पूछता है देश : क्यों कर रहा है सऊदी अरब तबलीगी जमात का विरोध?

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सऊदी अरब ने बैन लगाया तब्लीगी जमात पर, कहा कि जमात आतंक का प्रवेश द्वार है !
सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्री डॉ अब्दुल्लातीफ अल अलशेख ने परसों इंटरनेट मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि तब्लीगी जमात समाज के लिए खतरा और आतंकवाद का प्रवेश द्वार है और इसलिए इसे बैन किया जा रहा है.
उन्होंने मस्जिदों के इमामों से कहा कि शुक्रवार की नमाज़ में लोगों को जमात से दूर रहने की चेतावनी दी जाये.
तब्लीगी जमात का जन्म हिन्दुस्थान में इस्लाम के शुद्धिकरण के नाम पर करीब 100 वर्ष पहले हुआ निजामुद्दीन से हुआ था, इसकी जड़ें आज हरियाणा के मेवात में भी मिलती हैं.
तब्लीगी जमात को सबसे ज्यादा फंड सऊदी अरब की ही कटटरपंथी संस्थाओं से मिलता है जिस पर अब रोक लगेगी जिससे जमात हो सकता है सिकुड़ने लगे.
भारत के दारुल उलूम देवबंद ने इस बैन को गलत बताया है — वहीं, दरगाह आला हजरत, बरेली से जुड़े संगठन तंजीम उलमा-ए -इस्लाम इसकी सराहना की है.
लखनऊ वाले मुस्लिम धर्मगुरु चुप हैं तो जम्मू -कश्मीर में मुफ़्ती-ए -आज़म ने कहा है कि ये सऊदी अरब का एक राजनीतिक फैसला है.
दारुल उलूम देवबंद के मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी ने जमात से जुड़े लोगों पर दहशतगर्दी के आरोपों को बेबुनियाद कहा है.
कश्मीर के मुफ़्ती नासिर उल इस्लाम ने कहा ये सऊदी का आंतरिक मसला है –रही बात हिंसा और नफरत फ़ैलाने की तो लोग इस्लाम को अच्छी तरह समझते हैं, इस्लाम पर चलते हैं, वह हिंसक हो ही नहीं सकते.
मतलब जिहादी हिंसा कश्मीर में, पाकिस्तान और अन्य इस्लमिक देशों में शांति के सिवाय और कुछ नहीं है.
हमारे मुस्लिम संगठनों के लोग भूल रहे हैं कि सऊदी अरब को इस्लाम की जानकारी भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश या किसी भी देश के लोगों से ज्यादा है.
सऊदी अरब ने मुस्लिम संगठन पर बैन लगाया है, कुछ तो पाया होगा इस संस्था में जो इतना कड़ा कदम उठाना पड़ा –हां, आज के परिपेक्ष में राहुल गाँधी कह सकते हैं कि सऊदी अरब मुस्लिम देश तो है मगर इस्लाम को नहीं मानता.
अब ज्वलंत प्रश्न यहां यह पैदा होता हैकि क्या भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिम सऊदी अरब का बहिष्कार कर सकते हैं तब्लीगी जमात पर बैन के विरोध में?