Tensions High! ‘Taiwan को China में मिलाना हमारा ऐतिहासिक मिशन’

On: December 31, 2025 11:37 AM
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Taiwan

एशिया का माहौल एक बार फिर गर्म है। Taiwan और China के बीच तनातनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बीजिंग ने हाल ही में ताइवान के चारों ओर रॉकेट और मिसाइल लॉन्च कर “शक्ति प्रदर्शन” किया, जिसे उसने “ऐतिहासिक मिशन” बताया। चीन का यह कदम न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।

चीन लगातार यह दावा करता रहा है कि Taiwan उसका अभिन्न हिस्सा है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानता है। बीजिंग की “One China Policy” के तहत कोई भी देश ताइवान को एक अलग इकाई के रूप में मान्यता नहीं दे सकता। यही नीति अब संघर्ष का केंद्र बनती जा रही है।

वहीं, ताइवान की लोकतांत्रिक सरकार ने स्पष्ट कहा है कि वह “ड्रैगन” के दबाव में नहीं झुकेगा। ताइवान के राष्ट्रपति ने हालिया भाषण में कहा कि देश अपने “स्वतंत्र अस्तित्व की रक्षा” के लिए हर कदम उठाएगा।

South China Sea और Indo-Pacific region इस समय बारूद के ढेर पर बैठे हैं। चीन लगातार समुद्री सीमाओं के पास अपने युद्धपोत और विमान तैनात कर रहा है। दूसरी ओर, USAJapan, और Australia जैसे देश ताइवान के समर्थन में खड़े हैं। इससे यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शक्ति संघर्ष का रूप ले चुका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह झगड़ा और बढ़ा, तो यह Asia की सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है। भारत सहित कई देशों ने भी स्थिति पर नज़र बनाए रखी है।

Taiwan ने भी अपनी सुरक्षा को लेकर रणनीति तैयार कर ली है। देश ने अपने F-16 fighter jetsanti-missile defense systems, और naval patrols को सक्रिय कर दिया है। माना जा रहा है कि चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच ताइवान अपने “self-defense budget” को और बढ़ा सकता है।

आधुनिक तकनीक के सहारे, ताइवान अब सिर्फ समुद्री सुरक्षा पर नहीं बल्कि “cyber defense” पर भी ध्यान दे रहा है। हाल में हुई कई साइबर हमलों के पीछे चीन के hackers होने का संदेह जताया गया है।

China-Taiwan war

चीन ने अपने सरकारी मीडिया के ज़रिए घोषणा की कि “ताइवान को मुख्य भूमि चीन में मिलाना हमारा historic mission है”। इस बयान के बाद देशभर में “reunification campaign” शुरू कर दी गई। नए पोस्टर, प्रचार, और सोशल मीडिया पर जारी वीडियो के ज़रिए चीन ने अपने नागरिकों को “राष्ट्रीय एकता” का संदेश दिया।

लेकिन, विश्लेषकों का कहना है कि यह सिर्फ एक political narrative नहीं, बल्कि एक strategic warning भी है। चीन यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।

अमेरिका ने चीन के कदम को “provocative act” बताया और कहा कि इससे एशिया में स्थिरता ख़तरे में पड़ सकती है। जापान और यूरोपीय संघ ने भी बयान जारी करते हुए दोनों पक्षों से “संयम” बरतने की अपील की।

India, जो Indo-Pacific क्षेत्र में एक प्रमुख ताकत के रूप में उभर रहा है, ने कहा कि वह “status quo” में किसी भी बदलाव के खिलाफ है और शांति बनाए रखने का समर्थन करता है।

वहीं, सैटेलाइट इमेजेज़ से पता चला है कि चीन की सीमाओं के पास सैकड़ों ballistic missiles और warships तैयार खड़े हैं। यह स्थिति किसी भी समय टकराव का रूप ले सकती है।

भारत को लेकर भी इस संकट के कई आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव हैं। Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी है, और इस क्षेत्र में किसी भी युद्ध जैसी स्थिति से global supply chain पर असर पड़ सकता है।

भारत की इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां और मोबाइल मैन्युफैक्चरर इस स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं क्योंकि semiconductor shortage पहले ही कई उद्योगों को प्रभावित कर चुका है।

कई रक्षा विशेषज्ञ चेतावनी दे चुके हैं कि अगर China-Taiwan war शुरू हुआ, तो यह केवल द्वीप तक सीमित नहीं रहेगा। United StatesJapan, और Australia पहले ही सुरक्षा समझौतों के तहत तैयारियाँ बढ़ा रहे हैं। ऐसी स्थिति में, यह टकराव एक “Global Crisis” का रूप ले सकता है।

हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चीन फिलहाल “पूर्ण युद्ध” से बचना चाहेगा क्योंकि इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ेगा।

Taiwan को लेकर बढ़ता तनाव सिर्फ भू-राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि भावनात्मक और आर्थिक मुद्दा भी है। जहाँ चीन इसे अपने “reunification mission” के रूप में पेश कर रहा है, वहीं ताइवान स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा का प्रतीक बन गया है।

दुनिया अब इस संघर्ष को बड़ी चिंता से देख रही है, और सवाल यह है — क्या आने वाला साल ताइवान के लिए “शांति का वर्ष” साबित होगा, या एशिया में युद्ध की नई आहट लेकर आएगा?

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