स्टालिन की बेटी ने बिगाड़े भारत के समीकरण – VishvaDharm

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एक नाम दुनिया के तानाशाहों में बड़ा जोरदार शुमार है. स्टालिन. आज से लगभग चौवन साल पहले की बात है. साल 1967 में दिल्ली के अमेरिकी दूतावास पर एक लड़की पहुँचती है जिसने अगले दो साल के लिये भारत के अंतरराष्ट्रीय समीकरण बिगाड़ दिये।

ये लड़की थी जोसेफ स्टालिन की बेटी स्वेटलाना. जोसेफ स्टालिन सोवियत संघ का तानाशाह था और ये वो दौर था जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध चल रहा था। अमेरिका सोवियत के हर नागरिक को शरण देने को तैयार था और फिर ये तो जोसेफ स्टालिन की बेटी थी।

स्वेटलाना जब अमेरिकी दूतावास पहुँची तो दूतावास बंद हो चुका था, और अमेरिकी राजदूत सेलेस्ट के घर अमेरिकियों की पार्टी चल रही थी। दूतावास के गार्ड ने सेलेस्ट को बताने की जगह पहले सीआईए को खबर की और अब जहाँ दिल्ली चैन से सो रही थी वही वाशिंगटन की नींद उड़ चुकी थी।

स्वेटलाना ने बताया कि उसने सोवियत की शरण मे पहुँचे एक कम्युनिस्ट बृजेश सिंह से अनौपचारिक विवाह किया था और बृजेश सिंह की मौत के बाद हिन्दू परंपरानुसार उनकी अस्थियां बहाने भारत आई थी, हालांकि सोवियत ने इसकी इजाजत शुरुआत में नही दी क्योकि वे सती प्रथा को थोड़ा बहुत जानते थे और ये मानकर बैठे थे कि हिन्दू स्वेटलाना को सती करेंगे।

हालांकि जैसे तैसे स्वेटलाना को आज्ञा मिली और वो भारत आयी, चूंकि बृजेश सिंह भारत के लिये भगोड़ा था और शादी भी औपचारिक नही थी इसलिए स्वेटलाना को यहाँ कोई शरण नही मिली। इसलिए वो अमेरिका की शरण मे आयी थी, उसने सेलेस्ट को धमकी दी कि यदि उसे अमेरिका में शरण नही मिली तो वो मीडिया के पास जाएगी और दुनिया के सामने अमेरिका और भारत की सच्चाई रखेगी की लोकतांत्रिक देश एक स्त्री को शरण नही दे रहे।

सेलेस्ट इससे डर गया और उसने वीजा दे दिया, स्वेटलाना पहले रोम पहुँची और फिर वाशिंगटन। ये खबर जैसे ही दुनिया मे फैली, सोवियत संघ भारत पर भड़क उठा। उसने भारत पर अमेरिका के गुट में जाने के आरोप लगाए, अब वाशिंगटन में पार्टी हो रही थी और दिल्ली की नींद उड़ी हुई थी।

उस समय इंदिरा गांधी एक परिपक्व नेता नही थी लेकिन फिर भी उन्होंने एक निर्णय ले लिया कि वे भारत के राजदूत को स्वेटलाना का इंटरव्यू लेने को कहेगी। अमेरिका में भारतीय राजदूत ने स्वेटलाना के मुँह से निकलवा दिया कि भारतीयों ने उसकी कोई मदद नही की।

सोवियत संघ को जब यह पता चला तब जाकर वह शांत हुआ, मगर स्वेटलाना दिल्ली से भागी थी इसलिए रिश्तों में गांठ पड़ गयी थी। इसी बीच अमेरिका में चुनाव हुए और रिचर्ड निक्सन राष्ट्रपति बने अब भारत की चिंता और बढ़ गयी क्योकि रिचर्ड पूरे पाकिस्तान परस्त थे।

थक हारकर हमे सोवियत संघ के आगे झुकना पड़ा और केरल में जो कम्युनिस्ट सरकार को इंदिरा गांधी ने हटा दिया था उसे दोबारा लाया गया। तब कही जाकर भारत के सोवियत संघ से संबंध सुधरे। बाद में सोवियत संघ ही था जिसने पाकिस्तान के विरुद्ध हमे अमेरिका के युद्धपोत से बचाया था और हमने युद्ध जीत लिया था।

इस बीच स्वेटलाना लगातार सोवियत संघ की पोल खोलती रही और अमेरिका सोवियत को चिढ़ाता रहा। इतिहास का यह अध्याय जानना बड़ा आवश्यक है ताकि हम समझ सके कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हित और स्वार्थ कितने टकराते है और किसी भी देश को कितना अधिक प्रभावित करते है।