तप्त भूमि पर नम सावन घन (कविता)

गीत गूंजने लगे

सूनी वादियों में

नम सावन घन आ गया

ग्रीष्म की तप्त भूमि में

आ गयी खिलखिलाती हास

स्मित अधरों पर

मधुर वसन्त हर्षाया

इस अतृप्त शुष्क उपवन में

सुगंधित नव पुष्पों ने

धरा का किया आच्छादन

धरनि ने स्नेहित अम्बुज

की बूंदों से किया स्व का आचमन

गूज उठा कोयल का

मधुर कुन्जन

आह्लादित मयूर भी

करने लगा शोभित नव-नर्तन

समाहित हो गया अम्बर

नेह की घटाओं में

खो गया अस्तित्व संपूर्ण 

मधुर गीत मधु रागिनी में!