आधुनिक दिल्ली की शिल्पकार थीं शीला दीक्षित, वो कड़े फैसले जिससे बदल गई दिल्ली की सूरत

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देश की राजधानी दिल्ली को मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित ने नई पहचान दी. वो पहचान जिससे प्रदूषण के घुटते धुएं और ट्रैफिक जाम में रेंग-रेंग कर चलने वाली दिल्ली और उसकी संकरी सड़कें पुराने दिनों की बात हो गई. शीला ने अपनी सत्ता के पंद्रह साल में दिल्ली को बहुत कुछ दिल से दिया. आइए देखते हैं वो बदलाव जिन्होंने दिल्ली को नई पहचान दी.

1-दिल्ली में आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में फ्लाइओवर सबसे क्रांतिकारी साबित हुए.एक वक्त जब दिल्ली की सड़कें संकरी और छोटी नजर आती थी और लोग ट्रैफिक जाम की वजह से रिंग रोड पर जाने के नाम से सहम जाते थे तो दिल्ली में फ्लाइ ओवरों का दौर शुरू हुआ. रिंग रोड को फ्लाइओवरों ने सिग्नल फ्री कर दिया. एक के बाद एक फ्लाइ ओवरों ने दिल्ली के सफर को सुहाना बना दिया.

धौलाकुआं फ्लाइओर, एम्स फ्लाइओवर, बारापुला पुल जैसे तकरीबन 70 फ्लाइओवर सिर्फ शीला दीक्षित के कार्यकाल में बनें जहां आज ट्रैफिक सुस्ताता नहीं बल्कि तेज रफ्तार से दौड़ता है.

2-दिल्ली में डीज़ल गाड़ियों खासतौर से बसों की वजह से प्रदूषण का आलम ये थे कि लोगों का दम घुटता था और दिन में आंखें जलती थीं. दिल्ली में सांस के मरीजों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा होता जा रहा था क्योंकि दमघोंटू हवा में सांस लेना मुश्किल था. ऐसे समय में शीला दीक्षित ने दिल्ली को प्रदूषणमुक्त करने का संकल्प लिया. शीला दीक्षित ने सबसे ज्यादा दिल्ली में पेड़ लगवाए और ग्रीन दिल्ली के लिए लोगों को जागरुक किया. पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए शीला दीक्षित ने दिल्ली में हरियाली के दायरे को बढ़ाया और लोगों को इसे संरक्षित करने की अपील भी की. आज दिल्ली की हरियाली के लिए निश्चित तौर पर दिल्ली एमसीडी के साथ-साथ शीला दीक्षित को श्रेय जाता है.

3-दिल्ली में सीएनजी की शुरूआत ही शीला दीक्षित ने की. उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर रसूख वालों और दंबंगों की दौड़ती ब्लू लाइन और डीटीसी की डीज़ल बसों को वाइप आउट कर सीएनजी बसों को सड़कों पर उतारने का कलेजा दिखाया. शीला दीक्षित के फैसले का दिल्ली की सड़कों पर विरोध भी देखा गया. लेकिन विरोध की परवाह न करते हुए उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए डीजल के बजाय सीएनजी से चलने वाली बसों को उतारने का कड़ा फैसला किया. उसी का नतीजा है कि आज दिल्ली की आबोहवा में वो पहले वाला प्रदूषण नहीं है. डीटीसी स्वच्छ ईंधन से चलने वाली दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बस सेवाओं में से एक बन चुका है.

4-शीला दीक्षित ने दिल्ली को मेट्रो की सौगात दी. आज दुनिया भर में दिल्ली की मेट्रो सेवा की पहचान है जिसका श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, ‘मेट्रो-मैन’ ई श्रीधरन के साथ शीला दीक्षित को जाता है.

5-शीला दीक्षित के ही कार्यकाल में देश के पहले कॉमनवेल्थ गेम्स हुए. कॉमन वेल्थ गेम्स की वजह से दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट में बहुत काम हुए. कॉमनेवल्थ गेम्स के सफल आयोजन का सेहरा शीला दीक्षित के सिर सजा. देश -विदेश के हज़ारों खिलाड़ियों ने इसमें शिरकत की और शांति-सुरक्षा के साथ दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन निपट गया. हालांकि गेम्स की वजह से शीला सरकार पर करप्शन के आरोप भी लगे लेकिन सौम्य शीला दीक्षित ने कभी राजनीति की लक्ष्मण सीमा नहीं लांघी और अपने ऊपर लगे आरोपों पर कभी तीखा पलटवार नहीं किया.

6-शीला दीक्षित ने अपने कार्यकाल मे जन भागीदारी को महत्व दिया. आरडब्लूए के साथ सरकार के समन्वय और भागीदारी सिस्टम के जरिए उन्होंने जनता और सरकार के बीच पुल तैयार किया.

7-उनकी यही सकारात्मक सोच केंद्र सरकार के साथ भी समन्वय के रूप में दिखी. शीला के 15 साल के कार्यकाल में किसी ने कभी नहीं सुना कि दिल्ली के सीएम का दिल्ली के उप राज्यपाल के साथ कोई मतभेद हुआ या फिर दिल्ली सरकार की कोई फाइल केंद्र के मंत्रालय में अटकी पड़ी रही. बल्कि दिल्ली में मेट्रो  जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना भी केंद्र के साथ समन्वय के चलते समय से पहले पूरी हुई. ये सार्थक राजनीति और स्वस्थ लोकतंत्र का सबसे बड़ा उदाहरण है और शीला दीक्षित उस उदाहरण की किरदार भी तो मिसाल भी हैं.

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