पूरी दुनिया के लिये संकट बनते जा रहे है यदि फिनलैंड की इन्वेजन हुई तो कम से कम भारतीय इतिहास पुतिन को कभी माफ नही करेगा। भारत की फिनलैंड के साथ सायबर सिक्योरिटी को लेकर ना जाने कितनी संधि हो रखी है सब पर पानी फिर जाएगा। यूक्रेन पर भारत की निर्भरता नही थी मगर न्यूक्लियर रिएक्टर तो हम फिनलैंड से ही खरीद रहे है।
या तो पुतिन की अक्ल ठीकाने आये या फिर से रूस में कोई क्रांति हो और रोमानिया के तानाशाह की तरह रूसी जनता पुतिन को भी कूट दे। लेकिन फिनलैंड पर आक्रमण किसी हाल में नही होना चाहिए, ये आक्रमण कही हमारे न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम पर पानी ना फेर दे।