China Vs India: LAC पर क्या ऊँट पहाड़ के नीचे आयेगा?

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काफी प्रतीक्षा के बाद भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच LAC के मुद्दे पर फिर एक बार हुई है बैठक जिसमें बहुत सारे पुराने कमिटमेंट्स का ज़िक्र चला जिन पर अभी तक अमल होना बाकी है. साध ही साध औपचारिक तौर पर भविष्य में दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण मैत्री संबन्धों को लेकर भी दोनों पक्षों द्वारा सहमति जताई गई है.

विदेश मंत्री जयशंकर मिले चीनी समकक्ष से

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिये दुशांबे (शंघाई) गये विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के अपने समकक्ष वांग यी से मुलाकात की. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह वार्तालाप करीबन घंटे भर तक चली.  पश्चिमी सेक्टर  में लंबित लाईन ऑफ कंट्रोल  (LAC) बातचीत का मुख्य केंद्र रही.  भारत के विदेश मंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी ट्वीटर पर देते हए यह बताया कि  वार्तालाप  LAC के मुद्दों पर आधारित थी.

द्विपक्षीय परिवर्तन की अपेक्षा

भारतीय विदेश मंत्री ने बातचीत के मुख्य अंशों को साझा करते हुए बताया कि वर्तमान स्थिति पर एकतरफा परिवर्तन को स्वीकार नही किया जा सकेगा.  दोनों देशों के सम्बंधों की उन्नति और समृद्धि के लिये बॉर्डर पर शांति कायम रखना आवश्यक है.  बातचीत के दौरान दोनों नेता सैन्य कमांडर्स स्तरी की बैठक के आयोजन हेतु भी राज़ी हो गये हैं.

विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

भारतीय विदेश मंत्रालय ने शंघाई में हुई दोनो देशों के नेताओं की बैठक को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि “विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी के मौजूदा हालात को लेकर विस्तृत रूप से विचारों को साझा किया और भारत-चीन के रिश्तों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा हुई.”

पुराने समझौते की याद दिलाई

साल 2020 सितम्बर माह में हुई मीटिंग की याद दिलाते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उस वक्त हुए समझौते को कार्यान्वित करने पर बात की .  LAC से संबंधित (पूर्वी लद्दाख) सभी विषयों पर बातचीत और समस्याओं को सुलझाने पर ज़ोर दिया.  उन्होंने कहा कि पैंगोंग झील से मुक्ति ने बाकि मुद्दों को सुलझाने का वातावरण बना दिया है.  यह भी कहा कि भारत की चीन के पक्ष में यह सकारात्मक सोच भी रही है कि चीन  इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में कार्य अवश्य ही करेगा परन्तु अन्य स्थानों पर स्थिति ज्यों की त्यों ही बनी हुई है .

दिया सीमा-विवाद के समाधान पर ज़ोर 

विदेश मंत्री ने हर उस बात का स्मरण कराया जिन पर इस  मौजूदा हालात को  देखते हुए दोनों पक्ष एकमत और  सहमत हुए थे क्योंकि ऐसी परिस्थितियों का अधिक समय तक यथावत बने  रहना दोनों के  लिये ही श्रेयकर नहीं है. बातों पर अमल न होने पर इसका  दोनों देशों के सम्बंधों पर निगेटिव प्रभाव भी पड़ सकता है.
विदेश मंत्री ने यह भी दावा  किया कि साल  1988 के उपरान्त अच्छे  सम्बंधों ने सीमा पर शांति  बहाल रखी थी परन्तु गत वर्ष इन स्थितियों में अकस्मात परिवर्तन  ने रिश्तों में मनमुटाव पैदा होने के हालात बना दिये जिसने वर्ष 1993 और 1996 में उन सभी प्रतिबद्धताओं को कमज़ोर करार दिया जिन पर  कार्य किये जाने  थे. निश्चत ही रिश्तों की जड़ें भी कमज़ोर हुई हैं .  उन्होंने ये कह कर अपनी बात पूरी की कि दोनों पक्षों की बेहतरी इसी में है  कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पेंडिंग मुद्दों पर समझौतों और प्रोटोकॉल के अंतर्गत शीघ्र ही  समाधान निकाले जाने की पहल हो .

अब कमांडर्स की होगी बैठक

दोनों मंत्रियों ने इस बात की भी चर्चा की कि  25 जून 2021 को WMCC की बैठक में वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स की उपस्थिति में  एक और राउंड की बैठक का निर्णय लिया गया था . दोनों ही पक्षों ने सहमति जताई कि शीघ्र ही इस बैठक का आयोजन हो . अतत: दोनों पक्ष इस बात पर  सहमत हुए कि LAC और  बाकी मुद्दों पर भी सिर्फ चर्चा नही उनका निश्चित तौर पर समाधान भी होना चाहिये ताकि जमीन की स्थिरता पर  दोनों देश एक साथ कार्य करें और यह पुराना इतिहास फिर से  दोहराया न जाए .

आपसी-समझ को बनाया जायेगा आधार

ये आश्वासन और विश्वास भी एक-दूसरे को दिया गया कि दोनों ही पक्षों द्वारा किसी भी मुद्दे पर अब एकतरफा कार्यवाही नही होगी तथा म्युचुअल अंडरस्टेंडिंग से कार्य किया जायेगा ताकि तनाव की परिस्थितियाँ उत्पन्न न हों . इस बात पर भी दोनों मंत्रियों ने सहमति जताई कि उन्हें सदैव एक-दूसरे के संपर्क में होने के लिये तत्पर रहना आवश्यक होगा .

 

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