Sri Lanka: भारत को रहना होगा सावधान!

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एक बार सर्वपल्ली राधाकृष्णन सोवियत संघ के तानाशाह जोसेफ स्टालिन से मिले।
दोनो भारत का नक्शा देख रहे थे, तभी स्टालिन ने श्रीलंका की तरफ उंगली दिखाकर पूछा ये कौन सा टापू है। राधाकृष्णन ने कहा ये टापू नही बल्कि एक आजाद देश सिलॉन (श्रीलंका का तत्कालीन नाम) है।
इस पर स्टालिन मुस्कुराया और कहा “बट व्हाय?”
स्टालिन का अर्थ था कि भारत इस पर आक्रमण करके विलय क्यो नही करता। आप जोसेफ स्टालिन को क्रूर, और निर्दयी कह सकते है मगर उसने जो कहा वो बहुत गंभीर बात है। भारत ने श्रीलंका की गलतियों की कीमत करोड़ो में चुकाई है।
श्रीलंका भारत और चीन के बीच बैठा सिर्फ मौज करता है, वह चीन से कर्ज लेता है और फिर चुका नही पाता तो अपनी जमीन चीन को दे देता है। इस वजह से भारत पर दबाव बनता है और भारत फिर एक सॉफ्ट लोन देकर चीन को भगाता है।
इतनी नफरत तो पाकिस्तान से भी नही है जितनी श्रीलंका से हो गयी है, क्योकि समझ नही आता हम अपनी लड़ाई लड़े या इनकी। 1988 में यही हुआ था ये तमिलो पर अत्याचार कर रहे थे बदले में लिट्टे ने इन्हें पीटना शुरू कर दिया।
एक तरफ लिट्टे था दूसरी तरफ कोलंबो में दंगे हो रहे थे, ऐसे में इन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी से मदद मांगी की हमे अपनी सेना कोलंबो में चाहिए आप दिल्ली से अपनी सेना भेज दीजिये। राजीव गांधी का मन बिल्कुल नही था मगर डर था कि यदि हमने सेना नही भेजी तो चीन अपनी सेना ना भेज दे।
मजबूरन राजीव गांधी ने सेना तो भेजी लेकिन ये पीस कीपिंग फोर्स थी CRPF नही, इसका काम लिट्टे से लड़ना नही था बस काबू करना था। इस वजह से हमारे 1248 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए और राजीव गांधी लिट्टे से भी बुरे बने और श्रीलंका के लोगो से भी क्योकि श्रीलंका वालो को विदेशी सेना की उपस्थिति पसन्द नही आ रही थी।
नतीजा यह हुआ कि राजीव गांधी को मार दिया गया और हमने एक अच्छा नेता खो दिया। अब यही खेल ये लोग मोदीजी के साथ खेल रहे है, पहले तो इनके नेता चीन का कर्ज हैसियत से ज्यादा लेते रहे अब चुकाने की ताकत नही है तो भारत के आगे हाथ फैला रहे है।
भारत को डर यह है कि अगर हमने मदद नही की तो ये चीन को अपना कोई नया अड्डा ना दे दे। कुल मिलाकर श्रीलंका, लाओस, पाकिस्तान, सूडान, लेबनॉन और माली जैसे देश इस दुनिया के लिये एक बोझ है। ऐसे देश और इनके जाहिल
नागरिकों का मर जाना मानव जाति के लिये सुकून की बात है।
मेरे विचार में भारतीयों को तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी करनी चाहिए, ये तैयारी जनता के लेवल पर भी हो सकती है। चीन जर्मनी की भूमिका में दिखाई दे रहा है, संभव है यही अक्ष देश बनेगा जिसका साथ ईरान और पाकिस्तान देंगे। मित्र देशो में वही पुराने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस तो होंगे ही मगर इन्हें भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जॉइन करेंगे।
इस भीषण युद्ध मे बहुत जाने जाएगी लेकिन विजय मित्र देशो की ही होगी। संभव है जर्मनी की तरह चीन के भी कई हिस्से हो जाये उससे पहले भारत का मेक इन इंडिया चरम पर पहुँचना चाहिए और ये जनता ही कर सकती है। तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो हो सकता है सरकार सेना को दे दे खुली छूट -देश के बाहर।
ऐसे में सेना के हाथ खुले होंगे हमे बस एक माहौल तैयार करना है, श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश हमे वापस चाहिए क्योकि बाहर रहकर ये सुरक्षा के लिये खतरा है। अंदर रहकर भी बनेंगे मगर हमारे नियंत्रण में होंगे, वार क्राइम होंगे कोई दिक्कत नही लेकिन देश बचना चाहिए वो भी लम्बे समय के लिये।
हमारे चोल और पंड्या राजाओ ने यही किया था महाराज राजराजा जानते थे कि श्रीलंका उनके लिये सिरदर्द बनेगा क्योकि उस समय हिन्द और अरब महासागर में समुद्री लुटेरों का डंका बजता था। इसीलिए राजेंद्रन ने सेना को श्रीलंका पर आक्रमण के आदेश दिये और श्रीलंका का भारत मे विलय किया था।
खर्चा बहुत हुआ मगर प्लान इफेक्टिव था उसी की आवश्यकता आज है।