Sri Lanka: युगान्डा के बाद चीन का अगला शिकार

चीन के कर्ज का मकड़जाल – अफ्रीकी देश गुलामी की कगार पर.
श्री लंका के पूर्व फील्ड मार्शल सरथ फोन्सेका के कहा है कि श्री लंका युगांडा की ही तरह चीन के कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है.
उन्होंने युगांडा में चीन के बनाए अकेले अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कब्ज़ा करने की घटना की तुलना हमबनटोटा बंदरगाह से की है जो चीन से मिले कर्ज से ही बना है.
चीन ने अनेक देशों को अपने कर्ज के मकड़जाल में फंसाया हुआ है जिससे वो कर्ज न अदा करने पर उस देश के संसाधनों पर कब्ज़ा कर सके और यहां तक उस देश पर भी कब्ज़ा कर ले –आज ये युग का ये चीन का उपनिवेशवाद है.
ऐसा अनुमान है चीन ने अफ्रीकन देशों को 140 बिलियन डॉलर कर्ज दिया हुआ है और वो कभी भी उन देशों को गपच सकता है जैसे आज पाकिस्तान उसकी जेब में है.
चीन एक अंतरराष्ट्रीय सूदखोर की तरह काम कर रहा है जिसका एक ही मकसद रहता है –मेरा कर्ज वापस करो वरना अपनी जमीन जायदाद मेरे नाम करो.
10 प्रमुख अफ्रीकन देशों पर चीन का कर्ज नीचे दिया गया है.
1. अंगोला (25 बिलियन डॉलर); 2. इथियोपिया (13.5 बिलियन डॉलर); 3. केन्या (7.9 बिलियन डॉलर); 4. रिपब्लिक ऑफ़ कांगो (7.5 बिलियन डॉलर); 5. ज़ाम्बिया (6.5 बिलियन डॉलर); 6. उत्तरी सूडान (6.4 बिलियन डॉलर); 7. कैमरून (5.5 बिलियन डॉलर); 8. नाइजीरिया (4.8 बिलियन डॉलर); 9. घाना (3.5 बिलियन डॉलर) और 10. डी आर सी * (3.4 बिलियन डॉलर) (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो) इन 10 देशों का ही कर 84 बिलियन डॉलर है.